उपग्रह

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यह लेख कृत्रिम उपग्रह के बारे में है। प्राकृतिक उपग्रहों के लिए, जो चन्द्रमाओं के रूप में जाने जाते हैं, प्राकृतिक उपग्रह देखे"।
पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का एक पूर्ण आकार मॉडल है ईआरएस 2 (ERS 2)

अन्तरिक्ष उड़ान (spaceflight) के संदर्भ में, उपग्रह एक वस्तु है जिसे मानव ([[:en:human|huma प्रयास के द्वारा कक्षा में रखा गया है। इस तरह की वस्तुओं को प्राकृतिक उपग्रहों जैसे चंद्रमा(moon) से अलग करने के लिए कभी कभी कृत्रिम उपग्रह भी कहा जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

पूर्व अवधारणाएँ[संपादित करें]

एक उपग्रह के कक्षा में प्रक्षेपण की पहली काल्पनिक चित्रण एडवर्ड एवेरेट हाले के द्वारा एक लघु कहानी है, दी ब्रिक मून .यह कहानी दी अटलांटिक मंथली में श्रेणित की गई थी, जो 1869 में शुरू हुआ था।[1][2] यह विचार जूल्स वेर्ने की (1879) में फ़िर से उभर कर आया था।

1903 में कोंस्तान्तीं त्सिओल्कोव्स्क्य (1857-1935) ने दी एक्सप्लोरेशन ऑफ़ कॉस्मिक स्पेस बाए मीन्स ऑफ़ रीअक्शन दिवायेसिस प्रकाशित किया, जो अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण में राकेट्री के उपयोग पर पहला शैक्षिक निबंध है। उन्होंने पृथ्वी के चारों ओर की एक न्यूनतम कक्षा के लिए आवश्यक एक कक्षीय गति की ८ किमी/सेकंड के रूप में गणना की है और यह भी कि तरल प्रणोदक द्वारा ईंधित किया गया एक बहुमंज़िला रॉकेट (multi-stage rocket|multi-stage rocket) इसे प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने तरल हाइड्रोजन (liquid hydrogen) और तरल ऑक्सीजन (liquid oxygen) के प्रयोग का प्रस्ताव रखा, यद्यपि अन्य संयोजन का उपयोग किया जा सकता है।

1928 में हर्मन पोतोच्निक (1892-1929) ने, अपनी एकमात्र किताब प्रकाशित की, दस प्रॉब्लम देर बेफह्रुंग देस वेल्त्रौम्स - देर रकेतें-मोटर (दी प्रॉब्लम ऑफ़ स्पेस ट्रेवल — दी रॉकेट मोटर), यह अंतरिक्ष में एक सफलता और वहाँ स्थायी मानव उपस्थिति के लिए एक योजना है। उन्होंने अन्तरिक्ष स्टेशन का विस्तार से अध्ययन की और अपने गर्भीय कक्षा की गणना की.उन्होंने भूमि के विस्तृत शांतिपूर्ण और सैन्य अवलोकन के लिए अंतरिक्ष यान की परिक्रमा के प्रयोग का वर्णन किया और कैसे अंतरिक्ष की विशेष स्थितियों वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए उपयोगी हो सकता है भी वर्णित की.इस किताब में गर्भाकक्षीय उपग्रहों (त्सिओल्कोव्स्क्य द्वारा पहले लाये गए) का वर्णन है और उनके एवं भूमि के बीच रेडियो के द्वारा संचार भी वर्णित है, लेकिन जन प्रसारण के लिए उपग्रहों का उपयोग करने के और दूरसंचार रिले के रूप में यह विचार कम था।

1945 में वायरलेस वर्ल्ड लेख में अंग्रेज़ी विज्ञान कथा लेखक आर्थर सी. क्लार्क (1917-2008) ने संचार उपग्रह के जन संचार के लिए संभावित उपयोग के बारे में विस्तार से वर्णित किया है।[3] क्लार्क ने उपग्रह प्रक्षेपण के रसद, संभव कक्षाओं और दुनिया के चक्कर लगाते उपग्रहों के एक नेटवर्क के निर्माण के अन्य पहलुओं की जांच की, उच्च-gat संचार की गति. के लाभों की ओर इशारा करतेउन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि तीन गर्भायोजित उपग्रह पूरे ग्रह पर कवरेज प्रदान करेगा.

कृत्रिम उपग्रहों का इतिहास[संपादित करें]

पहला कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक 1, सोवियत संघ द्वारा 4 अक्टूबर 1957, को शुरू किया गया था और उसने सेर्गेई कोरोलेव के साथ मुख्य डिजाइनर के रूप में पूरे सोवियत (Soviet) स्पुतनिक कार्यक्रम (Sputnik program) शुरू किया। इसने सोवियत संघ (Soviet Union) और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतरिक्ष रेस (Space Race) को शरू कर दिया.

स्पुतनिक 1 ने अपनी कक्षा के परिवर्तन के माप से वायुमंडलीय परतों (atmospheric layers) के उच्च घनत्व की पहचान करने में मदद की और योण क्षेत्र (ionosphere) में रेडियोतरंगो के वितरण का विवरण दिया.क्योंकि यह उपग्रह बढे हुए दबाव वाले नाइट्रोजन से भर गया था, स्पुतनिक 1 के लिए भी उल्कापिंड (meteoroid) पता लगाने का पहला अवसर प्रदान किया, आंतरिक दबाव बाहरी सतह पर उल्कापिंड के प्रवेश के कारण की हानि के रूप में किया गया पृथ्वी पर वापस भेजे गए तापमान विवरण में स्पष्ट हुआ होगा.स्पुतनिक 1' की सफलता की अप्रत्याशित घोषणा ने संयुक्त राज्य अमेरिका में स्पुतनिक संकट (Sputnik crisis) को उबार दिया इस में और शीत युद्ध के भीतर तथाकथित अंतरिक्ष रेस (Space Race) को प्रज्वलित किया .

नवम्बर 31957 को स्पुतनिक 2 (Sputnik 2) शुरू किया गया था और लैका (Laika) नाम का एक कुत्ता (dog) प्रथम जीवित यात्री के रूप में कक्षा में गया था।[4]

मई, 1946 में, परियोजना रैंड (Project RAND) ने जारी किया था एक प्रायोगिक विश्व के चक्कर काट अंतरिक्ष जहाज (Preliminary Design of an Experimental World-Circling Spaceship) है, जो, "उपयुक्त उपकरण के साथ एक उपग्रह वाहन वर्णित एक बीसवीं शताब्दी के सबसे शक्तिशाली वैज्ञानिक उपकरणों के होने की उम्मीद की जा सकती है।[5] संयुक्त राज्य अमेरिका 1945 के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका नौसेना (United States Navy) के ब्यूरो ऑफ़ एयरोनाटिक्स (Bureau of Aeronautics) के अंतर्गत कक्षीय (orbit) उपग्रहों को प्रक्षेपित करने पर विचार कर रही थी।संयुक्त राज्य वायु सेना (United States Air Force)'के परियोजना रैंड ने अंततः उपरोक्त रिपोर्ट जारी की है, लेकिन इस पर कि उपग्रह एक संभावित सैन्य हथियार था, विश्वास नहीं किया, बल्कि, वे इसे विज्ञान, राजनीति और प्रचार के लिए एक उपकरण मानते है। 1954 में, रक्षा सचिव ने यह बयां दिया कि, "मुझे किसी भी अमेरिकी उपग्रह कार्यक्रम का पता नही है।"[तथ्य वांछित]

जुलाई 29 (July 29), 1955 को, व्हाइट हाउस (White House) ने यह घोषणा की, कि अमेरिका 1958 के बसंत में, उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के इरादे रखता है। यह वनगार्ड परियोजना (Project Vanguard) के नाम से जाना गया। 31 जुलाई (July 31) को, सोवियत संघ ने घोषणा की की वो 1957 के अंत तक एक उपग्रह प्रक्षेपित करेंगे.

अमेरिकी रॉकेट सोसायटी (American Rocket Society), राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (National Science Foundation) और अंतर्राष्ट्रीय भूभौतिकीय वर्ष (International Geophysical Year) के दबाव के चलते, सैन्य dilach उठाया और जल्दी 1955 को वायु सेना और नौसेना परियोजना ऑर्बिटर (Project Orbiter), जो एक उपग्रह प्रक्षेपण करने के लिए एक ज्यूपिटर सी रॉकेट (Jupiter C rocket) का उपयोग करता है, पर काम कर रहे थे में. यह परियोजना सफल हुई और एक्स्प्लोरर 1 (Explorer 1) जनवरी 31, 1958 को संयुक्त राज्य अमेरिका का पहला उपग्रह बना.[6]

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, सबसे बड़ा कृत्रिम उपग्रह जो इस समय पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है।

अंतरिक्ष निगरानी नेटवर्क[संपादित करें]

संयुक्त राज्य अमेरिका अंतरिक्ष निगरानी नेटवर्क (United States Space Surveillance Network) (एसएसएन) 1957 से, जब से सोवियत संघ ने स्पुतनिक के प्रक्षेपण के साथ अंतरिक्ष युग को खोला है, तब से अंतरिक्ष पिंडों पर नज़र रखी है और अब तक एसएसएन पृथ्वी की परिक्रमा करते 26000 अंतरिक्ष पिंडों को खोज चुका है। एसएसएन अभी 8,000 से ज्यादा आदमी द्वारा बनाये गए कक्षीय पिंडों को खोज चुका है। बाकियों ने फिर से पृथ्वी के अशांत वातावरण में प्रवेश किया है एवं विघटित, या बचने के बाद पुनः प्रवेश किया है और पृथ्वी पर असर डाला है। पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे अंतरिक्ष पिंडों में कई टन वजनी उपग्रहों से लेकर 10 पाउंड वजन के रॉकेट के टुकड़े शामिल हैं। अंतरिक्ष पिंडों का सात प्रतिशत परिछालित उपग्रह हैं (यानी ~ 560 उपग्रह), बाकी अन्तरिक्षीय मलबे (space debris) हैं।[7]यूएसएसटीआरऐटीसीओएम् (USSTRATCOM) को मुख्य रूप से सक्रिय उपग्रहों में दिलचस्पी है, लेकिन अन्तरिक्षीय मलबे पर भी नज़र रखता है जो पुनःप्रवेश पर आने वाली मिसाइलों का गलत आभास दे सकता है। एसएसएन 10 सेंटीमीटर या उससे बड़े व्यास के (बेसबॉल के आकार का) अंतरिक्ष पिंडों को खोज लेता है।

गैर सैन्य उपग्रह सेवाएं[संपादित करें]

गैर-सैन्य उपग्रह सेवाएं की तीन बुनियादी श्रेणियों हैं:[8]

नियत उपग्रह सेवा[संपादित करें]

नियत उपग्रह सेवाएं, पृथ्वी की सतह पर कुछ बिंदुओं के बीच सभी देशों और महाद्वीपों के सैकड़ों आवाजों, डेटा और वीडियो प्रसारण के कार्यों को संभाल रहे है।

मोबाइल उपग्रह प्रणालियाँ[संपादित करें]

मोबाइल उपग्रह प्रणालियाँ नेवीगेशन प्रणाली के रूप में सेवा करने के अलावा, दूरदराज के क्षेत्रों, वाहनों, जहाज और विमान को विश्व के अन्य भागों के लिए और/या अन्य मोबाइल या स्थिर संचार इकाइयों को आपस में जोड़ने में मदद करता है।

वैज्ञानिक अनुसंधान सैटेलाइट (वाणिज्यिक और अवाणिज्यिक)[संपादित करें]

वैज्ञानिक अनुसंधान उपग्रह हमें मौसम विज्ञान संबंधी जानकारी, भूमि सर्वेक्षण डेटा (जैसे, सुदूर संवेदन) और अन्य विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधान अनुप्रयोगों जैसे पृथ्वी विज्ञान, समुद्री विज्ञान और वायुमंडलीय अनुसंधान, प्रदान करता है।

प्रकार[संपादित करें]

मिलस्टार (MILSTAR): एक संचार उपग्रह

कक्षा के प्रकार[संपादित करें]

विभिन्न पृथ्वी कक्षाओं के लिए पैमाने; सियान पृथ्वी की निचली कक्षा का प्रतिनिधित्व करता है, पीला पृथ्वी की माध्यम कक्षा का प्रतिनिधित्व करता है, काले चित्तीदार लाइन गर्भ सम कक्षा का प्रतिनिधित्व करता है, हरी चित्तीदार बिंदीदार रेखा ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (Global Positioning System) (जीपीएस) उपग्रहों प्रतिनिधित्व करती है और लाल बिंदीदार रेखा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की कक्षा का प्रतिनिधित्व करती है।

पहले उपग्रह, स्पुतनिक 1 (Sputnik 1), को पृथ्वी चारों ओर की कक्षा में रखा गया था और इसलिए गर्भायोजित कक्षा (geocentric orbit) में था। अब तक ये सबसे सामान्य किस्म की कक्षा है लगभग 2456 कृत्रिम उपग्रहों की पृथ्वी के साथ परिक्रमा.गर्भायोजित कक्षाओं को आगे उनके ऊँचाई, झुकाव (inclination) और उत्केन्द्रता (eccentricity) द्वारा वर्गीकृत किया जा सकता है।

ऊँचाई वर्गीकरण के लिए सामान्यतः जिसका प्रयोग किया जाता है जो हैं पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) (LEO), पृथ्वी की मध्यम कक्षा (Medium Earth Orbit) (MEO) और पृथ्वी की उच्च कक्षा (High Earth Orbit) (HEO).पृथ्वी की निचली कक्षा 2000 किमी से नीचे की कक्षा है और पृथ्वी की मध्यम कक्षा किसी भी कक्षा की तुलना में अधिक है लेकिन इस ऊंचाई अभी भी नीचे है कि गर्भायोजित कक्षा (geosynchronous orbit) से कम है, 35786 किमी की दूरी पर.उच्च पृथ्वी कक्षा ऐसी कक्षा है जिसकी ऊंचाई गर्भ सम कक्षा से भी अधिक है।

केंद्रीय वर्गीकरण[संपादित करें]

ऊँचाई का वर्गीकरण[संपादित करें]

पृथ्वी के कई महत्वपूर्ण उपग्रहों की कक्षीय लम्बाई.

झुकाव के वर्गीकरण[संपादित करें]

विकेंद्रों के वर्गीकरण[संपादित करें]

समकीय वर्गीकरण[संपादित करें]

विशेष वर्गीकरण[संपादित करें]

कृत्रिम-कक्षीय वर्गीकरण[संपादित करें]

उपग्रह मॉड्यूल्स[संपादित करें]

इस उपग्रह के कार्यात्मक बहुमुखी अपनी तकनीकी घटकों के भीतर और उसके आपरेशन विशेषताओं में स्थापित है। एक विशिष्ट उपग्रह के "रचना" पर देखने से, दो मॉड्यूल पता लगते हैं।[8] नोट किया जाए कि कुछ उपन्यास वास्तुशिल्प अवधारणाओं जैसे खंडित अंतरिक्ष यान (Fractionated Spacecraft) इस वर्गीकरण को कुछ छेड़ देते हैं।

अंतरिक्ष यान बस या सेवा मॉड्यूल[संपादित करें]

इस पहले मॉड्यूल में पाँच उपप्रणालियाँ हैं:

  • संरचनात्मक उपप्रणालियाँ

संरचनात्मक उपतंत्र, अत्यधिक तापमान परिवर्तन और सूक्ष्म उल्का नुकसान से यांत्रिक आधार संरचना, ढालें उपग्रह प्रदान करता है और उपग्रह के स्पिन कार्यों को नियंत्रित करता है।

  • दी टेलीमेटरी उपप्रणालियाँ

टेलीमेटरी उपतंत्र ऑन-बोर्ड उपकरण के आपरेशन पर नज़र रखता है तथा पृथ्वी स्टेशन पर नियंत्रण करने के लिए, उपकरण आपरेशन डेटा स्थानांतरित करता है और पृथ्वी पर नियंत्रण स्टेशन को आदेश देता है उपकरण आपरेशन समायोजन करने के लिए.

  • दी पॉवर उपप्रणालियाँ

शक्ति उपतंत्र, सौर पैनलों की और बैटरी बैकअप जो की उपग्रह के धरती की छाया से निकलने पर ऊर्जा पैदा करता है, से बना होता है।

  • थर्मल नियंत्रण उपप्रणालियाँ

थर्मल नियंत्रण उपतंत्र, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन सूर्य के प्रकाश से उत्त्पन्न चरम तापमान या उपग्रह के विभिन्न पक्षों पर सूर्य के अभाव के कारण से सुरक्षा में मदद करता है

  • लम्बाई और कक्षा नियंत्रित नियंत्रण उपप्रणालियाँ

इस रवैये और कक्षा को नियंत्रित करने के उपतंत्र छोटे रॉकेट थ्रुस्तेर्स से बने होते हैं, जो उपग्रह को सही कक्षीय स्थिति में रखने और सही दिशा में एंटेना पोजीशनिंग रखते है।

संचार पेलोड[संपादित करें]

दूसरा प्रमुख मॉड्यूल संचार पेलोड है, जो ट्रांसपोंडर से बना हुआ है। एक ट्रांसपोंडर सक्षम है:

  • पृथ्वी उपग्रह प्रसारण स्टेशनों (एंटेना) से उपलिंकेड रेडियो संकेतों को प्राप्त करना.
  • प्राप्त रेडियो संकेतों का वृस्त्रण
  • इनपुट संकेतों को ढूँढने और ओउतपुट संकेतों को निर्देशित करने को बहुंगीय इनपुट/ओउतपुट सिग्नल्स से पृथ्वी उपग्रह स्टेशनों (एंटेना) को फ़िर से उचित डाउनलिंक एंटिना को फॉर से भेजते हैं।

प्रक्षेपण-सक्षम देश[संपादित करें]

पहले ब्रिटिश सैन्य उपग्रह स्काईनेट (Skynet) का प्रक्षेपण.

इस सूची में स्वतंत्र क्षमता के देश जो कक्षा में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने, आवश्यक प्रक्षेपण वाहन के उत्पादन सहित, शामिल हैं। नोट: बहुत से देशों उपग्रहों को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता है - जिन्हें अपेक्षाकृत, ज्यादा वैज्ञानिक, आर्थिक और औद्योगिक क्षमता की आवश्यकता नहीं है - लेकिन उन्हें लांच करने में असमर्थ हैं और विदेशी लांच सेवाओं पर निर्भर हैं। इस सूची में वो देश नही हैं, लकिन उनको शामिल किया है जो उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम हैं और जिस तारीख में ये क्षमता पहली बार प्रर्दशित की गई थी। संघीय उपग्रहों या बहु राष्ट्रीय उपग्रहों को शामिल नहीं किया गया है।

देश का सबसे पहला प्रक्षेपण
देश पहले प्रक्षेपण का साल पहला उपग्रह
Flag of the Soviet Union.svg सोवियत संघ 1957 स्पुतनिक 1 (Sputnik 1)
Flag of the United States.svg संयुक्त राज्य 1958 एक्स्प्लोरर 1 (Explorer 1)
Flag of France.svg फ़्रान्स 1965 एसस्टेरिक्स (Astérix)
Flag of Japan.svg जापान 1970 ओसुमी (Osumi)
Flag of the People's Republic of China.svg चीनी जनवादी गणराज्य 1970 डॉन्ग फेंग हांग I (Dong Fang Hong I)
Flag of the United Kingdom.svg यूनाइटेड किंगडम 1971 प्रोस्पेरो X-3 (Prospero X-3)
Flag of India.svg भारत 1980 रोहिणी (Rohini)
Flag of Israel.svg इज़राइल 1988 ओफेक 1 (Ofeq 1)

दोनों उत्तरी कोरिया (1998) और ईराक (1989) ने कक्षा के प्रक्षेपण का दावा किया है (उपग्रह और वारहेड तदनुसार), लेकिन ये दावों अपुष्ट रहे हैं।

उपरोक्त, देशों के अतिरिक्त अन्य देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, इटली, पश्चिमी जर्मनी (West Germany), कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ईजिप्ट और निजी कम्पनियां जैसे ओत्राग (OTRAG), ने अपने प्रक्षेपणों का विकास किया है, पर सफलतापूर्वक प्रक्षेपण नही कर पाए हैं।

2008 तक, उपरोक्त सूची में से सिर्फ़ सात देश (रुस और यूएसएसआर (USSR) की जगह उक्रेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, चाइना, इंडिया और इस्राइल भी) और एक क्षेत्रीय संगठन (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency), ईएसए) ने स्वतंत्र रूप से अपने ही देश में विकसित प्रक्षेपण वाहनों पर उपग्रहों को लॉन्च किया है। (यूनाइटेड किंगडम और फ़्रांस की लांच क्षमताएं अब ESA (ESA) में आती हैं।)

दक्षिण कोरिया, ईरान, ब्राज़ील, पाकिस्तान, रोमानिया, कज़ाकस्तान, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया[तथ्य वांछित] और तुर्की सहित कई अन्य देश, अपने छोटे पैमाने पर लांचर क्षमताओं के विकास के विभिन्न चरणों में हैं और अंतरिक्ष शक्तियों के क्लब में सदस्यता चाहते हैं।

यह निर्धारित है कि 2008 की शुरू में दक्षिण कोरिया (South Korea) एक शुभारंभ करेंगे KSLV (KSLV) रॉकेट (रूस की सहायता से बनाया गया) और अगली अंतरिक्ष शक्ति बन जाएगा.ईरान ने पहले से ही सफलतापूर्वक अपने स्वयं के अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहन का परीक्षण किया है (Kavoshgar 1 (Kavoshgar 1)) और अपने पहले घरेलू उपग्रह को भेजने के लिए निर्धारित है (ओमिद 1 (Omid 1)) कक्षा में 4 फरवरी2008से एक साल के भीतर.ऐसी उम्मीद है कि ब्राजील और पाकिस्तान निकट भविष्य में ऐसा करेंगे[तथ्य वांछित]

अन्य दलों की मदद से देश के सबसे पहले प्रक्षेपण[12]
देश पहले प्रक्षेपण का साल पहला उपग्रह 2008 में कक्षा में पेलोड[13]
Flag of the Soviet Union.svg सोवियत संघ 1957 स्पुतनिक 1 (Sputnik 1) 1398
Flag of the United States.svg संयुक्त राज्य 1958 एक्स्प्लोरर 1 (Explorer 1) 1042
Flag of Canada.svg कनाडा 1962 अलौएट्टे 1 (Alouette 1) 25
Flag of Italy.svg इटली 1964 सैन मार्को 1 (San Marco 1) 14
Flag of France.svg फ़्रान्स 1965 अस्टेरिक्स (Astérix) 44
Flag of Australia.svg ऑस्ट्रेलिया 1967 डबल्यूआरइएसऐटी (WRESAT) ११
Flag of Germany.svg जर्मनी 1969 अज़ुर (Azur) 27
Flag of Japan.svg जापान 1970 ओसुमी (Osumi) 111
Flag of the People's Republic of China.svg चीनी जनवादी गणराज्य 1970 डॉन्ग फेंग हांग I (Dong Fang Hong I) 64
Flag of the United Kingdom.svg यूनाइटेड किंगडम 1971 प्रोस्पेरो X-3 (Prospero X-3) 25
Flag of Poland.svg पोलैंड 1973 इन्तेर्कोस्मोस कोपेर्निकुस 500 (Intercosmos Kopernikus 500) ?
Flag of the Netherlands.svg नीदरलैंड 1974 ऐएनएस (ANS) 5
Flag of Spain.svg स्पेन 1974 इंटासेट (Intasat) 9
Flag of India.svg भारत 1975 आर्यभट्ट (Aryabhata) 34
Flag of Indonesia.svg इंडोनेशिया 1976 पाल्पा ऐ (Palapa A1) 10
साँचा:देश आँकड़े Czechoslovakia 1978 मगिओं 1 (Magion 1) 5
Flag of Bulgaria.svg बुल्गारिया 1981 इंटरकॉस्मोस22 (Intercosmos 22)
Flag of Brazil.svg ब्राज़ील 1985 ब्रसिल्सत ऐ1 (Brasilsat A1) 11
Flag of Mexico.svg मेक्सिको 1985 मोरेलोस 1 (Morelos 1) 7
Flag of Sweden.svg स्वीडन 1986 विकिंग (Viking) 11
Flag of Israel.svg इज़राइल 1988 ओफेक 1 (Ofeq 1) 7
Flag of Luxembourg.svg लक्ज़मबर्ग 1988 एस्ट्रा 1 ए (Astra 1A) 15
Flag of Argentina.svg अर्जेण्टीना 1990 लुसत (Lusat) 10
Flag of Pakistan.svg पाकिस्तान 1990 बद्र-1 (Badr-1) 5
Flag of South Korea.svg दक्षिण कोरिया 1992 कित्सत ए (Kitsat A) 10
Flag of Portugal.svg पुर्तगाल 1993 पो एसएटी-1 (PoSAT-1) 1
Flag of Thailand.svg थाईलैण्ड 1993 थाईकॉम 1 (Thaicom 1) 6
Flag of Turkey.svg तुर्की 1994 तुर्क्सत 1बि (Turksat 1B) 5
Flag of Chile.svg चिली 1995 फसत-अल्फा (FASat-Alfa) 1
Flag of Malaysia.svg मलेशिया 1996 एम्इएएसएटी (MEASAT) 4
Flag of Norway.svg नॉर्वे 1997 थोर 2 (Thor 2) 3
Flag of the Philippines.svg फ़िलीपीन्स 1997 मबुहय 1 (Mabuhay 1) 2
Flag of Egypt.svg मिस्र 1998 निलेसत 101 (Nilesat 101) 3
Flag of Denmark.svg डेनमार्क 1999 ओर्स्टेड (Ørsted) 3
Flag of South Africa.svg दक्षिण अफ़्रीका 1999 एसयूएनएसएटी (SUNSAT) 1
Flag of Saudi Arabia.svg सउदी अरब 2000 सौदिसत 1 ए (Saudisat 1A) 12
Flag of the United Arab Emirates.svg संयुक्त अरब अमीरात 2000 ठुराया 1 (Thuraya 1) 3
Flag of Algeria.svg अल्जीरिया 2002 अल्सत 1 (Alsat 1) 1
Flag of Greece.svg यूनान 2003 हेल्लास सैट 2 (Hellas Sat 2) 2
Flag of Nigeria.svg नाईजीरिया 2003 नाईजीरियासैट 1 (Nigeriasat 1) 2
Flag of Iran.svg ईरान 2005 सीना-1 (Sina-1) 1
Flag of Kazakhstan.svg कज़ाख़िस्तान 2006 काजसैट 1 (KazSat 1) 1
Flag of Colombia.svg कोलोंबिया 2007 लिबेर्ताद 1 (Libertad 1) 1
Flag of Vietnam.svg वियतनाम 2008 विनासैट-1 (VINASAT-1) 1

जबकि कनाडा तीसरा देश है जिसने अन्तरिक्ष में स्तापित उपग्रह बनाया था,[14] यह विदेश में एक अमेरिकी अन्तरिक्षतट से एक अमेरिकी रॉकेट शुरू की गई थी। येही जाता है ऑस्ट्रेलिया के लिए, जिन्होंने ऑन-बोर्ड एक डोनातेद रेड्स्तोने रॉकेट शुरू किया। पहला इटालियन-प्रक्षेपण सन मार्को 1 (San Marco 1) था, जो 15 दिसम्बर, 1964 को वाल्लोप्स द्वीप (विऐ, यूएसऐ) में से एक अमेरिकी स्कॉउट रॉकेट (Scout rocket) पर नासा द्वारा प्रशिक्षित एक इतालवी प्रक्षेपण टीम के साथ शुरू किया गया था।[15] नवम्बर 1967 में, ऑस्ट्रेलिया की लांच परियोजना, में अमेरिका की एक दानित मिसाइल और अमेरिकी स्टाफ के समर्थन तथा उनाय्तेद किंगडम सुविधा को भी शामिल किया गया था।[16] कज़ाकस्तान ने दावा किया कि उसने अपने उपग्रह स्वतंत्र रूप से[तथ्य वांछित] बनाये है, लेकिन पहले जैसे पोलिश और बल्गेरियाई की तरह उपग्रह रूसी मदद के साथ बनाया गया था।

उपग्रहों पर हमले[संपादित करें]

हाल ही में आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रचार के प्रसारण करने के लिए और सैन्य संचार नेटवर्क से वर्गीकृत जानकारी चुराने के लिए उपग्रहों को तोड़ लिया गया है।[17][18]

पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों को बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र से पृथ्वी पर से नष्ट कर दिया गया है। दोनों रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका ने उपग्रहों को समाप्त करने के लिए क्षमता का प्रदर्शन किया है।[19] 2007 में चीनी सेना ने एक मौसम उपग्रह दागा,[19] इस के बाद अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने मृत जासूसी उपग्रह (defunct spy satellite)फरवरी 2008 (February 2008) में दागा.[20] शीत युद्ध के दौरान रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी उपग्रहों को दागा है।

जाममिंग[संपादित करें]

उपग्रह प्रसारण के कम प्राप्त सिग्नल की शक्ति के कारण भूमि पर आधारित ट्रांसमीटरों से रेडियो जाममिंग (Radio jamming) रहती है। इस तरह की जाममिंग ट्रांसमीटर की सीमा के भीतर भौगोलिक क्षेत्र के लिए सीमित है। जीपीएस उपग्रह जाममिंग के लिए संभावित लक्ष्य हैं,[21][22] लेकिन उपग्रह फोन और टेलीविजन के संकेतों को भी जाममिंग के लिए नियोजित कर दिया गया है।[23][24]

उपग्रह सेवाएँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "The Brick Moon and Other Stories by Edward Everett Hale". Project Gutenberg. अभिगमन तिथि 2008-03-06.
  2. "Contents - The Atlantic monthly. Volume 24, Issue 141". cornell.edu. अभिगमन तिथि 2008-03-06.
  3. "The_1945_Proposal_by_Arthur_C._Clarke_for_Geostationary_Satellite_Communications". lakdiva.org. http://lakdiva.org/clarke/1945ww/. अभिगमन तिथि: 2008-03-06. 
  4. "A Brief History of Animals in Space". NASA. अभिगमन तिथि 2007-08-08.
  5. "Preliminary Design of an Experimental World-Circling Spaceship". RAND. http://www.rand.org/pubs/special_memoranda/SM11827/index.html. अभिगमन तिथि: 2008-03-06. 
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