कामदगिरि

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
कामदगिरि (चित्रकूट)
कामदगिरि की परिक्रमा
कामतानाथ की परिक्रमा
गिरि

कामदगिरि , चित्रकूट तीर्थ स्थल का सबसे प्रमुख अंग है और सभी श्रद्धालु-यात्री कामदगिरि की परिक्रमा अवश्य करते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा इसकी परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कामदगिरि के मुख्य देव भगवान कामता नाथ[1] हैं।

भौगोलिक स्थिति[संपादित करें]

यह उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सतना जिले की सीमा पर स्थित है। कामदगिरि का कुछ भाग उत्तर प्रदेश [2]में और कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश में आता है। इसलिए कानून व्यवस्था दोनों प्रदेश अपने-अपने क्षेत्र में सम्हालते हैं। [3]कानपुर सेंट्रल स्टेशन से चित्रकूट धाम (कर्वी ) रेलवे स्टेशन की दूरी २१३ किलोमीटर है।[4]

पौराणिक महत्व[संपादित करें]

इसके दर्शन और परिक्रमा मात्र से दर्शनार्थी -श्रद्धालु के सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। इसीलिये इसे कामदगिरि कहते हैं। इस गिरिराज का यों तो महत्व अनादिकाल से चला आ रहा है लेकिन भगवान राम द्वारा वनवास अवधि में लघु भ्राता लक्ष्मण और जनक नंदिनी सीता के साथ यहां प्रवास करने पर इसकी महत्ता और बढ़ गयी।

मेला[संपादित करें]

वैसे तो पूरे वर्ष यहां दर्शनार्थियों का आवागमन लगा रहता है लेकिन चैत्र मास में रामनवमी, दीपमालिका और प्रति मास की अमावस्या को यहां लगने वाले मेले के अवसर पर अत्यधिक भीड़ होती है।

कामदगिरि परिक्रमा[संपादित करें]

चित्रकूट का सबसे महत्वपूर्ण स्थान कामदगिरि है। रामघाट से स्नान करने के बाद अधिकतर लोग कामदगिरि के मुख्य दरवाजे पर आते हैं और यहीं से परिक्रमा प्रारम्भ करते हैं। यात्रा रामघाट से प्रारम्भ होती है। रामघाट वह घाट है जहां प्रभु राम नित्य स्नान करते थे। मन्दाकिनी और पयस्विनी के संगम स्थल रामघाट पर ही श्री राम ने अपने पिता दशरथ का पिंडदान किया था। यह वही प्रसिद्द घाट है जिसके बारे खा गया है कि :

  • चित्रकूट के घाट पर भई सन्तन की भीड़ ,तुलसीदास चन्दन घिसें तिलक दे रघुवीर।

चित्रकूट आने वाले श्रद्धालु कामदगिरि पर्वत की पांच किलोमीटर की परिक्रमा कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। इसी पर्वत के तल पर कामतानाथ का मंदिर स्थित विध्य पर्वत पर हनुमान धारा में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है कहा जाता है की यह धारा श्रीराम ने लंका दहन से आये हनुमान के आराम के लिए बनवाई थी। हनुमान धारा के ऊपर सीता रसोई है।

परिक्रमा मार्ग[संपादित करें]

कामदगिरि के चारों ओर पक्का परिक्रमा मार्ग बना हुआ है। इस मार्ग की परिमाप लगभग ५ किलोमीटर है। परिक्रमा मार्ग के चारों ओर अनेक देवालय बने हुए हैं जिनमें राममुहल्ला , मुखारविन्दु , सखी गोपाल , भारत-मिलाप (चरण-पादुका ) एवम पीली कोठी अधिक महत्वपूर्ण हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.jagran.com/uttar-pradesh/chitrakoot-11346792.html
  2. http://chitrakoot.nic.in/#
  3. "Stampede in Chitrakoot 11582179". Jagran.com. 2014-08-26. अभिगमन तिथि 2016-08-22.
  4. http://indiarailinfo.com/search/kanpur-central-cnb-to-chitrakutdham-karwi-cktd/452/0/483