कानीवाड़ा हनुमान मंदिर
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कनीवाड़ा हनुमान मंदिर राजस्थान के जालौर में स्थित एक ऐतिहासिक और चमत्कारी मंदिर है ।[1][2][3]

800 साल पुराना यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है, जिसमें एक दिव्य मूर्ति भी शामिल है, जो भक्तों के अनुसार, रहस्यमय तरीके से बढ़ती है और एक दलित परिवार जो पीढ़ियों से इसके पुजारी के रूप में सेवा करता आ रहा है।[4][5]और कानीवाड़ा हनुमान जी में मुख्य पुजारी के रूप में महाराज यशपाल गर्ग का आता है
इतिहास
[संपादित करें]स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित नहीं की गई थी, बल्कि खुदाई के दौरान धरती से निकली थी, इसलिए इसे "पातालेश्वर हनुमानजी" भी कहा जाता है। यह गाँव कभी कानी-पाताल नगर के नाम से जाना जाता था।[6]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "800 साल पुराना है जालोर का यह हनुमान मंदिर, आस्था और चमत्कार का है संगम, सामाजिक एकता का भी है प्रतीक". News18 हिंदी. 13 अप्रैल 2025 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2025-11-15.
- ↑ डेस्क, डीएनए हिंदी वेब. "Hanuman Mandir Jalore: राजस्थान के इस हनुमान मंदिर की कभी नहीं बन सकी छत, जानें क्यों ?". DNA Hindi. अभिगमन तिथि: 2025-11-15.
- ↑ Sharma, Dharmendra (2023-08-04). "Jalore में कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान". aapkarajasthan.com. अभिगमन तिथि: 2025-11-15.
- ↑ "कानीवाड़ा का 800 साल पुराना चमत्कारी हनुमानजी मंदिर, जानिए किस दिन पूरी होती है मनोकामना". Patrika News. अभिगमन तिथि: 2025-11-15.
- ↑ Live, A. B. P. (2023-02-08). "कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान". ABP News. अभिगमन तिथि: 2025-11-15.
- ↑ "Hanuman Temple: यहां बिना छत के रहते हैं हनुमान, खौफनाक किस्से से जुड़ी है कथा | jalore hanuman temple story". Herzindagi. अभिगमन तिथि: 2025-11-15.