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किडनी खराब

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गुर्दे की विफलता (किडनी फेल्योर)
अन्य नामवृक्क विफलता (Renal failure), एंड-स्टेज रिनल डिजीज
मानव गुर्दे (किडनी) की आंतरिक संरचना को दर्शाने वाला आरेख
मानव गुर्दे का आरेख, जो रक्त को छानकर अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के रूप में बाहर निकालने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।
विशेषज्ञता क्षेत्रनेफ्रोलॉजी
लक्षणथकान, पैरों व टखनों में सूजन (एडिमा), मतली, पेशाब की मात्रा में कमी, सांस फूलना
जटिलताउच्च रक्तचाप, एनीमिया, हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी, शरीर में तरल पदार्थ का निर्माण
कारणमधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप, गुर्दे का संक्रमण, पॉलीसिस्टिक किडनी रोग
चिकित्साडायलिसिस, गुर्दा प्रत्यारोपण, दवाएं, आहार प्रबंधन

गुर्दे की विफलता, जिसे आम बोलचाल में किडनी खराब होना या चिकित्सकीय भाषा में वृक्क विफलता कहा जाता है, एक अत्यंत गंभीर चिकित्सा स्थिति है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक या दोनों गुर्दे (किडनियाँ) रक्त से अपशिष्ट उत्पादों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को छानने में असमर्थ हो जाते हैं।[1] जब गुर्दे अपना यह महत्वपूर्ण कार्य करना बंद कर देते हैं, तो शरीर में खतरनाक स्तर तक विषाक्त पदार्थ और तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं, जो जीवन के लिए घातक स्थिति पैदा कर सकते हैं।

गुर्दे की विफलता मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: 'एक्यूट किडनी इंजरी' और 'क्रोनिक किडनी डिजीज'। एक्यूट किडनी इंजरी में गुर्दे अचानक (कुछ ही घंटों या दिनों में) काम करना बंद कर देते हैं, जो अक्सर किसी गंभीर चोट, अत्यधिक निर्जलीकरण (dehydration), या संक्रमण के कारण होता है। इसके विपरीत, क्रोनिक किडनी रोग में गुर्दे की कार्यक्षमता महीनों या वर्षों में धीरे-धीरे कम होती है। गुर्दे की विफलता के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। जैसे-जैसे बीमारी उन्नत अवस्था में पहुंचती है, मरीजों में टखनों, पैरों और चेहरे पर सूजन (एडिमा), अत्यधिक थकान, सांस फूलना, मतली, भ्रम, छाती में दर्द और पेशाब की मात्रा में कमी जैसे लक्षण प्रकट होने लगते हैं।[2]

विश्व स्तर पर गुर्दे खराब होने के दो सबसे प्रमुख कारण अनियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप हैं। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर गुर्दे की छोटी रक्त वाहिकाओं (नेफ्रॉन) को स्थायी रूप से नष्ट कर देता है। इसके अतिरिक्त, पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (एक प्रकार का आनुवंशिक विकार), ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (गुर्दे की फ़िल्टरिंग इकाइयों की सूजन), बार-बार होने वाला मूत्र पथ का संक्रमण और कुछ दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग भी गुर्दे की विफलता का कारण बन सकते हैं।

गुर्दे की विफलता का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का प्रकार और चरण क्या है। एक्यूट मामलों में मूल कारण का समय पर इलाज करने से गुर्दे फिर से सामान्य रूप से काम कर सकते हैं। हालांकि, 'एंड-स्टेज रिनल डिजीज' यानी स्थायी रूप से किडनी खराब होने की स्थिति में, मरीज के जीवन को बचाने के लिए डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण ही मुख्य विकल्प बचते हैं।[3] डायलिसिस एक कृत्रिम प्रक्रिया है जो मशीन की मदद से रक्त को साफ करती है, जबकि प्रत्यारोपण में एक स्वस्थ डोनर की किडनी मरीज के शरीर में सर्जरी के माध्यम से लगाई जाती है। इसके साथ ही, इस बीमारी को प्रबंधित करने के लिए सोडियम (नमक), पोटेशियम और फॉस्फोरस युक्त आहार में सख्त परहेज की सलाह दी जाती है।

सन्दर्भ

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  1. "End-stage renal disease - Symptoms and causes". Mayo Clinic.
  2. "Overview - Chronic kidney disease". NHS (National Health Service, UK).
  3. "What is Kidney Failure?". National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK).

बाहरी कड़ियाँ

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