कालीकानंद अवधूत
| कालीकानंद अवधूत | |
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| जन्म |
दुलाल चंद्र मुखर्जी 2 नवंबर 1910 भवानीपुर, कलकत्ता, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत |
| मौत |
13 अप्रैल 1978 चिनसुराह, पश्चिम बंगाल, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| पेशा | लेखक |
दुलाल चंद्र मुखर्जी (2 नवंबर 1910—13 अप्रैल 1978), जिन्हें उनके उपनाम कालीकानंद अवधूत से जाना जाता है, एक भारतीय उपन्यासकार, संत और यात्री थे, जो बंगाली भाषा में लिखते थे।
जीवनी
[संपादित करें]अवधूत का जन्म बंगाल प्रेसीडेंसी के भवानीपुर, कलकत्ता (अब कोलकाता) में अनाथनाथ मुखर्जी के घर हुआ था। उनका असली नाम दुलाल चंद्र मुखर्जी था, लेकिन उन्होंने अपना उपनाम कालीकानंद अवधूत रख लिया।[1] अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद वे उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में संत बन गए। वे अपनी पुस्तक मरुतीर्थ हिंगलाज के लिए सबसे ज़्यादा लोकप्रिय थे, जो हिंगलाज की उनकी तीर्थयात्रा के वास्तविक जीवन के अनुभव पर आधारित है।[2] उनके यात्रा वृतांत पर आधारित फिल्म मरुतीर्थ हिंगलाज भी 1959 में रिलीज़ हुई थी।[3][4] उन्होंने उपनिषदों की पुस्तक का संपादन किया। उन्होंने एक और उपन्यास उद्धारणपुरेर घाट लिखने से पहले अनुभव इकट्ठा करने के लिए कुछ साल उद्धारणपुर, बर्दवान में बिताए।[5] अवधूत ने अपने निजी जीवन में तंत्र का भी अभ्यास किया।[6] उन्होंने चिनसुराह में रुद्रचंडी मठ की स्थापना की और अपनी मृत्यु तक वहीं अपना अंतिम जीवन व्यतीत किया।[7]

वे गुप्त रूप से क्रांतिकारी कार्यों से जुड़े थे। उन्होंने दो दशकों तक खुद को अलग-अलग जगहों पर छिपाए रखा। उन जगहों के नाम आज भी अज्ञात हैं। उन्होंने बांग्लादेश के फरीदपुर, भारत के बाहर बर्मा (अब म्यांमार), मध्य प्रदेश के उज्जैन में छिपकर कई जगहें बिताईं। वे उत्तर प्रदेश में काशी के कालीमंदिर के पुजारी भी थे और उन्होंने अपने जीवन के कई साल मुर्शिदाबाद के जाजन, बर्दवान के उद्धारणपुर घाट में भी बिताए। उन्होंने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगलाज माता मंदिर का भी दौरा किया।
कृतियाँ
[संपादित करें]- बहुब्रीही
- बशीकरण
- देबरीगन
- हिंगलाजेर पारे
- उद्धारणपुरेर घाट
- कालीतीर्थ कालीघाट
- मरुतीर्थ हिंगलाज
- कौशिकी कनारा
- पियारी
- नीलकंठ हिमालय
- सच्चा दरबार
- सप्तस्वर पिनाकिनी
- टप्पा ठुंगरी
- सुभया भवतु
- सुमेरु कुमेरु
- स्वामीघातिनी
- कान पेते रोई
- मोन माने ना
- सुख शांति वालोबासा
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "সংসার থেকে পালাতে গিয়ে অবধূত যেন বিশ্বসংসারের বাসিন্দা হয়ে গেলেন". www.anandabazar.com (Bengali भाषा में). अभिगमन तिथि: 28 August 2021.
- ↑ Gupta, Swarupa (1 November 2017). Cultural Constellations, Place-Making and Ethnicity in Eastern India, c. 1850-1927 (अंग्रेज़ी भाषा में). BRILL. ISBN 978-90-04-34976-6.
- ↑ Swarupa Gupta (November 2017). Cultural Constellations, Place-Making and Ethnicity in Eastern India. BRILL. ISBN 9789004349766. अभिगमन तिथि: 19 April 2018.
- ↑ "Marutirtha Hinglaj". मूल से से 9 April 2018 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 19 April 2018.
- ↑ Indian Writing Today (अंग्रेज़ी भाषा में). Nirmala Sadanand Publishers. 1969.
- ↑ "সম্পাদক সমীপেষু: মুক্ত কণ্ঠকে এত ভয়!". 8 March 2021 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 11 June 2025.
- ↑ Prohor. "তাঁর সাহিত্যে মৃত্যু এক চরিত্র: সাহিত্য ও জীবনদর্শনে অবধূত - Prohor". তাঁর সাহিত্যে মৃত্যু এক চরিত্র: সাহিত্য ও জীবনদর্শনে অবধূত - Prohor (अंग्रेज़ी भाषा में). मूल से से 11 जून 2025 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 11 June 2025.