कालीप्रसन्न सिंह
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| कालीप्रसन्न सिंह | |
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कालीप्रसन्न सिंह | |
| जन्म |
23 फ़रवरी 1840 कोलकाता |
| मौत |
24 जुलाई 1870 (उम्र 29 वर्ष) कोलकाता, बंगाल प्रेसिडेन्सी, ब्रितानी भारत |
| राष्ट्रीयता | Indian |
| जाति | बंगाली हिन्दू |
| पेशा | साहित्यकार |
| धर्म | हिन्दू धर्म |
| माता-पिता | ननदलाल सिंह |
कालीप्रसन्न सिंह (23 फरवरी 1841{?} – 24 जुलाई 1870) एक बंगाली साहित्यकार थे। उन्होने महाभारत का बांग्ला में अनुवाद किया। वे एक मानवतावादी व्यक्ति थे जिन्होने विपत्तिग्रस्त अनेकों लोगों एवं आन्दोलनों की सहायता की।
ग्रंथतालिका
[संपादित करें]कालीप्रसन्न सिंह ने निम्नलिखित पुस्तकों की रचना की :
- बाबुनाटक (१८५४)
- विक्रमोर्वशी नाटक (१८५७)
- सावित्री-सत्यवान नाटक (१८५८)
- मालती-माधव नाटक (१८५९)
- हिन्दू पेट्रियट सम्पादक मृत हरिशचन्द्र मुखोपाध्यायेर स्मरणार्थ कोनो विशेष चिह्न स्थापन जन्य बङ्गबासिबर्गेर प्रति निबेदन (१८६१)
- हुतोम प्याँचार नकशा (१८६१)
- पुराण संग्रह बा महाभारत (महाभारत अनुवाद, १८५८-६६)
- बङ्गेश बिजय (१८६८)
- श्रीमद्भागबद्गीता (१९०२)