कावि लिपि
| कवि (kawi) | |
|---|---|
| प्रकार | |
काल | c. 8th–16th century |
| दिशा | बाएँ-से-दाएँ |
| भाषाएँ | Indonesian languages, Philippine languages, Malaysian languages |
| संबंधित लिपि(याँ) | |
जनक प्रणालियाँ | |
बाल प्रणालियाँ | In Indonesia: Balinese Batak Javanese (Hanacaraka) Lontara Sundanese Rencong Rejang In the Philippines: Baybayin (Badlit) Buhid Hanunó'o Kulitan Tagbanwa (Apurahuano) |
अक्षर कवि या 'कवि लिपि' जावा में उत्पन्न एक लिपि है। इस लिपि का उपयोग ८वीं शताब्दी से आरम्भ होकर लगभग १५०० ई तक दक्षिणपूर्व एशिया में होता था। यह पल्लव लिपि से सीधे व्युत्पन्न है जिसे दक्षिण भारत के पल्लव राजवंश के समय व्यापारियों द्वारा जावा में लाया गया था। यह संस्कृत और पुरानी जावा (कवि भाषा) लिखने के लिये प्रयुक्त होती थी। कवि लिपि से ही इण्डोनेशिया की जावाई लिपि तथा बाली लिपि आदि का जन्म हुआ है। इसके अलावा बायबायिन (Baybayin) नामक पारम्परिक फिलिपीननी लिपि भी इसी से जन्मी है।

कवि लिपि के शिलालेख
[संपादित करें]- कवि लिपि में अंकित कुछ शिलालेख
- साँचा:Interlanguage link multi (785 Śaka/863 CE) from Yogyakarta, Indonesia in plain, early Kawi.
- Gajah Mada inscription (1273 Śaka/1351 CE) from central Java, Indonesia.
- Saruaso II inscription (14th century CE), from west Sumatra, Indonesia.
- Ahmat Majanu tombstone (1467 CE) from Pengkalan Kempas Historical Complex, Malaysia.
- Rock inscription in Telaga Warna, Dieng plateau
- Architectural inscription in Gunung Kawi complex, Bali, in quadratic Kawi which reads 𑼲𑼙𑼶𑼭𑼸𑼪𑼲𑼶𑼁𑼙𑼭𑼸 haji lumahiṃ jalu.
- Laguna Copperplate Inscription (822 Śaka/900 CE) from Luzon, the Philippines.
- राजा जयपानगुस की ताम्रलेख जिसमें बाली द्वीप के किन्तामणि बागली गाँव की सीमा का उल्लेख है (१२वीं शताब्दी)
कवि लिपि की वर्णमाला
[संपादित करें]स्वर
[संपादित करें]| कण्ठ्य
𑼒𑼠𑽂𑼜𑽂𑼫 |
तालव्य
𑼡𑼴𑼭𑼮𑽂𑼫 |
ओष्ठ्य
𑼐𑼰𑽂𑼜𑽂𑼫 |
मूर्धन्य
𑼪𑼹𑼂𑼤𑼥𑽂𑼫 |
दन्त्य
𑼣𑼥𑽂𑼡𑽂𑼫 |
कण्ठ्य-तालव्य
𑼒𑼠𑽂𑼜𑽂𑼫𑼡𑼴𑼭𑼮𑽂𑼫 |
कण्ठ्य-ओष्ठ्य
𑼒𑼠𑽂𑼜𑽂𑼫𑼐𑼰𑽂𑼜𑽂𑼫 |
||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हृस्व
𑼲𑼺𑼰𑽂𑼮 |
𑼄
अ |
𑼆
इ |
𑼈
उ |
𑼊
ऋ |
𑼌
ऌ |
𑼎
ए |
𑼐
ओ |
𑼄𑽀
ऄ |
| दीर्घ
𑼣𑼶𑼂𑼕 |
𑼅
आ |
𑼇
ई |
𑼉
ऊ |
𑼋
ॠ |
𑼍
ॡ |
𑼏
ऐ |
𑼐𑼴
औ |
𑼄𑽀𑼴
ऒ |
मात्राएँ
[संपादित करें]| हृस्व
𑼲𑼺𑼰𑽂𑼮 |
-
-अ |
𑼶
ि |
𑼸
ु |
𑼺
ृ |
𑼾
े |
𑼾𑼴
ो |
𑽀
ॊ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दीर्घ
𑼣𑼶𑼂𑼕 |
𑼴
ा |
𑼷
ी |
𑼹
ू |
𑼺𑼴
ॄ |
𑼿
ै |
𑼿𑼴
ौ |
𑽀𑼴
ॏ |
| दूसरे | 𑼀
ँ |
𑼁
-ङ्ग |
𑼂
-र1 |
𑼃
ः |
𑽁
हलन्त |
||
| 'क' से साथ। | |||||||
| हृस्व
𑼲𑼺𑼰𑽂𑼮 |
𑼒
क |
𑼒𑼶
कि |
𑼒𑼸
कु |
𑼒𑼺
कृ |
𑼒𑼾
के |
𑼒𑼾𑼴
को |
𑼒𑽀
कॊ |
| दीर्घ
𑼣𑼶𑼂𑼕 |
𑼒𑼴
का |
𑼒𑼷
की |
𑼒𑼹
कू |
𑼒𑼺𑼴
कॄ |
𑼒𑼿
कै |
𑼒𑼿𑼴
कौ |
𑼒𑽀𑼴
कॏ |
| दूसरे | 𑼒𑼀
कँ |
𑼒𑼁
कङ्ग |
𑼂𑼒
र्क/क्र1 |
𑼒𑼃
कः |
𑼒𑽁
क् |
||
| टिप्पणियाँ:-
^1 कावी लिपि में, इस चिह्न का उपयोग मुख्य रूप से एक रेफ के रूप में किया जाता है, जो /र-/ उपसर्ग को दर्शाता है; किंतु कावी लिपि और उससे व्युत्पन्न लिपियों में, कभी-कभी इस चिह्न का उपयोग बदल जाता है और यह /-र/ अंत्य-वर्ण के रूप में प्रयुक्त होने लगता है। | |||||||
व्यंजन
[संपादित करें]| उच्चारण स्थान
𑼮𑼂𑼔𑽂𑼔𑼱𑽂𑼮𑼬 |
अघोष 𑼥𑼶𑼂𑼱𑽂𑼮𑼬 | सघोष 𑼱𑽂𑼮𑼬 | अनुनासिक
𑼄𑼥𑼸𑼥𑼴𑼱𑼶𑼒 |
अर्धस्वर
𑼄𑼂𑼤𑼱𑽂𑼮𑼬 |
उष्म
𑼉𑼰𑽂𑼪 |
विसर्ग
𑼮𑼶𑼱𑼂𑼔𑽂𑼔 |
संयुक्त | ||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अमहाप्राण
𑼄𑼭𑽂𑼦𑼦𑽂𑼬𑼴𑼠 |
महाप्राण
𑼪𑼲𑼴𑼦𑽂𑼬𑼠 |
अमहाप्राण
𑼄𑼭𑽂𑼦𑼦𑽂𑼬𑼴𑼠 |
महाप्राण
𑼪𑼲𑼴𑼦𑽂𑼬𑼠 | ||||||
| कण्ठ्य
𑼒𑼠𑽂𑼜𑽂𑼫 |
𑼒
क |
𑼓
ख |
𑼔
ग |
𑼕
घ |
𑼖
ङ |
𑼲
ह |
|||
| तालव्य
𑼡𑼴𑼭𑼮𑽂𑼫 |
𑼗
च |
𑼘
छ |
𑼙
ज |
𑼚
झ |
𑼛
ञ |
𑼫
य |
𑼯
श |
𑼳
ज्ञ | |
| मूर्धन्य
𑼪𑼹𑼂𑼤𑼥𑽂𑼫 |
𑼜ट | 𑼝ठ | 𑼞ड | 𑼟
ढ |
𑼠ण | 𑼬
र |
𑼰
ष |
||
| दन्त्य
𑼣𑼥𑽂𑼡𑽂𑼫 |
𑼡
त |
𑼢
थ |
𑼣
द |
𑼤
ध |
𑼥
न |
𑼭
ल |
𑼱
स |
||
| ओष्ठ्य
𑼐𑼰𑽂𑼜𑽂𑼫 |
𑼦
प |
𑼧
फ |
𑼨
ब |
𑼩
भ |
𑼪
म |
𑼮
व |
|||