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छह कलीमे

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(कलमा से अनुप्रेषित)

छह कलिमा: जिसे इस्लामी छह वाक्यांशों (प्रार्थनाएँ, दुआएँ) के रूप में भी जाना जाता है। दक्षिण एशियाई मुसलमानों द्वारा पढ़े या सुनाए जाते हैं। कलिमा बच्चों के लिए आसान याद और सीखने की सुविधा के लिए अस्तित्व में आए और इन्हें हदीसों से लिया गया है।[1].[2] छह कलिमाओं को सीखने का महत्व विवादित है, कुछ लोग उन्हें याद रखने के लिए आवश्यक वाक्यांश मानते हैं और अन्य तर्क देते हैं कि वे कुरआन में मौजूद नहीं हैं या मुहम्मद द्वारा प्रमाणित नहीं हैं।

कलिमा या कलमा

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  • इस्लाम में वो स्वीकार्य वाक्य जो प्रायः धर्म में विश्वास और आस्था को सुनिश्चित करने के लिए बोला जाए, मुसलमानों का धर्ममंत्र, जैसे पहला कलिमा : ला-इलाहा इल्लल-लाह मुहम्मदुर रसुलुल्लाह[3] [अनुवाद:अल्लाह के सिवा कोई माबूद (पूज्य) नहीं और हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं][4]
  • शहादा: इस्लामिक पंथ एकेश्वरवाद अर्थात अल्लाह एक और मुहम्मद के पैगंबर होने में विश्वास की घोषणा

अंतर्वस्तु

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छह कलिमे
आदेश अरबी अर्थ लिप्यंतरण ऑडियो
1.

كَلِمَاتْ اَلطَّيِّبَة

पहला कलमा तय्यब (पवित्रता का शब्द शहादा

لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ مُحَمَّدٌ رَّسُولُ ٱللَّٰهِ अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम अल्लाह के  रसूल है।][5][6] ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह
2.

كَلِمَاتْ اَلشَّهَادَة दूसरा कलमा शहादत (गवाही के शब्द)

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ अल्लाह (ईश्वर) के अलावा कोई पूज्य नहीं है, मुहम्मद अल्लाह (ईश्वर) के दूत हैं । अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीका लहु व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु सुनें
3.

كَلِمَاتْ اَلتَّمْجِيدْकलिमा तमजीद (ज़िक्र के लायक़)

سُبْحَانَ ٱللَّٰهِ وَٱلْحَمْدُ لِلَّٰهِ وَلَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ وَٱللَّٰهُ أَكْبَرُ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِٱللَّٰهِ ٱلْعَلِيِّ ٱلْعَظِيمِ "अल्लाह पवित्र है, सारी तारीफ अल्लाह के लिए है, कोई सच्चा माबूद नहीं सिवाय अल्लाह के, और अल्लाह सबसे बड़ा है।" सुब्हानल्लाही वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इलल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हौल वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अज़ीम सुनें
4.

كَلِمَاتْ اَلتَّوْحِيدْ चौथा कलमा तौहीद)

لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ أَبَدًا أَبَدًا، ذُو ٱلْجَلَالِ وَٱلْإِكْرَامِ بِيَدِهِ ٱلْخَيْرُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ "कोई सच्चा माबूद नहीं सिवाय अल्लाह के, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, उसी का राज्य है, उसी की प्रशंसा है, वह जीवन देता है और मृत्यु देता है, और वह सदा जीवित है, जो कभी नहीं मरता।" "ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीका लहु, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु युहयी व युमीत व हु व हय्युल ला यमूत अबदन अबदा" सुनें
5.

كَلِمَاتْ إِسْتِغْفَارْ पांचवाँ कलमा इस्तिग़फ़ार)

أَسْتَغْفِرُ ٱللَّٰهَ رَبِّي مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ أَذْنَبْتُهُ عَمَدًا أَوْ خَطَأً سِرًّا أوْ عَلَانِيَةً وَأَتُوبُ إِلَيْهِ مِنَ ٱلذَّنْبِ ٱلَّذِي أَعْلَمُ وَمِنَ ٱلذَّنْبِ ٱلَّذِي لَا أَعْلَمُ، إِنَّكَ أَنْتَ عَلَّامُ ٱلْغُيُوبِ وَسَتَّارُ ٱلْعُيُوْبِ وَغَفَّارُ ٱلذُّنُوبِ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِٱللَّٰهِ ٱلْعَلِيِّ ٱلْعَظِيمِ “मै अपने परवरदिगार (अल्लाह) से अपने तमाम गुनाहो की माफ़ी मांगता हुँ जो मैंने जान-बूझकर किये या भूल-चूक मे किये, छिप कर किये या खुल्लम-खुल्ला किये और तौबा करता हूँ मैं उस गुनाह से, जो मैं जनता हूँ और उस गुनाह से भी जो मैं नहीं जानता. या अल्लाह बेशक़ तू गैब कि बाते जानने वाला है और ऐबों को छिपाने वाला है और गुनाहो को बख्शने वाला है, (हम मे) गुनाहो से बचने और नेकी करने की ताक़त नहीं अल्लाह के बगैर जो के बोहोत बुलंदी वाला है” “अस्तग़फिरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्ली ज़म्बिन अज्नब्तुहू अमदन अव खता अन सिर्रन अव अलानियतन व अतूबू इलैह मिनज़ ज़म्बिल लज़ी आलमु व मिनज़ ज़म्बिल लज़ी ला आलमु इन्नका अंता अल्लामुल गूयूबी व सत्तारिल उयूबी व गफ्फारिज़ ज़ुनूबी वला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम” सुनें
6.

كَلِمَاتْ رَدّْ اَلْكُفْرْ छठवां कलमा रद्दे कुफ्र (अविश्वासकी अस्वीकृति का शब्द ")

ٱللَّٰهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ أَنْ أُشْرِكَ بِكَ شَيْءً وَأَنَا أَعْلَمُ بِهِ وَأَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا أَعْلَمُ بِهِ تُبْتُ عَنْهُ وَتَبَرَّأَتُ مِنَ ٱلْكُفْر وَٱلشِّرْكِ وَٱلْكِذْبِ وَٱلْغِيبَةِ وَٱلْبِدْعَةِ وَٱلنَّمِيمَةِ وَٱلْفَوَاحِشِ وَٱلْبُهْتَانِ وَٱلْمَعَاصِي كُلِِّهَا وَأَسْلَمْتُ وَأَقُولُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ ٱللَّٰهِ “ऐ अल्लाह में तेरी पन्हा मांगता हूँ इस बात से के में किसी शेय को तेरा शरीक बनाऊ जान बूझ कर और बख्शीश मांगता हूँ तुझ से इस (शिर्क) की जिसको में नहीं जानता और मेने इससे तौबा की और बेज़ार हुआ कुफ्र से और शिर्क से और झूट से और ग़ीबत से और बिदअत से और चुगली से और बेहयाओं से और बोहतान से और तमाम गुनाहो से और में इस्लाम लाया और में कहता हूँ के अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं और हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल है.[7] अल्लाहुम्मा इन्नी ऊज़ुबिका मिन अन उशरिका बिका शय अव व अना आलमु बिही व अस्ताग्फिरुका लिमा ला आलमु बिही तुब्तु अन्हु व तबर्रअतू मिनल कुफरी वश शिरकी वल किज्बी वल गीबती वल बिदअति वन नमीमति वल फवाहिशी वल बुहतानी वल मआसी कुल्लिहा व अस्लमतु व अकूलू ला इलाहा इल्ललाहू मुहम्मदुर रसूलुल लाह

इन्हें भी देखें

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  1. "The Five Kalimas - by Mufti Ebrahim Desai". www.beautifulislam.net. 11 अप्रैल 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2025-01-01.
  2. https://www.alhakam.org/what-is-the-status-of-the-six-kalimas/
  3. "कलिमा शब्द के अर्थ | kalima - Hindi meaning". Rekhta Dictionary. अभिगमन तिथि: 2025-04-24.
  4. Nadia (2023-06-04). "छह कलमा और उनका हिंदी अनुवाद | 6 Kalma In Hindi With Urdu Tarjuma[Translation]". https://digitalislam.org/ (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-04-24. {{cite web}}: External link in |website= (help)
  5. Malise Ruthven (2004). Historical Atlas of Islam. Harvard University Press. p. 14. ISBN 978-0-674-01385-8.
  6. Richard C. Martín. Encyclopedia of Islam & the Muslim World. Granite Hill Publishers. p. 723. ISBN 978-0-02-865603-8.
  7. Nadia (2023-06-04). "छह कलमा और उनका हिंदी अनुवाद | 6 Kalma In Hindi With Urdu Tarjuma[Translation]". https://digitalislam.org/ (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-04-24. {{cite web}}: External link in |website= (help)

बाहरी कड़ियाँ

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