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कार्ल अलेक्जेंडर मुलर

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कार्ल अलेक्जेंडर मुलर
जन्म 20 अप्रैल 1927
बेसल, स्विट्जरलैंड
मौत 9 जनवरी 2023
ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड
नागरिकता स्विस
शिक्षा की जगह स्विस संघीय प्रौद्योगिकी संस्थान
प्रसिद्धि का कारण उच्च तापमान अतिचालकता
पुरस्कार भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1987)

कार्ल अलेक्जेंडर मुलर (20 अप्रैल 1927 – 9 जनवरी 2023) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात स्विस भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें ठोस अवस्था भौतिकी और विशेष रूप से उच्च तापमान अतिचालकता के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।[1] वर्ष 1987 में उन्हें उनके इस अभूतपूर्व और युगांतरकारी वैज्ञानिक योगदान के लिए जोहान्स जॉर्ज बेडनोर्ज़ के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।[2] उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण आविष्कार विज्ञान और ऊर्जा संचरण के इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है, जिसने विद्युत ऊर्जा को बिना किसी प्रतिरोध के प्रवाहित करने की दिशा में एक नई क्रांति ला दी।[3]

प्रारम्भिक जीवन

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उनका जन्म 20 अप्रैल 1927 को स्विट्जरलैंड के बेसल नामक एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक नगर में हुआ था।[4] उनके बचपन का कुछ समय ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग नगर में भी व्यतीत हुआ था, जहाँ उनके पिता संगीत का अत्यंत गहन अध्ययन कर रहे थे। जब वे मात्र ग्यारह वर्ष के थे, तब उनकी माता का आकस्मिक निधन हो गया, जिसने उनके बाल मन पर अत्यंत गहरा प्रभाव डाला।[5] इस दुखद घटना के पश्चात वे वापस स्विट्जरलैंड आ गए और वहाँ के एक विद्यालय में अपनी प्रारंभिक पढ़ाई आरंभ की। बचपन से ही उनकी रुचि गणित और विद्युतीय उपकरणों की आंतरिक कार्यप्रणाली को समझने में बहुत अधिक थी। वे अक्सर बेतार संचार यंत्रों (ध्वनि ग्राही यंत्रों) को खोलकर उनके पुर्जों का अध्ययन करते थे, जिसने उनके भीतर विज्ञान और भौतिकी के प्रति एक अत्यंत गहरी जिज्ञासा उत्पन्न कर दी।

प्रारंभिक शिक्षा

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एक ऐतिहासिक पुस्तकालय। बचपन से ही उनकी रुचि गणित और भौतिकी के ग्रंथों का अध्ययन करने में बहुत अधिक थी।

अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रतिष्ठित स्विस संघीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश लिया।[6] इसी महान संस्थान से उन्होंने गणित और भौतिकी विषय में अपना अत्यंत गहन अध्ययन आरंभ किया और अपनी अद्भुत मेधा का परिचय दिया। इस संस्थान में उन्हें उस समय के कई विश्वविख्यात भौतिक विज्ञानियों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिन्होंने उनके वैज्ञानिक विचारों को एक बिल्कुल नई दिशा दी। वर्ष 1958 में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की।[7] यहाँ उन्होंने अत्यंत शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र और ठोस पदार्थों की संरचना पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था, जिसने उनके भविष्य के सबसे बड़े वैज्ञानिक अनुसंधान की अत्यंत मजबूत नींव रखी।[8]

एक आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगशाला। अपनी विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने ऐसी ही उन्नत प्रयोगशालाओं में अपना ऐतिहासिक अनुसंधान किया।

विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने ज्यूरिख स्थित एक अत्यंत उन्नत अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला में एक पूर्णकालिक शोधकर्ता के रूप में अपना कार्य आरंभ किया। यहाँ उन्होंने अपने वैज्ञानिक साथी के साथ मिलकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खोज की, जिसने विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दिया।[9] वर्ष 1986 में उन्होंने बेरियम, लैंथेनम, तांबा और ऑक्सीजन से बने एक विशेष प्रकार के रासायनिक यौगिक (मृत्तिका) का अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन किया। इसी ऐतिहासिक प्रयोग के दौरान उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से पाया कि यह विशिष्ट यौगिक 35 केल्विन के तापमान पर अतिचालकता का गुण प्रदर्शित करता है।[10] उनकी यह अद्भुत खोज इसलिए महान थी क्योंकि इससे पहले यह माना जाता था कि अतिचालकता केवल परम शून्य के अत्यंत करीब ही संभव है।

सिद्धांत

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एक तापमान मापक यंत्र। उनकी सबसे बड़ी खोज इसी बात पर आधारित थी कि अतिचालकता अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर भी प्राप्त की जा सकती है।

उनके वैज्ञानिक शोध का मुख्य सिद्धांत यह प्रमाणित करता है कि कुछ विशिष्ट संरचना वाले यौगिक अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर भी विद्युत धारा को बिना किसी ऊर्जा हानि या प्रतिरोध के प्रवाहित कर सकते हैं।[11] इस सिद्धांत के अनुसार यदि इन विशिष्ट पदार्थों को तरल नाइट्रोजन का उपयोग करके ठंडा किया जाए, तो वे अत्यंत शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकते हैं और विद्युतीय प्रतिरोध को पूरी तरह से शून्य कर सकते हैं। उन्होंने यह भी समझाया कि इस नवीन सिद्धांत का उपयोग करके भविष्य में अत्यंत तीव्र गति से चलने वाले चुम्बकीय वाहन और ऊर्जा के अत्यधिक कुशल संचरण यंत्र बनाए जा सकते हैं।[12] यह सिद्धांत आज भी आधुनिक भौतिकी और सामग्री विज्ञान का एक बहुत बड़ा और प्रामाणिक आधार है।

विज्ञान के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें खोज के मात्र एक वर्ष बाद ही, वर्ष 1978 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।[13] विज्ञान के इतिहास में खोज और नोबेल पुरस्कार के बीच का यह सबसे कम समय माना जाता है, जो उनके शोध की महानता को दर्शाता है। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वे कई दशकों तक ज्यूरिख विश्वविद्यालय में एक पूर्णकालिक वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे और वहाँ उन्होंने कई युवा शोधकर्ताओं का अत्यंत सफल नेतृत्व भी किया। उनके ऐतिहासिक शोध कार्य के कारण ही आज ऊर्जा विज्ञान में इतनी प्रगति संभव हो सकी है। 9 जनवरी 2023 को 95 वर्ष की अत्यंत परिपक्व आयु में उनका निधन हो गया, परंतु विज्ञान जगत में उनका योगदान सदा अमर रहेगा।[14]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. "कार्ल अलेक्जेंडर मुलर की जीवनी". नोबेल पुरस्कार समिति. अभिगमन तिथि: 2 जून 2026.
  2. "दो वैज्ञानिकों ने जीता भौतिकी का नोबेल पुरस्कार". द न्यूयॉर्क टाइम्स. 14 अक्टूबर 1987. अभिगमन तिथि: 2 जून 2026.
  3. मुलर, कार्ल अलेक्जेंडर (1986). "अतिचालकता में नए आयाम". भौतिकी समीक्षा पत्रिका. 45: 494–497.
  4. स्मिथ, रॉबर्ट (2001). मुलर का प्रारंभिक जीवन और संघर्ष. विज्ञान और शिक्षा प्रकाशन.
  5. जॉनसन, माइकल (2003). "महान वैज्ञानिकों का प्रारंभिक जीवन". प्रायोगिक भौतिकी पत्रिका. 22: 112–118.
  6. "स्विस संस्थान के नोबेल विजेता". स्विस संघीय प्रौद्योगिकी संस्थान. अभिगमन तिथि: 2 जून 2026.
  7. मुलर, कार्ल (1995). मेरा वैज्ञानिक सफर और अतिचालकता. विश्व वैज्ञानिक प्रकाशन.
  8. "भौतिकी विभाग का इतिहास". ज्यूरिख विश्वविद्यालय विज्ञान संकाय. अभिगमन तिथि: 2 जून 2026.
  9. डेविस, पॉल (2005). अतिचालकता का इतिहास और विकास. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रकाशन.
  10. टेलर, रिचर्ड (2000). "अतिचालकता में नई क्रांतियाँ". नेचर भौतिकी पत्रिका. 10: 78–85.
  11. विलियम्स, जॉर्ज (2010). आधुनिक भौतिकी के नए सिद्धांत. स्प्रिंगर प्रकाशन.
  12. एंडरसन, थॉमस (2012). "पदार्थ विज्ञान में चुम्बकीय सिद्धांत". विज्ञान प्रगति. 45: 200–210.
  13. "1987 भौतिकी नोबेल पुरस्कार का सारांश". नोबेल फाउंडेशन. अभिगमन तिथि: 2 जून 2026.
  14. "नोबेल विजेता कार्ल मुलर का निधन". बीबीसी समाचार. 9 जनवरी 2023. अभिगमन तिथि: 2 जून 2026.