कलिंजर

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कलिंजर
—  कस्बा  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश

निर्देशांक: 19°54′N 83°10′E / 19.90°N 83.16°E / 19.90; 83.16 उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित कालिंजर बुंदेलखंड का ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है। प्राचीन काल में यह जेजाकभुक्ति साम्राज्य के अधीन था। यहां का किला भारत के सबसे विशाल और अपराजेय किलों में एक माना जाता है। 9वीं से 15वीं शताब्दी तक यहां चंदेल शासकों का शासन था। चंदेल राजाओं के शासनकाल में कालिंजर पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक,शेर शाह सूरी और हुमांयू ने आक्रमण किए लेकिन जीतने में असफल रहे। अनेक प्रयासों के बावजूद मुगल कालिंजर के किले को जीत नहीं पाए। अन्तत: 1569 में अकबर ने यह किला जीता और अपने नवरत्नों में एक बीरबल को उपहारस्वरूप प्रदान किया। बीरबल क बाद यह किला बुंदेल राजा छत्रसाल के अधीन हो गया। छत्रसाल के बाद किले पर पन्ना के हरदेव शाह का अधिकार हो गया। 1812 में यह किला अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया। एक समय कालिंजर चारों ओर से ऊंची दीवार से घिरा हुआ था और इसमें चार प्रवेश द्वार थे। वर्तमान में कामता द्वार, पन्ना द्वार और रीवा द्वार नामक तीन प्रवेश द्वार ही शेष बचे हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह नगर पर्यटकों को बहुत पसंद आता है। पर्यटक यहां इतिहास से रूबरू होने के लिए नियमित रूप से आते रहते हैं।

धार्मिक लेख बताते हैं, कि प्रत्येक युग में इस स्थान के भिन्न नाम रहे:

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

कालिंजर किला[संपादित करें]

विंध्‍य की पहाड़ी पर 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला इतिहास के उतार-चढ़ावों का प्रत्यक्ष गवाह है। किले में आलमगीर दरवाजा, गणेश द्वार, चौबुरजी दरवाजा, बुद्ध भद्र दरवाजा, हनुमान द्वार, लाल दरवाजा और बारा दरवाजा नामक सात द्वारों से प्रवेश किया जा सकता है। किले के भीतर राजा महल और रानी महल नामक शानदार महल बने हुए हैं।

नीलकंठ मंदिर[संपादित करें]

इस मंदिर को चंदेल शासक परमार्दि देव ने बनवाया था। मंदिर में 18 भुजा वाले काल की विशाल प्रतिमा स्थापित है। काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र रूप माना जाता है। मंदिर के रास्ते पर भगवान शिव, काल भैरव, गणेश और हनुमान की प्रतिमाओं को पत्थर पर खूबसूरती से उकेरा गया है।

वनखंडेश्वर महादेव मंदिर[संपादित करें]

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर शिवसारी गंगा के उदगम स्थल पर स्थित है। शिवभक्तों का मंदिर में निरंतर आना-जाना लगा रहता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

कालिंजर का नजदीकी एयरपोर्ट खजुराहो विमानक्षेत्र है, जो लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर है। खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में है।

रेल मार्ग

अतर्रा कालिंजर का निकटतम रेलवे स्टेशन है। कालिंजर से अतर्रा की दूरी करीब 36 किलोमीटर की है। अतर्रा रेलवे स्टेशन झांसी-बांदा-इलाहाबाद रेल लाइन पर पड़ता है। चंबल एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस आदि रेलगाड़ियों अतर्रा जाती हैं।

सड़क मार्ग

कालिंजर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अनेक शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। चित्रकूट, बांदा, इलाहाबाद, सतना, छतरपुर आदि शहरों से यहां के नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

निर्देशांक: 24°59′N 80°29′E / 24.983°N 80.483°E / 24.983; 80.483{{#coordinates:}}: cannot have more than one primary tag per page