कार्य विश्लेषण

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साधारण शब्दों में कार्य विश्लेषण (Job analysis या work analysis) किसी कार्य के विषय में सूचनाओं को एकत्र करने की एक प्रक्रिया है। दूसरे शब्दों में, कार्य विश्लेषण, कार्यों का एक औपचारिक एवं विस्तृत निरीक्षण है। यह किसी कार्य के विषय में सूचनाओं के संग्रहण की एक प्रक्रिया है। इस प्रकार कार्य विश्लेषण, कार्य की विषय-वस्तु, जिन भौतिक परिस्थितियों में कार्य सम्पादित किया जाता है तथा कार्य के उत्तरदायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक पात्रताओं का व्यवस्थित अनुसंधान है। कार्य विश्लेषण की कुछ महत्वपूर्ण

परिभाषायें निम्नलिखित प्रकार से हैः

ई.जे. मैकॉर्मिक के अनुसार,

कार्य विश्लेषण को कार्यों के विषय में सूचना प्राप्त करने के रूप में पारिभाषित किया जा सकता है।

एम.एल. ब्लम के अनुसार,

कार्य विश्लेषण की परिभाषा किसी कार्य से सम्बन्धित विभिन्न अंगभूतों, कर्तव्यों, कार्य-दशाओं तथा कर्मचारी की व्यक्तिगत पात्रताओं के समुचित अध्ययन के रूप में की जा सकती है।

एडविन बी. फिलिप्पो के अनुसार,

कार्य विश्लेषण किसी कार्य विशेष की क्रियायों एवं उत्तरदायित्वों के सम्बन्ध में सूचनाओं का अध्ययन करने एवं उन्हें एकत्रित करने की प्रक्रिया है।

कार्य विश्लेषण के उद्देश्य[संपादित करें]

कार्य विश्लेषण सम्पूर्ण मानव संसाधन प्रबन्धन गतिविधियों के लिए एक अत्यन्त आवश्यक आधार है। इसके विशेषीकृत उद्देश्यों को निम्नलिखित प्रकार से समझा जा सकता हैः

  • 1. कर्मचारियों की अधिप्राप्ति के लिए उचित एवं तर्कसंगत आधार स्थापित करना।
  • 2. प्रत्येक कार्य के विषय में अवलोकन एवं अध्ययन के माध्यम से मानव संसाधन नियोजन के लिए आवश्यक सूचनायें उपलब्ध कराना।
  • 3. कार्य मूल्यांकन के लिए आवश्यक तथ्यों एवं सूचनाओं को उपलब्ध कराना।
  • 4. प्रत्येक कार्य के लिए अपेक्षित न्यनतम स्वीकार्य पात्रताओं, निपुणताओं तथा योग्यताओं सम्बन्धी मानकों को निर्दिष्ट करके कर्मचारियों की भर्ती एवं चयन सम्बन्धी प्रक्रिया को सुगमता प्रदान करना।
  • 5. कर्मचारियों के लिए प्रभावी प्रशिक्षण एवं विकास के कार्यक्रमों की योजना तथा विषय-वस्तु का निर्माण करने में सहायता प्रदान करना।
  • 6. किसी कार्य विशेष को सम्पादित करने हेतु अपेक्षित योग्यता सम्बन्धी सूचना उपलब्ध कराकर मजदूरी एवं वेतन के निर्धारण में योगदान देना।

कार्य विश्लेषण से प्राप्त होने वाली सूचनायें[संपादित करें]

कार्य विश्लेषण किसी के विभिन्न पहलुओं की व्याख्यात्मक अध्ययन है, जिसके अन्तर्गत कार्य सम्बन्धी कर्तव्यों, उत्तरदायित्वों, कार्य की प्रकृति एवं कार्य-दशाओं तथा कार्य हेतु अपेक्षित क्षमताओं एवं योग्यताओं का समावेश होता है। कार्य विश्लेषण से प्राप्त होने वाली सूचनाओं अथवा इसके विषय क्षेत्र का विवरण निम्नलिखित हैः

कार्य परिचय

  • ( क ) कार्य शीर्षक
  • ( ख ) कार्य संख्या

कार्य की प्रमुख विशेषतायें

  • ( क ) कार्य स्थल
  • ( ख ) कार्य का भौतिक पर्यावरण
  • ( ग ) कार्य का संगठनात्मक पर्यावरण
  • ( घ ) कार्य सम्बन्धी जोखिम

कार्य के अन्तर्गत क्रियाकलाप

  • ( क ) कार्य की प्रक्रियायें
  • ( ख ) कार्य के अंतर्गत निर्धारित कर्तव्य
  • ( ग ) कर्तव्यों के निष्पादन की विधि

कार्य का अन्य कार्यों से सम्बन्ध

  • ( क ) कार्यों के मध्य समन्वय
  • ( ख ) सहयोगी कर्मचारी
  • ( ग ) सहायक तथा अधीनस्थ

कार्य की प्रौद्योगिकी

  • (क ) कार्य में प्रयुक्त यन्त्र एवं उपकरण
  • ( ख ) कार्य की तकनीक
  • (ग ) कार्य में प्रयुक्त साधन एवं सामग्री

कार्य निष्पादन मानक

  • ( क ) गुणवत्ता एवं मात्रा की दृष्टि से अपेक्षित उत्पादन
  • ( ख ) कार्य मानक
  • ( ग ) कार्य में लगने वाला समय

कार्य के लिए अपेक्षायें

  • ( क ) शिक्षा एवं प्रशिक्षण
  • ( ख ) कार्य अनुभव
  • ( ग ) निपुणताय
  • ( घ ) शारीरिक एवं मानसिक योग्यतायें

कार्य विश्लेषण के अंग[संपादित करें]

कार्य विश्लेषण के तीन महत्वपूर्ण अंग हो सकते हैं-

  • (१) कार्य विवरण
  • (२) कार्य विशिष्टता
  • (३) कर्मचारी विशिष्टता

कार्य विवरण[संपादित करें]

कार्य विवरण एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो मूल रूप से विवरणात्मक प्रकृति का होता है तथा जिसमें कार्य के निष्पादन हेतु अपेक्षित क्रियाकलापों, कर्तव्यों, उत्तरदायित्वों, कार्य की भौतिक दशाओं तथा उसमें प्रयुक्त यन्त्रा एवं उपकरणों आदि का उल्लेख किया जाता है। यह एक ऐसा लिखित प्रपत्र है, जिसमें दर्शाया जाता है कि कार्य-धारक से अपेक्षित वास्तविक क्रियायें क्या-क्या हैं? इनके निष्पादन में उसे किन साधनों की आवश्यकता होगी? तथा उसके कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व क्या होगें? संक्षेप में यह कह सकते है कि कार्य विवरण यह बताता है कि क्या करना है, कैसे करना है, तथा क्यों करना है? यह प्रत्येक कार्य के मानक निर्धारित करता है।

अच्छे कार्य विवरण की विशेषतायें : कार्य विवरण के अभिलेखन के दौरान निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिएः

1. कार्य विवरण में कार्य की प्रकृति तथा उसके विषय-क्षेत्र का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
2. कार्य विवरण संक्षिप्त, तथ्यपरक एवं सुस्पष्ट होना चाहिये। साथ ही, इसमें कार्य का एक स्पष्ट चित्रण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
3. कार्य विवरण में कार्य के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिये।

कार्य विशिष्टता[संपादित करें]

कार्य विशिष्टता कार्य को संतोषजनक रूप से सम्पादित करने के लिए अपेक्षित मानवीय विशेषताओं का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है। यह कार्य को सफलता सम्पन्न करने हेतु किसी व्यक्ति में आवश्यक पात्रताओं का वर्णन करता है। कार्य विशिष्टता, एक कार्य विवरण की एक तार्किक अपवृद्धि होती है। प्रत्येक कार्य विवरण के लिए, कार्य विशिष्टता का होना वांछनीय होता है। यह संगठन को, एक कार्य विशेष का उत्तरदायित्व देने हेतु किस प्रकार के व्यक्ति की आवश्यकता है, इसका पता लगाने में सहायता प्रदान करता है।

कर्मचारी विशिष्टता[संपादित करें]

कर्मचारी विशिष्टता, मानवीय योग्यताओं अथवा धरित विशेषताओं से सम्बन्धित होता है तथा यह उन पात्रताओं का उल्लेख नहीं करता है, जो कि मानवीय योग्यताओं को सूचित करते है। पात्रता, योग्यताओं का मापन करने का एक मानक है, जो कुछ निश्चित योग्यताओं, निपुणताओं तथा ज्ञान आदि के स्वामित्व का प्रमाणित करता है। अतः कर्मचारी विशिष्टता एक कार्य के लिए एक पद-धारक की न्यूनतम अपेक्षित पात्रताओं, जैसे-शारीरिक, शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक आदि का एक विवरण है, जो भावी कर्मचारी से कार्य सम्पन्न करने के लिए न्यूनतम मानवीय योग्यताओं (जैसा कि कार्य विशिष्टता में उल्लिखित किया गया है) ये युक्त होने की अनिवार्यता का वर्णन करता है।

एक पद को भरने के लिए किस प्रकार के व्यक्ति की आवश्यकता है, यह ज्ञात करने की उद्देश्य से कार्य विशिष्टता की सूचनाओं को, कर्मचारी विशिष्टता की सूचनाओं में परिवर्तित करना आवश्यक है। कर्मचारी विशिष्टता एक लोकप्रिय 'उत्पादन नाम' के सामन होता है, जो यह परिणाम निकालता है कि एक विशेष कर्मचारी विशिष्टता से युक्त अभ्यर्थी, कार्य विशिष्टता के अन्तर्गत उल्लिखित मानवीय योग्यताओं से प्रायः युक्त है। उदाहरण के लिए एम.बी.ए. की शैक्षिक योग्यता से युक्त अभ्यर्थी सामान्यतः प्रबन्धन की अवधारणाओं को जानता है तथा प्रबन्धकीय निपुणताओं, जैसे- विश्लेषण करने की निपुणता, निर्णय-निर्माण की निपुणता, व्याख्या करने की निपुणता तथा अन्तर्वैयक्तिक निपुणताओं को धारण करता है। फिर भी इस मान्यता की प्रमाणिकता की जाँच चयन परीक्षा तथा अन्य प्रविधियों के माध्यम से की जा सकती है। कर्मचारी विशिष्टता, एक कार्य विशेष के लिए अभ्यर्थियों की विशेष श्रेणी के औचित्य का पता लगाने में उपयोगी होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]