कुश्तिया
कुश्तिया | |
|---|---|
| महानगर | |
| उपनाम: सांस्कृतिक राजधानी | |
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| देश | |
| विभाग | खुलना |
| जिला | कुश्तिया |
| उपजिला | कुश्तिया सदर |
| शासन | |
| • प्रणाली | नगर पालिका |
| • सभा | कुश्तिया नगर पालिका |
| क्षेत्रफल[1] | |
| • नगरीय | 54.13 kमी2 (20.90 वर्ग मील) |
| जनसंख्या (2022) | |
| • पद | 13वाँ |
| • महानगर[2] | 418,312 |
| डाक कोड | 7000 |
कुश्तिया (ⓘ) बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित खुलना विभाग के कुश्तिया जिला के सदर उपजिला का एक शहर है। कुश्तिया नगर पालिका का क्षेत्रफल 54.13 वर्ग किलोमीटर (20.90 वर्ग मील)[1] है, जिससे यह बांग्लादेश का १३वाँ सबसे बड़ा शहर बन गया है।
इतिहास
[संपादित करें]मुगल शासनकाल में पद्मा, गढ़ाई और कालिगंगा नदी की वजह से कुस़्तिया एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में विख्यात हुआ। सम्राट शाहजहाँ के समय में कुस़्तिया में नदी बंदरगाह और नौसैनिक अड्डा स्थापित किया गया था।
1725 में कुस़्तिया नाटोर ज़मींदारी के अधीन था। 1776 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कुस़्तिया को जेशोर ज़िले में शामिल किया। 1823 में कुस़्तिया थाना की स्थापना हुई। 1828 में कुस़्तिया को पाबना ज़िला के अधीन किया गया।[3] कुस़्तिया थाना पहले हरिपुर में पद्मा नदी के किनारे स्थित था। 1855 में कुस़্তिया थाना का कार्यालय मजमपुर मौज़े में स्थित वर्तमान थानापाड़ा में स्थानांतरित किया गया। हरिपुर गाँव आज भी "पुरातन कुस़्तिया" के नाम से जाना जाता है। 1859 में कुस़्तिया थाना नदिया ज़िले के अधीन कर दिया गया। 1859–1861 में नील विद्रोह के चलते 1863 में कुस़्तिया को एक उप-मंडल (महकुमा) में उन्नत किया गया। 1 अप्रैल 1869 को मजमपुर, कालिशंकरपुर और बहादुरखाली मौज़ा मिलाकर कुस़्तिया नगर पालिका की स्थापना की गई। 1871–1872 में कुमारखाली और खोकसा थाना को कुस़्तिया उप-मंडल के साथ जोड़ा गया।[a]
पूर्वी पाकिस्तान (1947–1971)
[संपादित करें]1947 में भारत विभाजन के बाद अविभाजित नदिया ज़िला दो भागों में विभाजित हुआ। इसमें कुस़्तिया, चुआड़ांगा और मेहरपुर उप-मंडल मिलाकर पूर्वी पाकिस्तान में 'पूर्व नदिया' नाम से एक ज़िले के निर्माण का प्रस्ताव हुआ। लेकिन 1948 में इस ज़िले का नाम 'कुस़্তिया' रखा गया। उस समय कुस़्तिया उप-मंडल नगर में ज़िला स्तर की कोई आधारभूत संरचना नहीं थी। इस समय नगर की जनसंख्या में व्यापक बदलाव आया।[5]
स्वतंत्रता के बाद का समय
[संपादित करें]1984 में बृहत कुस़्तिया को विभाजित कर चुआड़ांगा और मेहरपुर उप-मंडलों को ज़िले का दर्जा दिया गया।[6]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 "বাংলাদেশ জিও কোড কুষ্টিয়া জেলা" (PDF). বাংলাদেশ জিও কোড. p. ৭৪/৯৬. मूल से (PDF) से 2022-07-05 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2024-08-04.
- ↑ "जनसंख्या और आवास जनगणना-2011" [जनगणना और गृह गणना-2011] (PDF). राष्ट्रीय रिपोर्ट (अंग्रेज़ी भाषा में). ढाका: बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो. मार्च 2014. मूल से (PDF) से 11 अप्रैल 2019 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 21 फरवरी 2017.
- ↑ तौहीदी हसन (2022-02-14). "संस्कृति की तीर्थस्थली में ठहर गई सांस्कृतिक गतिविधियाँ". प्रথম আলো. मूल से से 2022-02-14 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-07-16.
- ↑ "स्मृतियों से भरा ऐतिहासिक कुमारखाली". प्रথম আলো. 2019-12-01. 2021-12-09 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2025-07-16.
- ↑ गौहर नईम वारा (2025-04-29). "'द बैटल ऑफ कुस़्तिया' का सामाजिक इतिहास". প্রথম আলো. मूल से से 2025-04-02 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-07-16.
- ↑ "जिले की पृष्ठभूमि". बांग्लादेश राष्ट्रीय सूचना বাতায়ন – कुस़্তिया ज़िला. 2025-05-17 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2025-06-21.
- ↑ कुस़्तिया नगर पालिका द्वारा प्रकाशित डेढ़शताब्दी स्मारक ग्रंथ (1869–2019) में 1871 तथा ‘प्रথম আলো’ की रिपोर्ट में 1872 का उल्लेख है।[4]
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