कुंडलिनी

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कुंडलिनी कुंडली के आकार की रचना को कुण्डलिनी या हैलिक्स कहते हैं।

जीव विज्ञान में[संपादित करें]

डी एन ए की रचना उभय कुंडलिनी के आकार की होती है, जिसे डबल हैलिक्स भी कहते हैं। विश्व में अनेक जैव तथा अजैव स्वरूप कुंडलिनी के आकार के होते हैं। वस्तुतः डी एन ए की उभय कुंडलिनी यांत्रिकी की दृष्टि से बहुत सुदृड़ संरचना होती है।

कुंडलीनी जागरण -कुंडलीनी मुलाधार चक्र मे शिव लिंग पर साढ़े तीन फेंरे लगाये सुप्त अवस्था में रहती है।