कालीन चित्रकारी


कालिन चित्रकारी वस्त्र कला का एक अनोखा रूप है जिसे पारंपरिक करघे पर हाथ से बुना जाता था। इसका उद्देश्य सिर्फ सुंदर आकृति बनाना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक घटनाओं को चित्र या दृश्य के माध्यम से प्रस्तुत करना होता था। कालिन चित्रकारी में मखमली कपड़े पर छोटी छोटी आकृति की जाती थी, पुरी तरह से उकेरने के बाद इसे अक्सर दीवारों पर लंबवत लटका दिया जाता था, या कभी-कभी मेज़, बिस्तर और अन्य स्थानों पर क्षैतिज रूप से सजाया जाता था। कुछ कालखंडों में छोटे, लंबे और संकरे कालिन बनाए जाते थे, जिन्हें वस्त्रों के किनारों पर सजावट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। बुनकर मुख्य रूप से प्राकृतिक ताने के धागों जैसे ऊन, मखमल या सूत्रों का प्रयोग करते थे। धागों में कभी-कभी रेशम, सोना, चाँदी या अन्य सजावटी रत्नों का प्रयोग किया जाता था। इस कला में सौंदर्य और तकनीकी कुशलता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। [1]
शब्द व्युत्पत्ति
[संपादित करें]टेपेस्ट्री शब्द की उत्पत्ति प्राचीन फ्रांसीसी शब्द टेपिसरी से हुई है, जो टेपिसर से आया है, जिसका अर्थ है "भारी कपड़े से ढंकना या कालीन।" यह शब्द फ्रांसीसी भाषा के टैपिस से लिया गया है, जिसका अर्थ है "भारी कपड़ा" और यह लैटिन टेप्स से आया, जो ग्रीक τάπης (tapēs; जनरल: τάπητος, tapetos) का लैटिन रूप है, अर्थात "कालीन या गलीचा।" इस शब्द का सबसे पहला प्रमाणित रूप माइसीनियन ग्रीक 𐀲𐀟𐀊 (ता-पे-जा) है, जो 'बी' रेखा में अंकित किया गया था।[2] कालिन चित्रकारी के इतिहास और शब्दोत्पत्ति से इसका प्राचीन वस्त्र कला की परंपरा से गहरा संबंध स्पष्ट होता है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ वी॰ व ए॰ मैलेट, मार्ला; "बुनियादी आदिवासी और ग्रामीण बुनाई" Archived 2017-07-07 at the वेबैक मशीन.
- ↑ "(ता-पे-जा) को बी रेखा में अंकित किया गया।ta-pe-ja". पैलियोलेक्सिकॉन. प्राचीन भाषाओं के लिए शब्द अध्ययन उपकरण।.