कनागावा की महान लहर
| कनागावा की महान लहर | |
|---|---|
| 神奈川沖浪裏 (जापानी), [Kanagawa-oki Nami Ura] त्रुटि: {{native name}}: unrecognized language tag: त्रुटि: भाषा: रोमनकृत मिली ही नहीं (सहायता) (language?) | |
| कलाकार | कात्सुशिका होकुसाई |
| वर्ष | १८३१ |
| प्रकार | उकियो-ए (काष्ठछपी) |
| परिमाप | २४.६ cm × ३६.५ cm (9.7 इंच × 14.4 इंच) |
कनागावा की महान लहर (जापानी: 神奈川沖浪裏, अंग्रेज़ी: The Great Wave off Kanagawa) होकुसाई नामक जापानी उकियो-ए कलाकार द्वारा रचित एक काष्ठछपी चित्र है, जिसे जापानी इतिहास के एडो काल में सन् १८३१ के उत्तरार्ध में बनाया गया था। इस छपी में तीन नावें तूफ़ानी समुद्र में अग्रसर दिख रही हैं, जिनमें से एक विशाल, उठती हुई लहर केंद्र में एक सर्पिल घुमाव बनाते हुए नावों के ऊपर मंडरा रही है और पृष्ठभूमि में बर्फ से आच्छादित फ़ुजी पर्वत दिखाई दे रहा है।
यह छपी होकुसाई की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है और उनकी श्रृंखला ''छत्तीस दृश्यों में फ़ुजी'' की पहली कृति है, जिसमें प्रशिया नील रंग का उपयोग जापानी मुद्रण कला में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आया। ''कनागावा की महान लहर'' की रचना पारंपरिक जापानी काष्ठछपियों तथा यूरोप में विकसित ग्राफिकल परिप्रेक्ष्य के समन्वय से बनी है, जिसने होकुसाई को जापान में तत्कालीन सफलता के साथ ही बाद में यूरोप में भी ख्याति दिलाई, जहाँ प्रभाववाद कलाकारों ने उनकी कलाकृतियों से प्रेरणा ली। विश्व भर के अनेक संग्रहालयों में इस छपी की प्रतियाँ संचित हैं, जो अधिकांशतः उन्नीसवीं शताब्दी के निजी जापानी छपी-संग्रहों से प्राप्त हुई हैं। २१वीं शताब्दी तक केवल लगभग सौ प्रतियाँ ही विभिन्न दशाओं में उत्तरजीवित मानी जाती हैं।
कनागावा की महान लहर' को कभी-कभी “सभी कला इतिहास में संभवतः सबसे अधिक पुनरुत्पादित छवि” कहा गया है, साथ ही इसे “जापानी इतिहास की सबसे प्रसिद्ध कलाकृति” का दावेदार भी माना जाता है।[1][2] इस काष्ठछपी ने क्लॉड डेब्युसी, विन्सेंट वैन गो और क्लाद मोने जैसे कई पश्चिमी कलाकारों और संगीतकारों को प्रभावित किया है। होकुसाई के युवा समकक्ष, हिरोशिगे और कुनियोशि, भी इसी विषय पर आधारित अपनी-अपनी लहर-केंद्रित रचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित हुए।
प्रसंग
[संपादित करें]उकियो-ए कला
[संपादित करें]
उकियो-ए जापानी मुद्रण-कला की वह विधा है जो सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी तक फल-फूल कर चलती रही। इसके कलाकारों ने काष्ठछपियाँ और चित्र बनाए, जिनके विषयों में महिला सौंदर्य, कबुकी कलाकार और सूमो पहलवान, ऐतिहासिक एवं लोककथाएँ, यात्रावृत्त तथा परिदृश्य, जापानी पुष्प-पति एवं जीव-जंतु, तथा कामुक चित्रण शामिल थे। उकियो-ए (浮世絵) का शाब्दिक अर्थ है “तैरती हुई दुनिया की छवि।”
सन् १६०३ में एडो (वर्तमान टोक्यो) टोकुगावा शासन का केन्द्र बनने पर व्यापारी, कारीगर और श्रमिक वर्ग की आर्थिक दशा सुदृढ़ हुई और उन्होंने कबुकी रंगमंच, गीषा मंडलियाँ तथा सुख-प्रद मनोरंजन को प्रायोजित करना आरंभ किया। इस जीवनशैली को “उकियो” अर्थात् “तैरती दुनिया” के रूप में जाना गया। मुद्रित या चित्रित उकियो-ए कृतियाँ इन वर्गों में सस्ती होने एवं सजावट के अनुकूल होने के कारण बेहद लोकप्रिय रहीं।[3]
सबसे प्रारंभिक उकियो-ए कृतियाँ हिशिकावा मोरोनोबु द्वारा महिला अभिनेत्रियों के एकरंगी चित्र और काष्ठछपियाँ थीं, जो सन् १६७० के दशक में प्रकट हुईं। धीरे-धीरे रंगीन मुद्रण की शुरूआत हुई और सन् १७४० के दशक में ओकुमुरा मसानोबु ने अनेक लकड़ी के ब्लॉक से अलग-अलग रंग मुद्रित करने की तकनीक को अपनाया।[4] सन् १७६० के दशक में सुज़ुकी हारुनोबु की “ब्रोकेड प्रिंट” तकनीक की सफलता के बाद पूर्ण-रंग मुद्रण सामान्य हो गया, जिसमें प्रत्येक रंग के लिए दस या अधिक ब्लॉक उपयोग किए जाते थे। अधिकांश कलाकार स्वयं ब्लॉक नहीं तराशते थे; डिजाइन, ब्लॉक-तराशना, मुद्रण और प्रकाशन कार्य विभक्त रहते थे, जिससे हाथ से रंगों में मिश्रण और ग्रेडिएंट संभव हो पाता था।[5]
कलाकार
[संपादित करें]
कात्सुशिका होकुसाई का जन्म सन् १७६० में जापान के कात्सुशिका जिले में हुआ था।[6] उनके पिता टोकुगावा शासन के शीशे-निर्माता थे। चोदह वर्ष की आयु में उन्हें तोकितारो नाम दिया गया। चूंकि उन्हें उत्तराधिकारी नहीं माना गया, अतः संभावना है कि उनकी माता संगिनी थीं।[7]
छह वर्ष की आयु में ही उन्होंने चित्रकारी आरंभ कर दी थी और बारह वर्ष की आयु पर उन्हें एक पुस्तकालय में कार्यरत किया गया। सोलह वर्ष की आयु में वे उत्कीर्णक के शिष्य बने तथा अठारह वर्ष की आयु में प्रसिद्ध उकियो-ए कलाकार कात्सुकावा शुन्शो के शिष्य स्वीकार किए गए। शुन्शो के सन् १७९३ में निधन के पश्चात् उन्होंने जापानी, चीनी, डच एवं फ्रांसीसी चित्रशैलियों का आत्म-अध्ययन किया। सन् १८०० में उन्होंने “पूर्वी राजधानी के प्रसिद्ध दृश्य” तथा “एडो के आठ दृश्य” प्रकाशित किए और शिष्यों को प्रशिक्षण देना आरंभ किया। इसी दौरान उन्होंने “होकुसाई” उपनाम प्रयुक्त करना प्रारंभ किया; अपने जीवनकाल में उन्होंने तीस से अधिक कलात्मक नाम अपनाए।[7]
सन् १८०४ में उन्होंने टोक्यो के एक महोत्सव के लिए बोधिधर्म भिक्षु का २४० वर्गमीटर का भित्ति-चित्र बनाकर ख्याति प्राप्त की। वित्तीय चुनौतियों के कारण सन् १८१२ में उन्होंने “सरलीकृत रेखाचित्र पाठ” प्रकाशित किया और नागोया सहित अन्य स्थलों की यात्राएँ कर छात्रों को आमंत्रित किया। सन् १८१४ में उन्होंने अपनी प्रथम “मांगा” श्रृंखला प्रकाशित की, जिसमें लोगों, पशुओं और बुद्ध जैसे विषयों के रेखाचित्र थे। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक उनकी प्रसिद्ध श्रृंखला “छत्तीस दृश्यों में फ़ुजी” इतनी लोकप्रिय हुई कि बाद में उन्होंने इसमें दस और दृश्य जोड़ दिए। होकुसाई का निधन सन् १८४९ में ८९ वर्ष की आयु में हुआ।[8][9]
विवरण
[संपादित करें]‘कनागावा की महान लहर’ क्षैतिज स्वरूप (योको-ए) में २५ सेमी × ३७ सेमी आकार की काष्ठछपी है। रचना के तीन मुख्य तत्व हैं: उग्र समुद्र, तीन नावें और एक पर्वत। चित्र के ऊपर बाएँ कोने में कलाकार का हस्ताक्षर अंकित है।[10][11]
पहाड़
[संपादित करें]
पृष्ठभूमि में बर्फ़ से आच्छादित फ़ुजी पर्वत है, जो “छत्तीस दृश्यों में फ़ुजी” श्रृंखला का केंद्रीय विषय है। इस छपी में पर्वत को लहर के समान नीले रंग और सफ़ेद रेखाचित्रों के साथ दिखाया गया है।[12] पर्वत के चारों ओर गहरा नीला आकाश प्रारंभिक सुबह का आभास देता है, जब सूर्योदय की किरणें बर्फीली चोटियों को प्रकाशित कर रही हैं। पर्वत एवं दर्शक के मध्य कपासी वर्षी बादल हैं, किंतु वर्षा का कोई संकेत नहीं मिलता।[13]
नावें
[संपादित करें]चित्र में तीन ओशीओकुरी-बुने नामक तीव्र बरगे हैं, जिनका उपयोग इज़ू और बोसो प्रायद्वीपों से ताजी मछलियाँ एडो खाड़ी की बाज़ारों तक पहुँचाने के लिए होता था। विश्लेषण के अनुसार ये नावें वर्तमान योकोहामा के कनागावा-क्षेत्र में एडो-खाड़ी में दक्षिण की ओर सगामी-खाड़ी की ओर बढ़ रही थीं। प्रत्येक नाव में आठ भटके हुए पारवाहक तथा दो सहायता-क्रू सदस्य हैं; कुल मिलाकर तीस पुरुष हैं, जिनमें से बाईस ही स्पष्ट दिख रहे हैं। ओशीओकुरी-बुना आमतौर पर बारह से पंद्रह मीटर लंबी होती थीं, और होकुसाई ने लंबवत् माप को त्रीस प्रतिशत संकुचित करके लगभग दस से बारह मीटर ऊँची लहर दर्शाई है।[14]
समुद्र एवं लहरें
[संपादित करें]रचना का प्रमुख तत्व समुद्र है, जहाँ लहरों की वक्रता पूरे दृश्य को घेरती है। लहर एक उत्तम सर्पिल घुमाव बनाते हुए केंद्र से होकर गुज़रती है, जिससे दर्शक को फूजी पर्वत भी दृष्टिगोचर होता है। लहर की झागदार वक्र रेखाएँ स्वतः अनेक छोटी-छोटी वक्राएँ उत्पन्न करती हैं, जो लहर के भीतर की संरचना की पुनरावृत्ति करती हैं।
इस लहर को भले ही सुनामी या असामान्य विशाल लहर कहा जाता हो, किंतु फंतासी प्रवृत्ति के साथ यह प्रायः भूतिया या कंकाली रूप में भी देखने को मिलती है, जहाँ झाग के “नाखून” मल्लाहों को घेरे प्रतीत होते हैं। यह दृश्य होकुसाई के अन्य पौराणिक रचनाओं की याद दिलाता है, जिनमें ड्रैगन आकृतियाँ भी दिखती हैं।[12]
चित्र दीर्घा
[संपादित करें]- शिकागो कला संस्थान में संग्रहित काष्ठछपी
- ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहित काष्ठछपी
- लॉस एंजेलिस काउंटी म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट में संग्रहित काष्ठछपी
- टोक्यो राष्ट्रीय संग्रहालय में संग्रहित काष्ठछपी
- उतागावा कुणियोशी द्वारा रचित ‘भिक्षु निचिरेन का तूफ़ानी समुद्र को शांत करना’ (लगभग सन् १८३५)
- हिरोशिगे द्वारा रचित ‘सुरुगा प्रांत के सट्टा तट का समुद्र’ (सन् १८५८)
- गुस्ताव-हेनरी जोस्सोट द्वारा रचित ‘द वेव’ लिथोग्राफ (सन् १८९४)
- सन् २०२४ में जारी जापानी १,००० येन का बैंकनोट (लगभग भारतीय रुपये ५६०)
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Wood, Patrick (20 July 2017). "Is this the most reproduced artwork in history?" (ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेज़ी भाषा में). ABC News. 9 November 2020 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 20 May 2022.
- ↑ Gamerman, Ellen (18 March 2015). "How Hokusai's "The Great Wave" Went Viral". The Wall Street Journal. 12 January 2017 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 11 March 2017.
- ↑ Penkoff 1964, p. 6.
- ↑ Kobayashi 1997, p. 81.
- ↑ Salter 2001, p. 11.
- ↑ Cartwright & Nakamura 2009, p. 120.
- 1 2 Weston 2002, p. 116.
- ↑ Guth 2011, p. 468.
- ↑ Weston 2002, p. 120.
- ↑ Hillier 1970, p. 230.
- ↑ "Under the Wave off Kanagawa (Kanagawa oki nami ura), also known as The Great Wave, from the series Thirty-six Views of Mount Fuji (Fugaku sanjūrokkei)". Metropolitan Museum of Art. 14 May 2022 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 14 May 2022.
- 1 2 Cartwright & Nakamura 2009, p. 119.
- ↑ Cartwright & Nakamura 2009, pp. 122–123.
- ↑ Kobayashi 1997, p. 47.
सामान्य और उद्धृत स्रोत
[संपादित करें]- Ashcroft, Bill (26 July 2013). "Hybridity and Transformation: The Art of Lin Onus". Postcolonial Text (अंग्रेज़ी भाषा में). 8 (1). मूल से से 19 June 2021 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 22 May 2022.
- Bayou, Hélène (2008). Hokusai 1760–1849 – "L'affolé de son art" d'Edmond de Goncourt à Norbert Lagane (फ़्रेंच भाषा में). Paris: Réunion des Musées Nationaux. ISBN 978-2-7118-5406-6.
- Estampes japonaises: images d'un monde éphémère (फ़्रेंच भाषा में). Bibliothèque nationale de France. 2008. ISBN 978-84-89860-93-3.
- Bickford, Lawrence (1993). "Ukiyo-e Print History". Impressions (17): 1. जेस्टोर 42597774.
- Calza, Gian Carlo (2003). Hokusai (अंग्रेज़ी भाषा में). London: Phaidon. ISBN 978-0-7148-4304-9.
- Cartwright, Julyan H. E.; Nakamura, Hisami (20 June 2009). "What kind of a wave is Hokusai's Great wave off Kanagawa?". Notes and Records of the Royal Society. 63 (2): 119–135. डीओआई:10.1098/rsnr.2007.0039. एस2सीआईडी 35033146.
- Delay, Nelly (2004). L'estampe japonaise (फ़्रेंच भाषा में). Paris: F. Hazan. ISBN 978-2-85025-807-7.
- Dudley, J. M.; Sarano, V.; Dias, F. (2013). "On Hokusai's Great wave off Kanagawa: localization, linearity and a rogue wave in sub-Antarctic waters". Notes and Records of the Royal Society of London. 67 (2): 159–164. डीओआई:10.1098/rsnr.2012.0066. आईएसएसएन 0035-9149. पीएमसी 3645210. पीएमआईडी 24687148.
- Forrer, Matthi (1991). Hokusai: Prints and Drawings (अंग्रेज़ी भाषा में). Neues Publishing Company. ISBN 978-3-7913-1131-9.
- Goncourt, Edmond de (15 September 2015). Hokusai (अंग्रेज़ी भाषा में). Parkstone International. ASIN B016XN14YS.
- Guth, Christine (2011). "Hokusai's Great Waves in Nineteenth-Century Japanese Visual Culture" (PDF). The Art Bulletin. 93 (4): 468–485. डीओआई:10.1080/00043079.2011.10786019. आईएसएसएन 0004-3079. पीएमआईडी 00043079. एस2सीआईडी 191470775. मूल से (PDF) से 20 July 2020 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 December 2019.
- Harris, James C. (January 2008). "Under the Wave off Kanagawa". JAMA Psychiatry. 65 (1): 12–13. डीओआई:10.1001/archgenpsychiatry.2007.21. पीएमआईडी 18180422. मूल से से 11 March 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 15 May 2022.
- Hillier, Jack (1970). Gale Catalogue of Japanese Paintings and Prints in the Collection of Mr. & Mrs. Richard P. Gale (अंग्रेज़ी भाषा में). Vol. 2. Routledge. ISBN 978-0-7100-6913-9.
- Honour, Hugh; Fleming, John (1991). A World History of Art (अंग्रेज़ी भाषा में). Tres Cantos, Madrid: Laurence King Publishing. ISBN 978-1-85669-000-3. मूल से से 17 June 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 17 June 2022.
- Ives, Colta Feller (1974). The Great Wave: the Influence of Japanese Woodcuts on French Prints (अंग्रेज़ी भाषा में). Metropolitan Museum of Art. ISBN 978-0-87099-228-5.
- Kikuchi, Sadao; Kenny, Don (1969). A Treasury of Japanese Wood Block Prints (Ukiyo-e). Crown Publishers. ओसीएलसी 21250.
- Kobayashi, Tadashi (1997). Harbison, Mark A. (ed.). Ukiyo-e: An Introduction to Japanese Woodblock Prints (अंग्रेज़ी भाषा में). Kodansha International. ISBN 978-4-7700-2182-3.
- Lane, Richard (1962). Masters of the Japanese Print, Their World and Their Work (अंग्रेज़ी भाषा में). Creative Media Partners, LLC. ISBN 978-1-01-530023-1.
{{cite book}}: ISBN / Date incompatibility (help) - Médicis, François de; Huebner, Steven, eds. (2018). Debussy's Resonance. Boydell & Brewer. ISBN 978-1-58046-525-0.
- Moore, Janet Gaylord (1979). The Eastern Gate: An Invitation to the Arts of China and Japan (अंग्रेज़ी भाषा में). Collins. ISBN 978-0-529-05434-0.
- Nagata, Seiji (1995). Hokusai: Genius of the Japanese Ukiyo-e (अंग्रेज़ी भाषा में). Kodansha. ISBN 978-4-7700-1928-8.
- Ornes, Stephen (2014). "Science and Culture: Dissecting the "Great Wave"". Proceedings of the National Academy of Sciences of the United States of America. 111 (37): 13245. बिबकोड:2014PNAS..11113245O. डीओआई:10.1073/pnas.1413975111. आईएसएसएन 0027-8424. पीएमसी 4169912. पीएमआईडी 25228754.
- Penkoff, Ronald (1964). Roots of the Ukiyo-e; Early Woodcuts of the Floating World (PDF). Ball State Teachers College. ओसीएलसी 681751700. मूल से (PDF) से 2 June 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 21 May 2022.
- Salter, Rebecca (2001). Japanese Woodblock Printing. University of Hawaii Press. ISBN 978-0-8248-2553-9. मूल से से 17 May 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 21 May 2022.
- Sueur-Hermel, Valérie (2009). Henri Rivière: entre impressionnisme et japonisme (फ़्रेंच भाषा में). Paris: Bibliothèque nationale de France. ISBN 978-2-7177-2431-8.
- Singer, Robert T. (March–April 1986). "Japanese Painting of the Edo Period". Archaeology. 39 (2). Archaeological Institute of America: 64–67. जेस्टोर 41731745.
- Weston, Mark (2002). Giants of Japan: The Lives of Japan's Greatest Men and Women (अंग्रेज़ी भाषा में). Kodansha International. ISBN 978-1-56836-324-0.
- लेख जिनमें जापानी-भाषा का पाठ है
- Lang एवं lang-xx साँचा त्रुटियाँ
- Pages using infobox mapframe with missing coordinates
- Pages using infobox artwork without image
- Pages using infobox artwork with unknown parameters
- CS1 ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेज़ी-language sources (en-au)
- CS1 फ़्रेंच-language sources (fr)
- CS1 errors: ISBN date