कैकान राज्य

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ

कैकन साम्राज्य, [1] सिंध (वर्तमान पाकिस्तान ) में एक हिन्दू जाट राज्य था। सिंध (पाकिस्तान) में कैकन क्षेत्र जाट लोगों के स्वतंत्र कब्जे में था। जाटों के साथ लगातार बातचीत के अलावा, फारस और सिंध के पहले अरब आक्रमण जाट लोगों से मिले थे। [2] इस जाट साम्राज्य ने भारत को अरब आक्रमणकारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।।।

कैकणो का साम्राज्य
धर्म हिन्दू
निवासी सिंधु
सरकार साम्राज्य

इतिहास[संपादित करें]

कैकन सिंध का एक प्रांत था। किकनिया एक पर्वत का नाम है। जब पहली बार अरब आक्रमणकारी कैकन पर्वत पर आए तो कैकन जाटों ने उन्हें खदेड़ दिया। [3] जब मुहम्मद बिन कासिम (694-715 ईस्वी) ने सिंध पर आक्रमण किया, तो कैकन देश जाटों के स्वतंत्र कब्जे में था। [4] कैकन देश दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में होना चाहिए था, जिसे खलीफा अल-मुतसिम-बि-इल्लाह, (833-881 ईस्वी) के शासनकाल में अरब जनरल अमरान बिन मूसा ने जाटों से जीत लिया था। उसी शासनकाल में जाटों के खिलाफ एक और अभियान भेजा गया था, जिन्होंने हजार (?) की सड़कों पर कब्जा कर लिया था ... और सड़कों पर आतंक फैला दिया था और रेगिस्तान की ओर सभी दिशाओं में चौकियां लगा दी थीं। पच्चीस दिनों के खूनी संघर्ष के बाद वे दूर हो गए। उनमें से २७००० को बंदी बनाकर विजय की विजय की कृपा के लिए ले जाया गया। युद्ध के लिए मार्शल होने पर इन लोगों के बीच अपने सींगों को फूंकने का रिवाज था। कैकन के जाटों ने बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी और अरबों को बार-बार बुरी तरह हराया। [5] [6] अतः अरब भारत पर किक्कन मार्ग से आक्रमण नहीं कर सका। [7]।।।

यह सभी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Barve, Shashikant V. (1995). Introduction to Classical Arabic: A Contribution to Islamic and Oriental Studies. S.V. Barve. पृ॰ 451.
  2. "University of Allahabad. Department of Modern Indian History, University of Kerala. Department of History, University of Travancore, University of Kerala". Journal of Indian History, Volume 43. Department of Modern Indian History. 1965.
  3. Siddiqi, Amir Hasan (1971). Decisive Battles of Islam. Jamiyatul Falah Publications. पृ॰ 107.
  4. Dīn, Malik Muḥammad (2001). Bahawalpur State with Map 1904 (reprint संस्करण). Sang-e-Meel Publications. पृ॰ 392. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-9-693-5-12366.
  5. "University of Allahabad. Department of Modern Indian History, University of Kerala. Department of History, University of Travancore, University of Kerala". Journal of Indian History, Volume 43. Department of Modern Indian History. 1965.
  6. "Indian youth". Indian Armed Forces Year Book. Indian youth. 1967. अभिगमन तिथि 11 July 2021.
  7. Barve, Shashikant V. (1995). Introduction to Classical Arabic: A Contribution to Islamic and Oriental Studies. S.V. Barve. पृ॰ 451.