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कान के प्रिंट

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कान के प्रिंट का विश्लेषण न्यायालयिक विज्ञान में बहुत ही महत्वपूर्ण उपकरण जो की मनुष्य की पहचान करने में अत्यधिक सहायता करता है। कान के प्रिंट विश्वसनीय तरीका है किसी भी इंसान को पहचाने के लिए और यह उंगलियों की छाप की तरह हर एक इंसान में अलग-अलग होते हैं। यह उपकरण मनुष्य की पहचान करने में १९वीं शताब्दी से इस्तेमाल हो रहा है। कान मानव में भ्रूण के समय में ही बन जाता है और उसका आकार और प्रिंट पूरी उम्र एक सामान ही रहते हैं।[1] कान की छाप बहुत से अपराधों में देखने को मिलते है जैसे कि चोरी के अपराध में, सेंध के अपराध में, मारकर भागने के अपराध में आदि। ऐसे अपराधों में कान के प्रिंट मिलते है जो कि दरवाजे पर, किसी खिड़की पर, शीशे पर या फिर किसी दिवार पर पाए जाते हैं। कान के प्रिंट उनके द्वारा निकले फैट और वैक्स द्वारा बनते है जो की हर इंसान में अलग- अलग मात्र में पाए जाते हैं। कान के प्रिंट की जांच कान के आकर में उपस्थित हेलिक्स, एंटीहेलिक्स, एंटीरियर नौच, कान की लोब, एंटीरैगुस, क्रक्स की हेलिक्स की पहचान के द्वारा किया जाता है। कान के प्रिंट विकसित पाउडर की सहायता से लिये जाते है और कुछ रासायनिक एजेंट भी इस्तेमाल किए जाते हैं।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Berbell, Carlos (2005). CSI: casos reales españoles (in Spanish). La Esfera de los Libros. ISBN 9788497343510.
  2. Curiel López de Arcautea, A.M.; Granell Navarro, J. (August 2006). "La huella de oreja como método de identificación" [Ear Print as an Identification Method] (PDF). Acta Otorrinolaringológica Española. 57 (7): 329–332.