कुम्भाभिषेक
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कुम्भाभिषेक या सम्प्रोक्षण एक हिन्दू अनुष्ठान है जिसे मंदिर के अभिषेक के समय किया जाता है।[1]
नाम
[संपादित करें]'कुम्भाभिषेक' दो शब्दों का मेल है –'कुम्भ' ("बर्तन") और 'अभिषेक' ("ढालना, छिड़कना"), क्योंकि अनुष्ठान में मंदिर के कलश पर कुम्भ से पवित्र जल ढाला जाता है।[1]
'सम्प्रोक्षण' का अर्थ "शुद्धि" है और इसका प्रयोग वैष्णव मंदिरों में किया जाता है।[2][3]
कभी-कभी इसे म'कुम्भाभिषेक' भी कहा जाता है।[4]
एक और शब्द 'अष्टबन्धन', जो 'अष्ट' ("आठ") और 'बन्धन' का मेल है, मूर्ति को चबूतरे पर जोड़ने के लिए प्रयुक्त पेष के आठ सामग्रियों को दर्शाता है। वो आठ सामग्रियाँ हैं जतु, गैरिक, सिक्थ, गुग्गुलु, गुल, तैल, शर्करचूर्ण, सर्ज और नवनीत।[5]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 "Consecration: Kumbhabhishekam". The Pluralism Project. अभिगमन तिथि: 1 June 2025.
- ↑ "Difference between Kumbhabhishekam and Samprokshanam". Dinamalar (तमिल भाषा में). अभिगमन तिथि: 1 June 2025.
- ↑ "Samprokshanam". Wisdom library. अभिगमन तिथि: 1 June 2025.
- ↑ Bodhinatha Veylanswami. Guru's Wisdom. Himalayan Academy Publications. pp. 76–77. ISBN 978-1-934-14573-9.
- ↑ "Ashtabandhana". Wisdom library. अभिगमन तिथि: 1 June 2025.