कुस्तुन्तुनिया विजय

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महमद द्वितीय का कुस्तुन्तुनिया में प्रवेश (Fausto Zonaro द्वारा चित्रित)

२९ मई १४५३ को उस्मानी साम्राज्य की आक्रमणकारी सेनाओं द्वारा बाइजेण्टाइन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया पर अधिकार कर लेने की घटना कुस्तुन्तुनिया विजय (अंग्रेजी: Fall of Constantinople, ग्रीक : Άλωση της Κωνσταντινούπολης, Alōsē tēs Kōnstantinoupolēs; तुर्की: İstanbul'un Fethi ) कहलाती है। यह एक अति महत्वपूर्ण घटना थी। उस्मानी सेना का सेनापति २१ वर्षीय सुल्तान मेहमद द्वितीय था। यह विजय ७ सप्ताह की घेराबन्दी के बाद मिली थी।

इस घटना के फलस्वरूप रोमन साम्राज्य का अन्त हो गया जो लगभग १५०० वर्षों से चला आ रहा था। इस घटना से ईसाईवाद को भी धक्का पहुँचा और उस्मानी सेनाओं के यूरोप में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया था। इस विजय के बाद उस्मानी साम्राज्य की राजधानी एदिर्न (Edirne) से हटाकर कुस्तुन्तुनिया ला दी गयी। विजय के पहले और बाद में अनेकों यूनानी एवं अन्य बुद्धिजीवी कुस्तुन्तुनिया छोड़कर भाग निकले। इनमें से अधिकांश इटली जा पहुँचे जिससे यूरोपीय पुनर्जागरण को बहुत बल मिला।

यह घटना मध्यकालीन इतिहास की एक अत्यन्त महत्वपूर्ण घटना थी। कुछ इतिहासकार इसे मध्यकाल की समाप्ति की घटना मानते हैं।