कम्पनी सचिव

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कम्पनी सचिव (Company Secretary)[1] निजी क्षेत्र की कम्पनियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान का एक उच्च पद है। यह प्रायः प्रबन्धक या उससे भी ऊँचा पद है। कम्पनी सचिव का दायित्व कम्पनी का दक्षतापूर्वक प्रबन्धन करना है किन्तु उसका मुख्य दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि संस्था कम्पनी कानूनों का पालन करते हुए प्रगति करे। निदेशक मण्डल द्वारा लिए गये निर्णयों को लागू किए जाँय - यह सुनिश्चित करना भी उसका दायित्व है।[2]


भारत में कम्पनी अधिनियम के तहत न्यूनतम 5 करोड़ लागत वाली कम्पनी को सी एस रखना अनिवार्य है। सी एस को किसी कम्पनी के प्रधान अफसरों में से एक माना जाता है। ट्रेनिंग के दौरान सीखे हुए क्षेत्र के अनुसार वह अपना कार्य विभिन्न क्षेत्रों में दक्षतापूर्वक करता है जैसे फाइनेंस, आकउन्टस्, लीगल एडमिनिस्ट्रेषन एवं निजी डिविजन इत्यादि। अन्य कार्य क्षेत्र में सम्मिलित है- विधि सम्बन्धी जानकारी एवं कम्पनी सम्बन्धी सभी कार्य। ‘बोर्ड ऑफ डायरेक्टर’ की मीटिंग सम्बन्धि जानकारी, मीटिंग को आयोजित करने से लेकर सारे रिकार्ड तक सारी जिम्मेदारी सी एस की होती है। कम्पनी के आवश्यकतानुसार केन्द्र / राज्य सेल्स टेक्स, एक्साइज, लेबर एवं कार्परेट सम्बन्धी सभी तथ्य सी एस की जिम्मेदारियों में शामिल हैं। संस्था निवेश, प्रोजेक्ट स्वीकृति, लाइसेन्स एवं परमिट उपलब्ध करना, एम आर टी पी (मोनोपाली एण्ड रेस्ट्रिक्टिव ट्रेड प्रेक्टिस एक्ट) और फेरा (फॉरिन एक्सचेंज रेगुलेषन एक्ट) से सम्बन्धी कार्य भी सी एस के कार्य क्षेत्र में आता है। कम्पनी के वार्षिक रिटर्न भी कम्पनी सचिव को ही भरने पड़ते हैं।

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सन्दर्भ[संपादित करें]

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