कला आलोचना

कला आलोचना दृश्य कला की चर्चा या मूल्यांकन है।[1] कला समीक्षक आमतौर पर सौन्दर्यशास्त्र या सौंदर्य के सिद्धांत के संदर्भ में कला की आलोचना करते हैं। कला आलोचना का लक्ष्य कला मूल्यांकन के लिए तर्कसंगत आधार की खोज करना है लेकिन यह संदिग्ध है कि क्या ऐसी आलोचना प्रचलित सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों से परे जा सकती है।[2]
कलात्मक आंदोलनों की विविधता के परिणामस्वरूप कला आलोचना विभिन्न विषयों में विभाजित हो गई है जो अपने निर्णय के लिए भिन्न-भिन्न मानदंडों का उपयोग करते हैं। आलोचना के क्षेत्र में सबसे आम विभाजन ऐतिहासिक आलोचना और मूल्यांकन तथा जीवित कलाकारों के कार्यों की समकालीन आलोचना के बीच है।
इतिहास
[संपादित करें]कला की आलोचना संभवतः कला की उत्पत्ति के साथ ही शुरू हुई जैसा कि प्लेटो, वित्रुवियस या हिप्पो के ऍगस्टीन आदि की कृतियों में पाए जाने वाले पाठों से पता चलता है जिनमें कला आलोचना के प्रारंभिक रूप मौजूद हैं।[3]
उत्पत्ति
[संपादित करें]लेखन की एक विधा के रूप में कला आलोचना ने अपना आधुनिक रूप 18वीं शताब्दी में प्राप्त किया। कला आलोचना शब्द का सबसे पहला प्रयोग अंग्रेजी चित्रकार जोनाथन रिचर्डसन ने 1719 में अपनी कृति एन एसे ऑन द होल आर्ट ऑफ क्रिटिसिज्म में किया था। इस कार्य में उन्होंने कलाकृतियों की रैंकिंग के लिए एक वस्तुनिष्ठ प्रणाली बनाने का प्रयास किया।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "आर्ट क्रिटिसिज्म". नॉर्थ टेक्सास इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेटर्स ऑन द विजुअल आर्ट्स. 10 फरवरी 2013. मूल से पुरालेखन की तिथि: 10 फ़रवरी 2013. अभिगमन तिथि: 24 जनवरी 2025.
{{cite web}}: CS1 maint: bot: original URL status unknown (link) - ↑ कापलान, मार्टी (23 जनवरी 2014). "द क्यूरियस केस ऑफ क्रिटिसिज्म". जेविश जर्नल. अभिगमन तिथि: 24 जनवरी 2025.
- ↑ एल्किन्स, जेम्स (1996). "आर्ट क्रिटिसिज्म". ग्रोव डिक्शनरी ऑफ आर्ट. अभिगमन तिथि: 24 जनवरी 2025.