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ओ फॉर्चूना

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ओ फॉर्चूना 
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कवि अज्ञात 'गोलियार्ड'
देश बवेरिया (जर्मनी)
भाषा मध्यकालीन लैटिन
विषय भाग्य की अस्थिरता, दुख, मानव जीवन
ऑनलाइन पढ़ें विकीस्रोत पर

ओ फॉर्चूना (लातिन: O Fortuna) एक 13वीं शताब्दी की मध्ययुगीन लैटिन कविता है। यह कविता उन 254 कविताओं और गीतों के संग्रह का हिस्सा है जिन्हें कार्मिना बुराना कहा जाता है। यद्यपि मूल कविता अपने आप में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, लेकिन आज यह कविता जर्मन संगीतकार कार्ल ओर्फ द्वारा 1936 में इसी नाम से बनाए गए शानदार और शक्तिशाली 'कैंटाटा' के शुरुआती और अंतिम कोरस के रूप में विश्वविख्यात है।[1][2][3]

उत्पत्ति और 'कोडेक्स बुरानस'

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इस कविता की मूल पांडुलिपि, जिसे कोडेक्स बुरानस कहा जाता है, 1803 में जर्मनी के बवेरिया में बेनेडिक्टब्यूर्न मठ के पुस्तकालय में खोजी गई थी।

माना जाता है कि इन कविताओं को 13वीं शताब्दी की शुरुआत में गोलियार्ड द्वारा लिखा गया था। गोलियार्ड वे विद्रोही मौलवी, छात्र और आवारा विद्वान थे जो पूरे यूरोप में घूमते थे और चर्च के भ्रष्टाचार, शराब, प्रेम और भाग्य की अनिश्चितता पर व्यंग्यात्मक और धर्मनिरपेक्ष कविताएँ लिखते थे। मूल पांडुलिपि में कुछ गीतों के ऊपर नियूम (प्राचीन सांगीतिक संकेतन) उकेरे गए थे, जो यह दर्शाते हैं कि इन कविताओं को मूल रूप से गाया जाता था।

"ओ फॉर्चूना" की पूरी विषय-वस्तु रोम की प्राचीन भाग्य की देवी, 'फॉर्चूना', और उनके रोटा फॉर्चूने (भाग्य का पहिया) की क्रूर और अप्रत्याशित प्रकृति के इर्द-गिर्द घूमती है।

कविता की शुरुआत भाग्य के प्रति एक दर्दनाक शिकायत से होती है: " (हे भाग्य, चंद्रमा की तरह, तुम हमेशा परिवर्तनशील हो...)

कवि विलाप करता है कि मानव जीवन भाग्य के पहिये से बंधा हुआ है। पहिया घूमता है तो राजा भिखारी बन जाता है, और भिखारी राजा। यह कविता दर्शाती है कि स्वास्थ्य, शक्ति और धन क्षणभंगुर हैं, और भाग्य बिना किसी तर्क या न्याय के किसी को भी नष्ट कर सकता है। पांडुलिपि के पहले पृष्ठ पर ही भाग्य के इस पहिये का एक प्रसिद्ध चित्र बना हुआ है।[4][5]

1934 में, जर्मन संगीतकार कार्ल ओर्फ को 'कार्मिना बुराना' का एक मुद्रित संस्करण मिला। वे इसकी लयबद्ध भाषा और शक्ति से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 24 कविताओं को चुना और उन्हें पूर्ण ऑर्केस्ट्रा और एक विशाल कोरस के लिए संगीतबद्ध किया।

ओर्फ का "ओ फॉर्चूना" संगीत की दुनिया में एक उत्कृष्ट कृति है। यह बहुत ही धीमी, भारी और डरावनी ड्रम बीट और कोरस के साथ शुरू होता है, जो भाग्य की अपरिहार्य शक्ति को दर्शाता है। फिर यह फुसफुसाहट में बदल जाता है, और अंततः एक विस्फोटक और नाटकीय चरमोत्कर्ष पर समाप्त होता है। ओर्फ का यह कार्य 1937 में फ्रैंकफर्ट में पहली बार प्रदर्शित हुआ और तुरंत ही एक ऐतिहासिक सफलता बन गया।[6]

आधुनिक संस्कृति में प्रभाव

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20वीं और 21वीं सदी में, कार्ल ओर्फ का "ओ फॉर्चूना" पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया और पहचाना जाने वाला टुकड़ा बन गया है। अपनी नाटकीय और महाकाव्य ध्वनि के कारण, इसे अक्सर फिल्मों (एक्सकैलिबर, द ओमेन), टेलीविजन विज्ञापनों, वीडियो गेम, और खेल आयोजनों में "बॉस बैटल" या किसी विनाशकारी घटना के आगमन को दर्शाने के लिए भारी रूप से उपयोग किया जाता है।[7]

सन्दर्भ

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  1. Walsh, P. G. (1993). Love Lyrics from the Carmina Burana. University of North Carolina Press. pp. 15-22. ISBN 978-0807844007.
  2. [entertainment/8432499.stm| "Most played classical music of the past 75 years"]
  3. "Carmina Burana – O Fortuna"
  4. Sammons, Jeffrey L. (1970). "The Wheel of Fortune in the Carmina Burana". Medieval Studies. 32: 112–120.
  5. "Love, Lust and Drinking Stir 'Carmina'"
  6. Kater, Michael H. (2000). Composers of the Nazi Era: Eight Portraits. Oxford University Press. pp. 120-135. ISBN 978-0195152869.
  7. "The story of Carl Orff's Carmina Burana". BBC Music.

बाहरी कड़ियाँ

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