काकविन
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काकविन प्राचीन जावा और बाली के कावी भाषा में लिखे काव्य को कहते हैं। काकविन ८वीं से १९वीं शताब्दी तक लिखे गये। [1]
यह वेद, पुराण, इतिहास की कथाओं से सम्बन्धित हैं। इनमें इंदोनेशिया के रामायण और महाभारत के भी रूपान्तर मिलते हैं। काकविन में प्रयुक्त छन्द संस्कृत काव्य के छन्दों से व्युत्पन्न हैं।
यद्यपि काकविन की कथावस्तु एवं पात्र आदि संस्कृत में उपलब्ध हिन्दू गन्थों जैसे ही हैं किन्तु उनके घटनास्थल जावा और बाली द्वीपों के ही हैं। ये काव्य जावा और बाली के तत्कालीन समाज के बारे में अत्यन्त सम्पन्न स्रोत हैं। [2]
प्रसिद्ध काकविन
[संपादित करें]- शिवगृह लेख, 856
- काकविन रामायण ~ 870
- काकविन अर्जुनविवाह, by mpu कण्व यवकवि, ~ 1030
- काकविन कृष्णायण
- काकविन स्मरदहन
- काकविन भोमकाव्य
- काकविन भारतयुद्ध, by mpu Sedah and mpu Panuluh, 1157
- काकविन हरिवंश
- काकविन घटोट्कचाश्रय
- काकविन वृत्तायण
- काकविन ब्रह्माण्डपुराण
- काकविन कुंजरकर्ण, by mpu "Dusun"
- काकविन नगरकृतागम
- काकविन देशवर्णन, by mpu प्रपंच, 1365
- काकविन अर्जुनविजय, by mpu तन्तुलर
- काकविन सुतसोम, by mpu Tantular
- काकविन शिवरात्रिकल्प/काकविन लुब्धक
- काकविन पार्थयज्ञ
- काकविन नीतिशास्त्र
- काकविन धर्मशून्य
- काकविन हरिश्रय
- काकविन सुमनशान्तक (१३वीं शताब्दी)
पठनीय
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Taylor, Jean Gelman (2003). Indonesia: Peoples and Histories. New Haven and London: Yale University Press. pp. 32–33. ISBN 0-300-10518-5.
- ↑ http://coombs.anu.edu.au/SpecialProj/APM/TXT/creese-h-02-96.html Archived 5 March 2011 at the Wayback Machine Helen Creese, "Temples of Words: Balinese Literary Traditions", Asia-Pacific Magazine, No. 2 May 1996, pp. 38-43