केन्द्रीय बल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
उपग्रहीय मण्डल में गुरुत्वीय बल एक केन्द्रीय बल है।

चिरसम्मत यांत्रिकी में, केन्द्रीय बल (central force), किसी वस्तु पर लगने वाले उस बल को कहते हैं जिसका परिमाण केवल r पर निर्भर करता है (जहाँ r वस्तु की मूलबिन्दु से दूरी है।) तथा जिसकी दिशा वस्तु को मूलबिन्दु से मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है।

जहाँ बल है। F सदिश मानयुक्त बल फलन है, F अदिश् मानयुक्त बल फलन है, r स्थिति सदिश, जिसका परिमाण ||r|| है, तथा = r/||r|| संगत ईकाई सदिश (unit vector) है।

उदाहरण

गुरुत्वीय बल तथा कूलॉम्ब बल दोनों ही केन्द्रीय बल हैं।

गुण[संपादित करें]

1. ये बल सर्वव्यापी होते है अर्थात प्रत्येक स्थान पर समान रूप से होती है और हर जगह पाए जाते है। 2. ये एक समीकरण के रूप में व्यक्त किये जा सकते है इसलिए इनके साथ व्यवहार अच्छा होता है अर्थात आसानी से समस्याएँ हल की जा सकती है। 3. केन्द्रीय बल केवल r का फलन होता है। 4. ये बल स्थिर बिंदु से दूर या उसकी तरफ कार्यरत होते है। 5. ये बल संरक्षि प्रकृति के होते है अर्थात इन पर संरक्षण का नियम लागू होता है। 6. जब कोई कण केन्द्रिय बल के प्रभाव में गति कर रहा हो तो उस कण में कोणीय संवेग व यांत्रिक ऊर्जा का मान संरक्षित रहते है। 7. यदि किसी कण पर केन्द्रीय बल कार्यरत है तो इसका अभिप्राय है कि उस कण की गति एक तल के रूप हो रही है।

सन्दर्भ[संपादित करें]


इन्हें भी देखें[संपादित करें]