कविता कृष्णन

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कविता कृष्णन
Kavita Krishnan 02.jpg

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की महासचिव

सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के पालित ब्यूरो की सदस्या

जन्म 1973 (आयु 48–49)[1]
Coonoor, Tamil Nadu[1]
जन्म का नाम कविता कृष्णन
राजनीतिक दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्कसवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन
व्यवसाय राजनेत्री
मानवाधिकार कार्यकर्ता

कविता कृष्णन महिला अधिकारों के लिये कार्य करने वाली महिला हैं जिन्होंने 2012 के दिल्ली के सामूहिक बलात्कार मामले के बाद महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या को प्रभावशाली ढंग से उठाया है। [2]

कृष्णन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के पोलित ब्यूरो की सदस्य भी थीं। वे दो दशकों से अधिक समय तक इसकी केंद्रीय समिति की भी सदस्य थीं। वह भाकपा (माले) लिबरेशन के मासिक प्रकाशन, लिबरेशन [3] की संपादिका और एआईपीडब्ल्यूए की सचिव भी थीं। [4]

आरम्भिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत जीवन[संपादित करें]

कविता कृष्णन का जन्म तमिलनाडु के कुन्नूर में हुआ था किन्तु वह भिलाई (छत्तीसगढ़) में पली-बढ़ीं। उनके पिता वहाँ एक इस्पात कारखाने में इंजीनियर के रूप में काम करते थे और उनकी माँ अंग्रेजी पढ़ाती थीं। उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीए पूरा किया। कृष्णन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमफिल प्राप्त किया।

आरम्भिक सक्रियता[संपादित करें]

कविता कृष्णन, सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई (मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज) में अरुण फरेरा के नेतृत्व में एक थिएटर समूह का हिस्सा बनीं और नुक्कड़ नाटकों और विरोध प्रदर्शनों में भाग लेंगी। राजनीतिक सक्रियता के साथ उनका गंभीर कार्यकाल तब हुआ जब उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वहाँ उन्होंने अपनी मास्टर डिग्री हासिल की और 1995 में छात्र संघ की संयुक्त सचिव चुनी गईं। जेएनयू में शिक्षा के समय वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की सदस्य थीं। [5] जब वह छात्र नेता चंद्रशेखर प्रसाद से मिलीं, जो जेएनयू में छात्र थे और आइसा के सदस्य थे, तो वह ऐक्टिविज्म से गंभीर रूप से जुड़ गयीं। चन्द्रशेखर की हत्या से कविता कृष्णन के जीवन ने एक गंभीर मोड़ ले लिया। चंद्रशेखर, जो कृष्णन के संयुक्त सचिव चुने जाने से एक साल पहले जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष थे, उन्होंने सबसे पहले उनके जुनून को पहचाना और उन्हें महिलाओं के अधिकारों के लिए पूर्णकालिक काम करने का सुझाव दिया। [6] चन्द्रशेखर की हत्या के बाद, जेएनयू के हजारों छात्रों ने राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों में भाग लिया। [7] कविता भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन में सम्मिलित थीं। वहाँ बिहार भवन में लालू यादव के लोगों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था। [8] विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण कविता को आठ दिन जेल में बिताना पड़ा। [9] [10]

निर्भया हत्याकाण्ड के विरोध प्रदर्शन में भूमिका[संपादित करें]

भारत की राजधानी नई दिल्ली में 23 वर्षीय लड़की के बलात्कार और हत्या के बाद बड़े पैमाने पर बलात्कार विरोधी प्रदर्शन हुए। इसमें कविता सबसे प्रभावशाली कार्यकर्ता के रूप में उभरीं। [11] इस आन्दोलन को सही दिशा देने में कविता कृष्णन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन में उनके द्वारा दिए गए भाषणों में से एक भाषण यू-ट्यूब पर तेजी से वायरल हो गया [12] और अब तक 60,000 से अधिक बार देखा जा चुका है। इस भाषण में, उन्होंने आंदोलन का एक प्रकार का घोषणापत्र रखा, जो उस समय प्रचलित सुरक्षावादी, संरक्षणवादी दृष्टिकोण से एक बड़े विराम का प्रतिनिधित्व करता था। इसमें मुख्य मांग महिलाओं की स्वतंत्रता थी। [13] [14] इस भाषण में, उन्होंने प्रचलित आम धारणा के खिलाफ यह तर्क दिया कि मृत्युदण्ड बलात्कार का समाधान है। उन्होंने कहा कि भारत में बलात्कार के लिए दोषसिद्धि दर बेहद कम है और इसलिए रासायनिक बधियाकरण और मृत्युदंड जैसे तरीके निवारक के रूप में कार्य नहीं कर सकते। उन्होंने महिलाओं की "बिना शर्त स्वतंत्रता" और "बिना भय के स्वतंत्रता" के आधार पर बहस करने के लिए एक मजबूत मामला बनाया। मृत्युदंड पर उनके ये विचार बलात्कार सम्बन्धी विमर्श को आकार देने में प्रभावशाली रहे हैं। [15] [16] [17] " बिना भय के स्वतन्त्रता " की मांग बलात्कार विरोधी प्रदर्शनकारियों के लिए एक रैली का बिंदु बन गई, और "स्वतन्त्रता पर कविता कृष्णन के विचार बड़े पैमाने पर प्रकाशित हुए। [18] [19] [20] [21] [22]

उत्पीड़न[संपादित करें]

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था,

"ये ट्रोल ... जो नियमित रूप से मुझे लक्ष्य करके किये जा रहे हैं, मेरी त्वचा के रंग पर किये जा रहे हैं, मेरे रूप को लेकर किये जा रहे हैं, वे कह रहे हैं कि मैं बलात्कार के लायक नहीं हूँ, वे बता रहे हैं कि मेरे साथ किस तरह की यातना और कैसा बलात्कार किय जाना चाहिये, मुझे बता रहे हैं कि मुझे किस तरह के पुरुषों के साथ सोना चाहिए ... और आगे इसी तरह के अनेकानेक ट्रोल... " [23]

भाकपा (माले) से छुटकारा[संपादित करें]

1 सितंबर 2022 को एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से कविता ने घोषणा की कि भाकपा (माले) लिबरेशन ने उनके अनुरोध पर उन्हें सभी पार्टी पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है, तथापि वह पार्टी की सदस्य बनी रहेंगी। इसे चीन से जुड़े मुद्दों सहित विभिन्न मुद्दों पर नेतृत्व के साथ उनके मतभेदों के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। ध्यतव्य है कि इससे पहले कुछ महीने से कविता ने प्रायः समाजवादी और साम्यवादी शासनों की आलोचना करने लगी थीं। [24][25] [26]

विविध कार्य[संपादित करें]

उन्होंने "फियरलेस फ्रीडम" नाम से मई 2020 में एक पुस्तक का प्रकाशन किया।

फियरलेस फ्रीडम का विशेष स्वागत "वोमेन्स वेब" नामक एक भारतीय वेबपोस्ट द्वारा किया गया। लेखक पीयूष वीर इस बारे में कहते हैं कि फियरलेस फ्रीडम स्वीकार करती है कि, 'घर में कैद होना भी स्वयं हिंसा का एक रूप है ।' [27]

ऐश्वर्या भट ने "द सोसाइटी एंड कल्चर इन साउथ एशिया" नामक जर्नल में फियरलेस फ्रीडम की समीक्षा की ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "The Mass Mobiliser". मूल से 12 दिसंबर 2015 को पुरालेखित.
  2. Kumar, Sanjay. "Interview with Kavita Krishnan". The Diplomat. मूल से 23 May 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 May 2014.
  3. "CPI (ML) Liberation | Links International Journal of Socialist Renewal". links.org.au. मूल से 3 March 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2016-02-22.
  4. "AIPWA blog". AIPWA. मूल से 31 May 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 May 2014.
  5. Iqbal, Naveed. "The making of an activist". The Indian Express. मूल से 2 July 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  6. Bazliel, Sharla. "Kavita Krishnan on Delhi gangrape". India Today. मूल से 12 December 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  7. Staff Reporter (2012-03-24). "Three sentenced to life in Chandrasekhar murder case". The Hindu. मूल से 27 February 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  8. Joshi, Rajesh. "Red Island Erupts". Outlook. मूल से 4 April 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  9. Krishnan, Kavita. "Tongueless in Tihar". Tehelka. मूल से 2 April 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  10. "INDIA: Student leader arrested for 1997 protest". Green Left Weekly. 2016-09-05. मूल से 23 October 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  11. Ray, Tinku. "NPR Blogs". NPR. मूल से 21 March 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  12. "Kavita Krishnan, Secretary of the All India Progressive Women's Association (AIPWA)". YouTube. मूल से 28 March 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  13. "Freedom Without Fear Is What We Need To Protect, To Guard And Respect". Tehelka. मूल से 8 May 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  14. "View Point: Kavitha Krishnan, Sheila Dixit and this rape culture". The Alternative. मूल से 2 April 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  15. Jha, Nishita. "An Interview With Kavita Krishnan". Tehelka. मूल से 17 October 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 March 2015.
  16. "'On the death penalty for rape' Kavita Krishnan". Death Penalty Research Project, NLU. मूल से 2 April 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  17. Sandhu, Veenu (2012-12-29). "Interview with Kavita Krishnan". Business Standard India. मूल से 2 April 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  18. Gupta, Rahila. "Women demand freedom, not surveillance - An Interview With Kavita Krishnan". Open Democracy. मूल से 17 October 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  19. Rao, Dipanjali (2014-07-09). "Freedom without fear". Indian Link. मूल से 2 April 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  20. "Rapists fear women's freedom; convene Parliament to pass bills on sexual violence: protester Kavita Krishnan". IBN Live. मूल से 7 November 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  21. Banerjee, Poulomi (2015-03-08). "Our right to pleasure is always ignored: Kavita Krishnan". IBN Live. मूल से 26 March 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  22. Krishnan, Kavita. "Patriarchy, Women's Freedom and Capitalism: Kavita Krishnan". IBN Live. मूल से 21 March 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 March 2015.
  23. Godin, Melissa. "From Threats of Gang Rape to Islamophobic Badgering, Indian Women Politicians Face High Levels of Online Abuse, Says Repor". Time Magazine. अभिगमन तिथि 24 January 2020.
  24. कविता कृष्णन ने कम्युनिस्ट पार्टी के सभी पदों को छोड़ा, रूस और चीन पर पूछे सवाल
  25. Staff, Scroll. "Kavita Krishnan quits all posts in CPI(M-L) after calling Soviet regime, China autocratic". Scroll.in (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2022-09-03.
  26. Sharma, Unnati (2022-09-02). "'Left not fully consistent, coherent about democracy', says Kavita Krishnan after CPI(M-L) exit". ThePrint (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2022-09-03.
  27. Vir, Piyusha (16 March 2020). "Kavita Krishnan On Why Women's Safety Shouldn't Mean A Patriarchal Control Of Their Lives". Womensweb.in. अभिगमन तिथि 3 April 2022.