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कुलपतियों की गुफा

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कुलपतियों की गुफा
מְעָרַת הַמַּכְפֵּלָה
المسجد الإبراهيمي
परिसर का दक्षिणी दृश्य, 2009
Map showing the location of the Cave of the Patriarchs within the West Bank and the State of Palestine
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कुलपतियों की गुफा
पश्चिमी तट में अवस्थिति
Map showing the location of the Cave of the Patriarchs within the West Bank and the State of Palestine
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कुलपतियों की गुफा
कुलपतियों की गुफा (फ़िलिस्तीन)
अन्य नामकुलपतियों का मक़बरा, मकपेला की गुफा, इब्राहीम का मक़बरा, इब्राहीमी मस्जिद
अवस्थितिहेब्रोन
क्षेत्रपश्चिमी तट
निर्देशांक31°31′29″N 35°06′39″E / 31.5247°N 35.1107°E / 31.5247; 35.1107
प्रकारमक़बरा, मस्जिद, आराधनालय[1]
इतिहास
संस्कृति(याँ)इब्रानी, बाइज़ेंटाइन, अय्यूबी, क्रूसयोद्धा, उस्मानी

कुलपतियों की गुफा या कुलपतियों का मक़बरा पश्चिमी तट के पुराने हेब्रोन शहर में स्थित गुफाओं की शृंखला है, जिसे यहूदी मकपेला की गुफा (बाइबिली इब्रानी: מְעָרַת הַמַּכְפֵּלָה, शब्दानु.'दोहरे की गुफा') और मुसलमान इब्राहीमी मस्जिद (अरबी: المسجد الإبراهيمي), या इब्राहीम का मक़बरा (अरबी: الحرم الإبراهيمي) के नाम से जानते हैं।[2][3][4] इसे यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, और इस्लाम में पवित्र स्थल माना जाता है।[5][6][7]

इब्राहीमी धर्मों के अनुसार, इब्राहीम ने इस गुफा को समाधि के तौर से ख़रीदा था। दीवार के ऊपर हेरोड के काल से एक चौकोर घेरा है।[8] बाइज़ेंटाइन शासन के समय, यहाँ एक ईसाई बसिलिका का निर्माण किया गया था; सीरिया पर मुस्लिम विजय के बाद उसे इब्राहीमी मस्जिद में बनाया गया। 12वीं शताब्दी तक, मस्जिद और उसके आसपास के क्षेत्र क्रूसयोद्धाओं के तहत थे, किन्तु 1188 को अय्यूबी सुल्तान सलाउद्दीन ने उन्हें फिर से पाकर संरचना को वापस मस्जिद में बदला।[9] 1119 में, एक मठवासी को गुफा के अंदर हड्डियाँ मिलीं, यह मानते हुए कि वह कुलपतियों कि हड्डियाँ थीं।[10]

1967 में छह दिनों के युद्ध के दौरान, इसराइल ने पश्चिमी तट पर क़ब्ज़ा किया, जिसके बाद मस्जिद के आधे भाग को आराधनालय बनाया गया था।[11][12] 1968 को, रोश हशाना और योम किपुर के समय विशेष यहूदी सेवाएँ अधिकृत की गई थीं।

अमोराई व्युत्पत्ति

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मकपेला नाम का मूल अज्ञात है। इसका अर्थ "दोहरा", "गुणित" या "दोगुना" हो सकता है, जिस प्रकार गुफा का नाम "दोहरे की गुफा" है। तलमूद के अध्याय एरुविन 53a में दो सिद्धांत माने जाते हैं:

मकपेला की गुफा:

अब्बा अरिख़ा और शमूएल [बहस किए]; एक ने कहा, "दो कक्ष हैं, एक दूसरे के पीछे", और दूसरे ने कहा, "दो कक्ष हैं, एक दूसरे के ऊपर।"[a]

यह बात कि कक्ष ढेर हैं काफ़ी है—यह मकपेला है। हालाँकि, यदि एक दूसरे के पीछे है, तो फिर मकपेला क्या है? कि वह जोड़ों में मौजूद है:

"और याक़ूब मम्रे में, जो किर्यतर्बा, अर्थात हब्रोन है, अपने पिता इसहाक़ के पास आया ..." (उत्पत्ति 35:27)। इसाक लोहार ने कहा, "चार जोड़ों का शहर: आदम और हव्वा, इब्राहीम और सारा, इसहाक़ और रिबका, एवं याक़ूब और लिआ"।

बावा बत्रा 58a के अनुसार, अब्बा अरिख़ा और नेहार्डिया के शमूएल ने माने कि दोनों कक्ष समरूप हैं। उत्पत्ति रब्बा 58 एक तीसरा सिद्धांत पेश करता है:

"सो एप्रोन की भूमि, जो माम्रे के सम्मुख की मकपेला में थी ..." (उत्पत्ति 23:17)। यह सिखाता है कि यह [अंदर] गाड़े गए व्यक्ति की ख्याति को दोगुना करता है, क्योंकि जो भी अंदर है उसे [स्वर्ग में] बहुत बड़ा इनाम मिले गा।

बाद की नामव्युत्पत्तियाँ

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सादिया गाओन और अब्राहम इब्न एज़्रा मानते थे कि नाम का अर्थ "गुफा के अंदर गुफा" है।[13] शमूएल बेन मेइर,[14] मोशे बेन नाख़मान,[15] ओबद्याह स्फ़ोर्नो,[16] मोसेस मेंडेलज़ोन, एर्न्स्ट रोसेनमुलर, और सामुएल दाविद लुत्सात्तो के अनुसार,[13] मकपेला एक व्याकरण नहीं बल्कि भूमि का नाम है।[17] यह सिद्धांत उत्पत्ति 49:30 ("अर्थात उसी गुफा में जो कनान देश में मम्रे के साम्हने वाली मकपेला की भूमि में है . . .") जैसे कुछ श्लोक की व्याख्याओं से समर्थित है। मकपेला की सही व्याख्या पर चर्चा हुई है।[18]

स्ट्रांग की अनुक्रमणिका मकपेला को कपल (बाइबिली इब्रानी: כָּפַל, शब्दानु.'दोगुना करना') क्रिया से व्युत्पन्न करता है।[19][20]

बाइबिल में

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गुफा में सारा का दफ़न, गुस्ताव दोरे द्वारा काष्ठकला
मस्जिद में सारा का क़ब्र

उत्पत्ति 23:1–20 के अनुसार, इब्राहीम की पत्नी सारा की मृत्यु 127 वर्ष की आयु में कनान के किर्यतर्बा में हुई, जिस प्रकार वह बाइबिल में एकल स्त्री है जिसकी आयु दी गई है। इब्राहीम उसके लिए रोने पीटने जाता है। बाद में वह हत्तियों से बात करता है। वह उन्हें कहता है कि वह उनके बीच विदेशी है और उनसे एक क़ब्रिस्तान माँगता है जहाँ वह अपने मुर्दे को गाड़ सके। हत्तियों इब्राहीम की ख़ुशामद करते हैं, उन्हें अपना प्रभु कहकर बोलते हैं कि वह अपने मुर्दे को उनके किसी भी क़ब्रों में गाड़ सकता है। इब्राहीम उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करके उनके राजा, एप्रोन, के पास जाकर उनसे "पूरे दाम" के लिए मकपेला की गुफा माँगता है। यह सुनकर एप्रोन कहता है कि वह मुफ़्त में भूमि और गुफा दे सकता है, यह जानते हुए कि इब्राहीम उन्हें हमेशा के लिए नहीं रख पाएगा।[21] इब्राहीम इसे इनकार करके भूमि को ख़रीदने का प्रस्ताव देता है। एप्रोन कहता है कि भूमि का दाम 400 रजत शेकेल है और इब्राहीम बिना सौदा करके दाम मान लेता है।[21] वह फिर अपनी पत्नी सारा को वहाँ गाड़ता है।[22]

सारा का दफ़न बाइबिल का पहला उल्लिखित दफ़न है।[23]

इब्राहीम 175 वर्ष तक जीया, जिसके बाद उसके बेटे इसहाक़ और इस्माइल ने उसे गुफा में गाड़ा।[24] इसहाक़ को वह गुफा विरासत में मिली।[25][26] उसकी मृत्यु के बाद, उसके बेटे एसाव और याकूब ने भी उसे गुफा में गाड़ा।[27] इसराइलियों को अपने आख़िरी संदेश में, याक़ूब ने कहा कि इसहाक़ की पत्नी रिबका को भी मकपेला में गाड़ा गया है। याक़ूब ख़ुद 147 वर्ष की आयु में मर जाता है।[28]

उत्पत्ति पुस्तक के अंतिम अध्याय में, यूसुफ़ उसके वैद्यों से अपने पिता याक़ूब की लोथ में सुगंधद्रव्य भरवाता है, जिसके बाद उसे मिस्र से लेकर मकपेला की गुफा में गाड़ा जाता है।[29] जब यूसुफ़ का निधन हुआ, उसकी लोथ में सुगंधद्रव्य भरे गए। जब इसराइली प्रतिज्ञात भूमि पहुँचे, उसकी हड्डियाँ शकेम में गाड़ी गई थी।[30]

अन्य ग्रंथों में

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उगारिती ग्रंथों (13वीं–12वीं शताब्दी ई.पू.) में खोजे गए छह संपत्ति अनुबंधों में से तीन 400 रजत शेकेल के थे, जो बाइबिल में मकपेला का भी दाम था। इससे पता चलता है कि 400 शेकेल कनानी संपत्ति का आम दाम होता था।[31]

सन्दर्भ

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  1. उद्धरण त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; Berney नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  2. Sammān, Muḥammad ʻAbd Allāh; الله, سمان، محمد عبد (1994). مذبحة الحرم الإبراهيمي: القضية المنسية وسط التخاذل العربي والاستجابة لأنغام السلام المزيف (अरबी भाषा में). دار الاعتصام،.
  3. الدعوة :مجلة إسلامية اسبوعية جامعة (अरबी भाषा में). مؤسسة الدعوة الإسلامية الصحفية،. 1999.
  4. والتوزيع, مؤسسة أعمال الموسوعة للنشر (1999). الموسوعة العربية العالمية - المجلد العاشر - خ - د - ذ (अरबी भाषा में). العبيكان للنشر. ISBN 978-9960-803-42-5.
  5. Har-El, Shai (2014). "The Gate of Legacy". Where Islam and Judaism Join Together. pp. 69–86. डीओआई:10.1057/9781137388124_6. ISBN 978-1-349-48283-2. Hebron is regarded by the Jews as second in sanctity to Jerusalem, and by the Muslims as the fourth-holiest city after Mecca.
  6. Alshweiky, Rabab; Gül Ünal, Zeynep (2016). "An approach to risk management and preservation of cultural heritage in multi identity and multi managed sites: Al-Haram Al-Ibrahimi/Abraham's Tombs of the Patriarchs in Al-Khalil/Hebron". Journal of Cultural Heritage. 20: 709–14. डीओआई:10.1016/j.culher.2016.02.014. According to the Islamic belief, Al-Haram Al-Ibrahimi/Tombs of the Patriarchs is considered to be the fourth most important religious site in Islam after Mecca, Medina and Jerusalem and the second holiest place after the Aqsa Mosque in Palestine. Additionally, according to the Jewish belief, it is the world's most ancient Jewish site and the second holiest place for the Jews, after Temple Mount in Jerusalem.
  7. Sellic, Patricia (1994). "The Old City of Hebron: Can It be Saved?". Journal of Palestine Studies. 23 (4): 69–82. डीओआई:10.2307/2538213. जेस्टोर 2538213. This deterioration has long-term implications for the Palestinians, since the old city of Hebron forms an important part of the Palestinian and indeed the Muslim heritage. It is one of the four holiest cities in Islam, along with Mecca, Medina, and Jerusalem.
  8. Jacobsson, David M. (2000). "Decorative Drafted-margin Masonry in Jerusalem and Hebron and its Relations". The Journal of the Council for British Research in the Levant. 32: 135–54. डीओआई:10.1179/lev.2000.32.1.135. आईएसएसएन 0075-8914. एस2सीआईडी 162263112.
  9. "In Hebron, Israelis and Palestinians share a holy site ... begrudgingly". PRI. 10 November 2015. 29 November 2018 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 29 November 2018.
  10. Nancy Miller (May–June 1985). "Patriarchal Burial Site Explored for First Time in 700 Years". Biblical Archaeology Society. 10 March 2021 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 21 January 2022.
  11. Hammond, Constance A. Shalom/Salaam/Peace: A Liberation Theology of Hope. p. 37.
  12. Esther Rosalind Cohen (1985). Human rights in the Israeli-occupied territories, 1967–1982. Manchester University Press ND. p. 215. ISBN 978-0-7190-1726-1. 3 January 2014 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 14 October 2010.
  13. 1 2 "MikraotGedolot – AlHaTorah.org". mg.alhatorah.org (हिब्रू भाषा में). 27 November 2022 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-06-06.
  14. "Rashbam on Genesis 23:9:1". www.sefaria.org. 7 June 2022 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-06-06.
  15. "Ramban on Genesis 23:9:2". www.sefaria.org. 3 December 2022 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-06-06.
  16. "Sforno on Genesis 23:9:1". www.sefaria.org. 7 June 2022 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-06-06.
  17. Merrill, Selah (1890). "The Cave of Machpelah". The Old and New Testament Student. 11 (6): 327–335. डीओआई:10.1086/470621. जेस्टोर 3157472.
  18. "Genesis 23:9". 4 December 2018 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 4 December 2018.
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  20. "Strong's H3717 - kaphal". Blue Letter Bible. 18 March 2012 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-06-07.
  21. 1 2 "A Burial Plot for Sarah (Genesis 23:1–20)". 1 December 2018 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 3 December 2018.
  22. उत्पत्ति 23:9–20
  23. Easton's Bible Dictionary "Burial"
  24. उत्पत्ति 25:7–8, इब्रानियों 11:9
  25. उत्पत्ति 25:5–6
  26. Easton's Bible Dictionary "Machpelah"
  27. उत्पत्ति 35:28–29
  28. उत्पत्ति 47:28
  29. उत्पत्ति 50:1–14
  30. यहोशू 24:32
  31. Stieglitz, Robert R. “Commodity Prices at Ugarit. Archived 21 अगस्त 2020 at the वेबैक मशीनJournal of the American Oriental Society, vol. 99, no. 1, 1979, pp. 15–23.
  1. In all printings of b. Eruvin, beginning with the 1509 Florence edition, this line reads "one chamber and a mezzanine above it", which reflects the citation of Samuel b. Isaac in his commentary to Gen. 23:9. "Two chambers, one above the other", however, reflects all extant manuscripts and b. Bava Batra 58a.
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