कुमकुम भाग्य

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कुमकुम भाग्य
कुमकुम भाग्य new.jpg
कुमकुम भाग्य
द्वारा निर्मित एकता कपूर
द्वारा उन्नत एकता कपूर
द्वारा लिखित कहानी
अनिल नागपाल
पटकथा
अनिल नागपाल
विकास तिवारी
संवाद
धीरज सरना
द्वारा निर्देशित मुजम्मिल देसाई
शरद यादव
सृजनात्मक निर्देशक रचनात्मक निर्माता
तनुश्री दासगुप्ता
शालू
विषय संगीत संगीतकार ललित सेन
नवाब आरज़ू
उद्घाटन विषय कुमकुम भाग्य
मूल देश भारत
भाषा (एँ) हिन्दी, पंजाबी
अवधियों की संख्या 01
उत्पादन
निर्माता एकता कपूर
अवस्थिति मुंबई
छायांकन संजय मेमने
अनिल कटके
छायांकन रूपरचना बहू-कैमरा
प्रसारण अवधि 22 मिनट
उत्पादन कंपनी (यां) बालाजी टेलीफ़िल्म्स
प्रसारण
मूल चैनल ज़ी टीवी
चित्र प्रारूप 480i (एसडीटीवी),
1080i (एचडीटीवी)
मूल प्रसारण 15 अप्रैल 2014 – वर्तमान
स्थिति प्रसारित
कालक्रम
संबंधित शो कुंडली भाग्य
बाहरी कड़ियाँ
आधिकारिक जालस्थल
उत्पादक जालस्थल

कुमकुम भाग्य ज़ी टीवी पर आने वाला एक भारतीय हिन्दी धारावाहिक है, जो 15 अप्रैल 2014 से प्रारम्भ हुआ और सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे देता है। इसका निर्माण एकता कपूर ने किया है। इसके निर्देशन का कार्य मुजम्मिल देसाई और शरद यादव ने किया है। यह पवित्र रिश्ता नामक धारावाहिक के स्थान पर प्रसारित हो रहा है। इसमें मुख्य किरदार में शब्बीर अहलूवालिया और सृति झा हैं।[1]

कहानी[संपादित करें]

यह कहानी मूल रूप से कुमकुम भाग्य नामक एक शादी के स्थान पर आधारित है। जहां लोग शादी के लिए जगह किराए पर लेते है। लेकिन इसमें मूल रूप से प्रज्ञा (सृति झा) को दिखाया गया है। जिसकी शादी अभिषेक (शब्बीर अहलूवालिया) से होती है। अभिषेक अपनी बहन आलिया (शिखा सिंघस) के कहने पर ही प्रज्ञा से शादी करता है। अभिषेक को लगता है कि वह तनु से प्यार करता है जबकि वह प्रज्ञा से प्यार करता है। कुछ दिनों के बाद आलिया ने प्रज्ञा की बहन बुलबुल का अपहरण करवाने का निर्णय लेती है। जिससे वह पूरब से शादी न कर पाये और पूरब उसका हो सके। लेकिन अपहरण करने वाला बुलबुल के जगह प्रज्ञा को ले जाता है। प्रज्ञा को बचाने के लिए अभि उसके पीछे लग जाता है। वह दोनों ही अपहरण कर्ता के जाल में फंस जाते हैं। इसके बाद वो लोग प्रज्ञा को मारने वाले होते हैं और प्रज्ञा को बचाने के लिए अभि उसके सामने आ जाता है। अभि को गोली लग जाती है और वो दोनों खाई में गिर जाते हैं। इसके बाद प्रज्ञा अभि को दूर ले जाकर उसका इलाज करती है। उसके बाद प्रज्ञा अपनी दिल की बाद अभि को बताती है। अभि निर्णय नहीं ले पाता है। इसके बाद वह लोग घर में आ जाते हैं और अपहरण कर्ता पकड़ा जाता है।

प्रज्ञा बार बार अपने सवाल का जवाब लेने की कोशिश करती है। लेकिन अभि उसे नहीं बताता। एक रात अभि प्रज्ञा को अपने दिल की बात बताने का सोचता है। लेकिन तनु प्रज्ञा को कहती है कि वह अभि के बच्चे की माँ बनने वाली है। इसके बाद जब प्रज्ञा घर आती है तो अभि उससे अपने दिल की बात कहने की कोशिश करता है, लेकिन उससे पहले प्रज्ञा क्रोध में कह देती है कि वह नाटक कर रही थी उसे अभि से बिलकुल भी प्यार नहीं है। इसके बाद अभि भी क्रोध में आ जाता है और शराब पीने लग जाता है। प्रज्ञा अपने आप को घर से बाहर और तनु को घर के अंदर लाने का प्रयास करती है। इसमें वह और तनु कई प्रकार का रास्ता चुनते हैं। एक में तनु प्रज्ञा को अभि को मिले एक करोड़ रुपये चुराने को कहती है। प्रज्ञा उसे चुरा लेती है और तनु प्रज्ञा को पकड़ा देती है। लेकिन तभी तनु के जाँच का परिणाम आता है। लेकिन उसमें नाम में अभि और प्रज्ञा का रहता है। जिससे सभी को लगता है कि प्रज्ञा माँ बनने वाली है। इस कारण सभी खुश हो जाते है और उसके चोरी कि बात को भूल जाते हैं।

एक दिन अभि के जन्मदिन के समारोह के दौरान दादी बच्चे की बात सभी को बताती हैं, तभी प्रज्ञा आकार कहती है कि उसने बच्चे को गिरवा दिया। इस पर सभी घर वाले प्रज्ञा को कई सारे प्रश्न करते हैं और तनु भी आकार उसे कई बाते बोलती है। जिसके बाद अभि सच्चाई बता देता है कि प्रज्ञा माँ नहीं बनने वाली थी, वह जाँच के परिणाम गलत थे। उसने ही प्रज्ञा को यह झूठ बोलने के लिए कहा था। इसके बाद अगले दिन दादी उसी अस्पताल में इसकी जानकारी के लिए जाते हैं। लेकिन अभि और प्रज्ञा के कारण वह वहाँ असली कागज नहीं देख पाते। लेकिन घर पर आने के बाद उन्हें पता चलता है कि तनु माँ बनने वाली है। सभी को इस बात पर आश्चर्य होता है। इसके बाद तनु के पिता आकर कहते हैं कि इसके बच्चे का बाप अभि है। यह बात जानकर अभि की दादी उसे घर से निकाल देती है और प्रज्ञा को भी कहती है। लेकिन अभि उसे घर पर दादी की देखभाल के लिए रहने को कहता है। प्रज्ञा अभि और तनु की शादी के लिए दादी को मना लेती है।

उसके कुछ दिन बाद प्रज्ञा तनु की बात सुनती है कि उसके पेट में जो बच्चा है वह अभि का नहीं किसी और का है। इस कारण वह सदमे से बेहोश हो जाती है। तनु उसे देख कर अपने कमरे में रख कर चले जाती है। उसे इस बारे में नहीं पता होता की उसने बात सुन लिया है। इसके बाद जब प्रज्ञा को होश आता है वह इस बात को बताने के लिए अभि के कार्यालय में जाती है। जहाँ वह आलिया की बात सुनती है कि उसे तनु का सच पता है और वह इस बात को प्रमाणित कर देगी कि यह अभि का बच्चा है। वह अभि की सारी जायदाद लेकर उसे बर्बाद कर देना चाहती है और उसी ने एक कार्यक्रम के दौरान अभि पर पत्तर से चोटिल किया था।

वह इसी सोच के साथ कि अब क्या करे कैसे अभि को बचाए आदि सोचते समय उसका सड़क एक गाड़ी के कारण दुर्घटना हो जाता है। इसके बाद उसे दो लोग बचाकर अस्पताल ले जाते हैं। अन्य सभी को इस बात का पता चलता है लेकिन अस्पताल का पता नहीं जान पाते। बाद में प्रज्ञा को मरा हुआ घोषित कर देते हैं।

एक माह बाद

एक माह बाद अचानक प्रज्ञा आती है। बाद में यह पता चलता है कि दादी और प्रज्ञा मिल कर यह योजना बनाए रहते हैं। साथ ही अस्पताल से प्रज्ञा को वापस लाने और उसे इस योजना में लाने और मृत घोषित करने के पीछे भी दादी का ही हाथ होता है। आलिया की असलियत सभी को दिखाने में अंत में प्रज्ञा सफल हो जाती है। इसके साथ साथ राज को भी पता चल जाता है कि उसके सारी समस्या की जड़ और कोई नहीं, बल्कि उसकी पत्नी मिताली है। इसके बाद प्रज्ञा को तनु और निखिल के बीच का रिश्ता पता चलता है, और वो इसे सभी के सामने लाने की कोशिश करती है। लेकिन इसी बीच तनु दुर्घटना का शिकार हो जाती है, जिससे गर्भपात हो जाता है। जिसका आरोप प्रज्ञा पर ही लग जाता है। पर अंत में प्रज्ञा सच्चाई सामने ले ही आती है और अभि का विश्वास फिर से पा लेती है। दोनों एक दूसरे से लोनावला में प्यार का इकरार करते हैं। प्यार का इकरार करने के बाद अभि एक कार दुर्घटना का शिकार बन जाता है और अपने पिछले ढाई साल में बिता हर चीज (प्रज्ञा को भी) भूल जाता है। प्रज्ञा उसे छोड़ कर चले जाती है, लेकिन तलाक नहीं लेती है।

दो माह बाद

दो महीने बाद प्रज्ञा अभि के कंपनी से जुड़ती है और दोनों धीरे धीरे अच्छे दोस्त बन जाते हैं। अभि उसे अपना निजी सहायक बना लेता है। अभि के याददाश्त खोने का फायदा उठा कर प्रज्ञा को हमेशा के लिए दूर करने के लिए अभि और तनु की शादी कराने का सोचती है। वहीं प्रज्ञा उन दोनों की शादी से पहले अभि की याददाश्त वापस लाने की कोशिश करती है। अभि को अपने अतीत का थोड़ा थोड़ा हिस्सा याद आने लगता है और दोनों एक दूसरे से फिर प्यार का इजहार करते हैं। पर तनु की माँ कैंसर का झूठ बोल कर अभि को तनु से शादी करने के लिए मजबूर कर देती है। प्रज्ञा आखरी बार अभि से मिलने आती है, पर निखिल उसे बीच में ही अपहरण कर के ले जाता है। जब सरला अभि को बोलती है कि प्रज्ञा का अपहरण हो गया है, तो अभि शादी बीच में छोड़ कर प्रज्ञा को बचाने चले जाता है। जंगल में काफी भाग दौड़ करने के बाद अभि प्रज्ञा को बचा लेता है, दोनों जंगल से बाहर आते हैं तो अभि का कार से टक्कर हो जाता है और उसे सारी पुरानी बातें याद आ जाती है। दोनों फिर प्रज्ञा के पिता से मिलते हैं, उन्हें पता चलता है कि प्रज्ञा की दो बहनें हैं। निखिल के गुंडों से भागते हुए प्रज्ञा को गोली लग जाती है, और वो बांध में गिर जाती है। अभि उसे ढूँढने की बहुत कोशिश करता है, पर उसे असफलता ही हाथ लगती है। अभि थक हारकर जब घर आता है, तो सरला उससे प्रज्ञा के बारे में पूछती है, लेकिन तनु और आलिया उसे बाहर कर देते हैं। अभि उन दोनों को रोक देता है और बताता है कि उसकी याददाश्त वापस आ गई है।

एक माह दो दिन बाद

अभि को प्रज्ञा जैसी दिखने वाली मुन्नी, एक गाँव में रहनी वाली लड़की दिखती है। वो उसे प्रज्ञा सोच कर अपने घर ले जाता है। आलिया मुन्नी को बोलती है कि यदि उसने जो कहा वैसा नहीं करेगी तो उसके बहन के बच्चों को वो मार देगी। प्रज्ञा कोमा से बाहर आते ही मुंबई में अभि से मिलने चले जाती है, जहाँ उसे पता चलता है कि अभि उसके जैसी दिखने वाली किसी लड़की से शादी कर चुका है। मुन्नी प्रज्ञा को आलिया के योजना के बारे में बताती है और इसके बाद प्रज्ञा मुन्नी बन कर वहाँ चले जाती है, जब तक कि मुन्नी को उसके बच्चे न मिल जाएँ। लेकिन तनु जलन के कारण बता देती है कि ये मुन्नी है और अभि उसे घर के बाहर फेक देता है। इसी बीच पूरब दीक्षा से मिलता है, जो उसे गुंडों से बचाती है। उसे संग्राम सिंह से बचाने के लिए पूरब उससे शादी कर लेता है। दीक्षा जब पूरब से अपने प्यार का इजहार करती है तो पूरब अपने आप को दोषी मानने लगता है कि वो अपने पत्नी को उसके हक का प्यार नहीं दे पा रहा है।

सिमोनिका, जो सोचती है कि अभि ने उसके पति दुष्यंत को मार दिया है, वो अभि से अपना बदला लेने के लिए उसकी सहायक बन कर आती है। सिमोनिका अभि को किसी भी तरह मारना या जीवन भर के लिए जेल में भेजना चाहती है। इसके लिए सिमोनिका अपने ही हत्या का आरोप अभि पर लगा देती है, लेकिन अंत में सच्चाई सभी के सामने आ जाती है और सिमोनिका को पुलिस पकड़ कर ले जाती है। लेकिन बीच में ही वो पुलिस से बच कर भाग जाती है। तनु के साथ एक समझोते के अनुसार यदि वो अभि को छोड़ देती है तो प्रज्ञा को मारने में वो मदद करेगी। इस समझौते के तहत सिमोनिका के सुरक्षाकर्मी प्रज्ञा को कारखाने में बुलाते हैं और उसके आने से पहले ही दादी वहाँ आ जाती है और दोनों के बीच लड़ाई में दादी को गोली लग जाती है। अभि इसका दोषी प्रज्ञा को मानने लगता है और उसे छोड़ देता है।

8 साल बाद

अभि और प्रज्ञा दोनों अलग हो चुके हैं। अभि की शादी तनु से हो जाती है और वहीं प्रज्ञा लंदन में अपनी बेटी कियारा के साथ रहती है। वो किंग सिंह (मिशाल रहेजा) की मैनेजर के रूप में काम करती है, कियारा उसे अपना पिता सोचती है, वहीं वो भी उसे अपनी बेटी की तरह ही प्यार करता है। अपने काम से प्रज्ञा दिल्ली में किंग और कियारा के साथ आती है, उसे ये पता नहीं होता है कि अभि अब दिल्ली में रह रहा है।

कलाकार[संपादित करें]

मुख्य पात्र
अन्य पात्र

निर्माण[संपादित करें]

यह एक प्रेम कहानी है, जिसका निर्माण एकता कपूर और शोभा कपूर ने किया है। एकता कपूर को लगता है कि क से शुरू होने वाले धारावाहिक के नाम उसके लिए भाग्यशाली होते हैं। इस लिए इस धारावाहिक का नाम भी क से अर्थात कुमकुम भाग्य रखा गया।[2]

इसके बारे में बताते हुए ज़ी टीवी के कार्यक्रम के मुख्य, नमित शर्मा कहते हैं कि- “यह धारावाहिक एक दूसरे अच्छे धारावाहिक के जगह पर दिखाया जाएगा, इससे आप समझ सकते हैं की हमें इस पर कितना भरोसा है। यह धारावाहिक ज़ी टीवी के 4 वर्षों से चल रहे एक बहुत ही विशेष धारावाहिक पवित्र रिश्ता का जगह लेगा। जो भारतीय दर्शकों का सबसे अधिक चहेता रहा है। रात को खाना खाते समय यह मानव और अर्चना की जोड़ी लाखों लोगों को बहुत पसंद है। कुमकुम भाग्य भी दूसरा सबसे अच्छी कहानी पर आधारित एक पंजाबी परिवार की है जो मुंबई में रहता है। जिसमें एक माँ अपनी दोनों बच्चियों के लिए एक आदर्श रिश्ता खोजते रहती है। एकता ने इसे एक सुन्दर प्रेम को नाट्य रूप दिया है जो अन्य रोज रोज के सास बहू के कहानी से बिलकुल अलग है।”[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]