ओरिएंटियरिंग
| यह लेख लार्ज लैंग्वेज मॉडल से लिखा हुआ हो सकता है। (जुलाई 2026) |
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| सर्वोच्च नियंत्रण निकाय | अंतर्राष्ट्रीय ओरिएंटियरिंग महासंघ |
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| उपकरण | स्थलाकृतिक मानचित्र, दिक्सूचक, इलेक्ट्रॉनिक पंचिंग कार्ड |
| स्थल | जंगल, पहाड़, और शहरी पार्क (आउटडोर) |
ओरिएंटियरिंग (अंग्रेज़ी: Orienteering) एक ऐसा साहसिक और प्रतिस्पर्धात्मक आउटडोर खेल है, जिसमें एथलीटों को एक 'स्थलाकृतिक मानचित्र' और 'दिक्सूचक' का उपयोग करके एक अज्ञात भूभाग (आमतौर पर जंगल या पहाड़ी इलाके) में नेविगेट करना होता है। इस खेल का मुख्य उद्देश्य मानचित्र पर दिए गए विभिन्न 'नियंत्रण बिंदुओं' को एक विशिष्ट क्रम में खोजते हुए सबसे कम समय में फिनिश लाइन तक पहुँचना है।[1][2]
ओरिएंटियरिंग शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक तीक्ष्णता दोनों का एक अनूठा परीक्षण है, क्योंकि एथलीटों को कठिन रास्तों पर दौड़ते समय तेजी से दिशा-निर्देशन और निर्णय लेने होते हैं।[3]
इतिहास और उत्पत्ति
[संपादित करें]ओरिएंटियरिंग की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में स्वीडन में सैन्य प्रशिक्षण के रूप में हुई थी। स्वीडिश सेना के अधिकारियों ने सैनिकों की अपरिचित भूमि पर नेविगेट करने की क्षमता को सुधारने के लिए इस खेल का आविष्कार किया था। 'ओरिएंटियरिंग' शब्द का पहला आधिकारिक उपयोग 1886 में स्वीडिश सैन्य अकादमी में किया गया था, जिसका अर्थ था "नक्शे और कंपास की मदद से अज्ञात भूमि को पार करना।"
प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह खेल आम नागरिकों के बीच भी लोकप्रिय होने लगा। स्वीडन के अर्न्स्ट किलांडर को "ओरिएंटियरिंग का पिता" माना जाता है, जिन्होंने 1918 में इस खेल के नियमों को मानकीकृत किया और इसे एक जन-खेल के रूप में स्थापित किया। 1961 में 'अंतर्राष्ट्रीय ओरिएंटियरिंग महासंघ' की स्थापना हुई, जो आज वैश्विक स्तर पर इस खेल का संचालन करता है।[4]
उपकरण और तकनीक
[संपादित करें]इस खेल में सफलता पूरी तरह से एथलीट के उपकरणों और उनकी भौगोलिक समझ पर निर्भर करती है:
- मानचित्र: ओरिएंटियरिंग में उपयोग किए जाने वाले मानचित्र बहुत ही विस्तृत होते हैं (आमतौर पर 1:10,000 या 1:15,000 के पैमाने पर)। इनमें भूभाग की ऊँचाई, वनस्पति का घनत्व, चट्टानें, दलदल और यहाँ तक कि छोटे गड्ढे भी सटीक रूप से दर्शाए जाते हैं।
- दिक्सूचक: दिशा ज्ञात करने के लिए अंगूठे वाला कंपास या बेसप्लेट कंपास का उपयोग किया जाता है। दौड़ते समय इसे मानचित्र के साथ पकड़ना आसान होता है।
- कंट्रोल कार्ड और ई-पंचिंग: आधुनिक ओरिएंटियरिंग में एक इलेक्ट्रॉनिक चिप का उपयोग किया जाता है। जब प्रतिभागी किसी 'नियंत्रण बिंदु' पर पहुँचता है, तो वह अपनी चिप को एक इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स में 'पंच' करता है, जिससे उसका सटीक समय और उपस्थिति दर्ज हो जाती है।[5]
खेल का प्रारूप
[संपादित करें]प्रतियोगिता की शुरुआत में, प्रत्येक प्रतिभागी को एक मानचित्र दिया जाता है जिस पर लाल या बैंगनी रंग से एक मार्ग बना होता है। मार्ग की शुरुआत एक त्रिकोण से होती है, और बीच में कई वृत्त होते हैं, जो 'नियंत्रण बिंदुओं' को दर्शाते हैं।
मैदान पर इन वास्तविक बिंदुओं को नारंगी और सफेद रंग के त्रिकोणीय झंडों से चिह्नित किया जाता है। एथलीट को अपनी बुद्धि का उपयोग करके यह तय करना होता है कि वह एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक जाने के लिए कौन सा रास्ता चुनेगा (सीधे पहाड़ के ऊपर से या जंगल के घुमावदार रास्ते से)। जो खिलाड़ी सभी बिंदुओं को सही क्रम में पार करते हुए सबसे कम समय में अंतिम बिंदु (डबल सर्किल) तक पहुँचता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है।[6]
प्रमुख प्रकार
[संपादित करें]यद्यपि पैदल दौड़ना इस खेल का सबसे लोकप्रिय रूप है, समय के साथ इसके अन्य रोमांचक संस्करण भी विकसित हुए हैं:
- माउंटेन बाइक ओरिएंटियरिंग: साइकिल पर बैठकर नेविगेट करना।
- स्की ओरिएंटियरिंग: बर्फ़ीले इलाकों में क्रॉस-कंट्री स्कीइंग के साथ नेविगेशन।
- ट्रेल ओरिएंटियरिंग: यह संस्करण विशेष रूप से शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) एथलीटों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ गति के बजाय मानचित्र पढ़ने की सटीकता पर अंक दिए जाते हैं।[7]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "World Orienteering Championships 1966"
- ↑ "Orienteering"[मृत कड़ियाँ]
- ↑ Boga, Steven (1997). Orienteering: The Sport of Navigating with Map & Compass. Stackpole Books. pp. 12-15. ISBN 978-0811728706.
- ↑ Palmer, Peter (1997). The Complete Orienteering Manual.
- ↑ "Equipment used in Orienteering". International Orienteering Federation (IOF).[मृत कड़ियाँ]
- ↑ McNeill, Carol. Orienteering: Skills - Techniques - Training.
- ↑ Seiler, Roland (1990). "The History and Development of Orienteering Sports". Journal of Sports Sciences. 15 (3): 245–250.