कृपाराम (काव्यशास्त्री)

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कृपाराम हिंदी काव्यशास्त्र के प्रथम लेखक थे जो सोलहवीं शती के पूर्वार्द्ध में हुए थे। इनकी एकमात्र ज्ञात रचना हिततरंगिणी है।

परिचय[संपादित करें]

इनका कुछ वृतांत ज्ञात नहीं है। इन्होंने संवत् १५९८ में रसरीति पर 'हिततरंगिणी' नामक ग्रन्थ दोहों में रचा। रीति या लक्षण ग्रंथो में यह बहुत पुराना ग्रन्थ है। कवि ने कहा है कि अन्य कवियों ने बड़े छंदों के विस्तार में शृंगार रस का वर्णन किया है पर मैंने 'सुघरता' के विचार से दोहों में वर्णन किया है। इससे लगता है कि इनके पहले और लोगों ने भी रीतिग्रन्थ लिखे थे जो अब उपलब्ध नहीं हैं। 'हिततरंगिणी' के कई दोहे बिहारी के दोहों से मिलते हैं।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]