कस्तूरी

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मोस्खस मोस्खिफेरस, साइबेरियाई कस्तूरी मृग

कस्तूरी नाम मूलतः एक ऐसे पदार्थ को दिया जाता है जिसमें एक तीक्ष्ण गंध होती है और जो नर कस्तूरी मृग के पीछे/गुदा क्षेत्र में स्थित एक ग्रंथि से प्राप्त होती है। इस पदार्थ को प्राचीन काल से इत्र के लिए एक लोकप्रिय रासायनिक पदार्थ के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है और दुनिया भर के सबसे महंगे पशु उत्पादों में से एक है। यह नाम, संस्कृत के से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है "अंडकोष," यह लगभग समान गंध वाले एक व्यापक रूप से विविध विभिन्न पदार्थों के आस पास घूमता है हालांकि इनमें से कई काफी अलग रासायनिक संरचना वाले हैं। इनमें कस्तूरी हिरण के अलावा अन्य जानवरों के ग्रंथि स्राव, समान खुशबू बिखेरने वाले पौधे और ऐसी ही खुशबू वाली कृत्रिम पदार्थ शामिल है।[1][2]

19वीं सदी के उतरार्ध तक, प्राकृतिक कस्तूरी का इस्तेमाल इत्र में बड़े पैमाने पर तब तक किया जाता रहा जब तक की आर्थिक और नैतिक इरादों ने सिंथेटिक कस्तूरी को अपनाने की दिशा नहीं दिखाई, जो लगभग विशेष रूप से उपयोग किया जाता है।[3] कस्तूरी की विशेष गंध के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार जैविक यौगिक म्स्कोने है।

प्राकृतिक कस्तूरी फली का आधुनिक उपयोग अब केवल पारंपरिक चीनी दवा तक सीमित है।

प्राकृतिक स्रोत[संपादित करें]

कस्तूरी मृग[संपादित करें]

"कस्तूरी बिल्ली", होरट्स सैनीटाटीस से वूडकट, 1490

कस्तूरी मृग मोस्खेडाए परिवार का सदस्य है और यह नेपाल, भारत, पाकिस्तान, तिब्बत, चीन, साइबेरिया, और मंगोलिया में पाया जाता है। कस्तूरी को प्राप्त करने के लिए, हिरण को मार डाला जाता है और उसकी ग्रंथि जिसे "कस्तूरी फली" भी कहा जाता है को निकाल दिया जाता है। सूखने पर, कस्तूरी फली के अंदर भूरे लाल लसदार मिश्रण काले दानेदार सामग्री में बदल जाते हैं जिसे "कस्तूरी दाने" कहते हैं और जिसे इसके बाद शराब से भरा जाता है। काफी पतला किए जाने पर ही मिलावट की सुगंध एक सुखद गंध प्रदान करती है। किसी भी अन्य प्राकृतिक पदार्थ के साथ इतने सारे विरोधाभासी विवरण के साथ ऐसी जटिल सुगंध नहीं जुड़ी है; हालांकि, इसे आमतौर पर सिद्धांत रूप में पशु वाली, मिट्टी के जैसी और लकड़ी के जैसी या बच्चे की त्वचा के गंध से मिलती हुई गंध[4] के रूप में वर्णित किया जाता है[3].

कस्तूरी अपने खोज के समय से कई इत्रों में एक महत्वपूर्ण घटक बनी रही है, जिसका उपयोग इत्रों को लम्बे समय तक तीव्र बनाये रखने के लिए एक बंधक के रूप में किया जाता है। आज के समय में प्राकृतिक कस्तूरी की व्यापार मात्रा सीआईटीईएस के द्वारा नियंत्रित की गयी है लेकिन अवैध शिकार और व्यापार अभी भी जारी है।[4]

अन्य जानवर[संपादित करें]

ओंडाट्रा ज़िबेथिकस, छछूंदर

कस्तूरी मूषक (ओंडाट्रा ज़िबेथीकस), उत्तरी अमेरिका में निवास करने वाला मूषक है और 17वीं शताब्दी से यह कस्तुरी जैसी गंध वाली एक ग्रंथी पदार्थ छोड़ने के लिए जाना जाता है।[5] 1940 में इसे निकालने एक रासायनिक तरीका निकला गया, लेकिन यह वाणिज्यिक स्तर पर सार्थक साबित नहीं हुआ।[5]

कस्तूरी जैसी गंध वाली ग्रंथि पदार्थ को दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया, के कस्तूरी बतख (बिज़ियुरा लोबाटा), कस्तूरी बैल, कस्तूरी श्रीयु, कस्तूरी बीटल (अरोमिया मोस्काटा), अफ्रीकी सीविट (सीविटिकटीस सीविटा), कस्तूरी कछुआ, सेन्ट्रल अमेरीका के मगरमच्छ और कई अन्य जानवरों में भी पाया जाता है।

मगरमच्छों, में कस्तूरी ग्रंथी की दो जोड़ी होती हैं, एक जोड़ी जबड़े के किनारों पर और दूसरी जोड़ी क्लोअका में होती है।[6] कस्तूरी ग्रंथियां सांपों में भी पाई जाती हैं।

पौधे[संपादित करें]

कुछ पौधों जैसे एंजेलिका आर्चएंजेलिका या अबेलमोस्चस मोस्चेट्स इत्री महक माइक्रोसाइक्लिक लैक्टोन यौगिकों पैदा करते हैं। इन यौगिकों का उपयोग व्यापक रूप इत्रों में पशु कस्तूरी के विकल्प के रूप में किया जाता है या किसी अन्य कस्तुरी के मिश्रण की गंध को बदलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

पौध सूत्रों में शामिल है कस्तूरी फूल मिम्युलस मोस्खाट्स, गुआना और वेस्ट इंडीज, की कस्तूरीलकड़ी (ओलिएरिया अर्गोफिला), और अबेलमोसखस मोस्खाट्स (कस्तूरी बीज) के बीज.

कृत्रिम यौगिक[संपादित करें]

गैलैक्सोलैड, एक पॉलीसाइक्लिक कस्तूरी सामान्यतः कपड़े धोने के डिटर्जेंट में पाया जाता है जो साबुन रसायनों की गंध को ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कपड़ों की धुलाई के बाद उनमें "स्वच्छ खुशबू" छोड़ने वाले कपड़े धोने के साबुन में इस्तेमाल किया जाने वाला सुगंधित यौगिक भी होता है जिसकी उम्मीद रखना उपभोक्ताओं ने सिख लिया है।

चूंकि मृग से कस्तूरी को हासिल करने के लिए उस लुप्त प्राय जानवर को मार डालने की आवश्यकता होती थी, इसीलिए इत्रों में उपयोग की जाने वाली लगभग सभी कस्तूरी आज कृत्रिम होती है, जिसे कभी कभी "सफेद कस्तूरी" कहा जाता है। इन्हें तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है - खुशबूदार नाइट्रो कस्तूरी, पॉलिसाईक्लिक कस्तूरी यौगिक और मैक्रोसाईक्लिक कस्तूरी यौगिक.[3] पहले दो समूहों का उपयोग बहुत बड़े पैमाने पर सौंदर्य प्रसाधन उद्योग से लेकर डिटर्जेंट उद्योग तक किया जाता है। हालांकि, मानव और पर्यावरण के नमूनों पर और साथ ही साथ कार्सिनोजेनिक गुणों पर पहले दो रासायनिक समूहों की पहचान ने इन योगिकों के उपयोग और दुनिया के कई क्षेत्रों में इसके उपयोग पर प्रतिबंध या कमी पर एक सार्वजनिक बहस को शुरू किया। उम्मीद की जाती है की मैक्रोसाइक्लिक कस्तूरी यौगिक इनका स्थान ले लेंगे इन योगिकों को सुरक्षित माना जाता है।[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • एंड्रोस्टेनॉल
  • कस्तूरी मृग

नोट[संपादित करें]

  1. "Merriam-Webster's Online Dictionary: musk". Merriam-Webster. Archived from the original on 20 जनवरी 2008. Retrieved 2007-04-07. Check date values in: |archive-date= (help)
  2. Chantraine, Pierre (1990). Dictionnaire étymologique de la langue grecque. Klincksieck. p. 715. ISBN 2-252-03277-4.
  3. Rimkus, Gerhard G. (Ed.); Cornelia Sommer (2004). "The Role of Musk and Musk Compounds in the Fragrance Industry". Synthetic Musk Fragrances in the Environment (Handbook of Environmental Chemistry). स्प्रिंगर. ISBN 3540437061.CS1 maint: extra text: authors list (link)
  4. Rowe, David J. (Ed.); Philip Kraft (2004). "Chapter 7. Aroma Chemicals IV: Musks". Chemistry and Technology of Flavours and Fragrances. Blackwell. ISBN 084932372X.CS1 maint: extra text: authors list (link)
  5. Groom, Nigel (1997). New Perfume Handbook. स्प्रिंगर. pp. 219–220. ISBN 0751404039.
  6. Wareham, D.C. (2005). Elsevier's Dictionary of Herpetological and Related Terminology. Elsevier Science. p. 129. ISBN 0444518630.

इस लेख की सामग्री सम्मिलित हुई है ब्रिटैनिका विश्वकोष एकादशवें संस्करण से, एक प्रकाशन, जो कि जन सामान्य हेतु प्रदर्शित है।.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]