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ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्च

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ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्च
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वर्गीकरण गैर-कैल्सेडोनियन ईसाई धर्म
अभिविन्यास पूर्वी ईसाई धर्म
धर्मशास्त्र प्राच्य रूढ़िवादी धर्मशास्त्र
राज्य व्यवस्था बिशप की शासन-व्यवस्था
संस्थापक यीशु मसीह
विच्छिन्न रोमन राजकीय चर्च
सदस्य 71,865,000 (2020)

ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्च (अंग्रेज़ी: Oriental Orthodox Churches) पूर्वी ईसाई चर्चों का एक समूह है। ये चर्च मियाफिसिट क्राइस्टोलॉजी की मान्यताओं पर विश्वास रखते हैं।[1] वर्ष 2020 में यह अनुमान लगाया गया था कि ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्चों के 7.2 करोड़ सदस्य हैं।[2] ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्सी ईसाई धर्म की सबसे पुरानी शाखाओं में से एक हैं।[3]

दुनिया के सबसे पुराने धार्मिक संस्थानों में से एक होने के नाते, ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्चों ने आर्मेनिया, मिस्र, इरिट्रिया, इथियोपिया, सूडान, लेवांत, इराक और दक्षिण भारत के मालाबार क्षेत्रों जैसे देशों और इलाकों के इतिहास और संस्कृति में अहम भूमिका निभाई है। ये स्वायत्त चर्च हैं और इनके बिशप एक-दूसरे के बराबर माने जाते हैं। इनकी मान्यताओं में केवल शुरुआती तीन धार्मिक सभाओं को ही सही माना जाता है।[1]

नाम और विशेषता

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"ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्च" नाम को औपचारिक रूप से वर्ष 1965 में अदीस अबाबा के सम्मेलन में अपनाया गया था। उस समय इसमें पाँच चर्च शामिल थे। इरिट्रियन चर्च तब तक स्वायत्त नहीं हुआ था। इन चर्चों को ओल्ड ओरिएंटल, लेसर ईस्टर्न, एंटी-कैल्सेडोनियन, नॉन-कैल्सेडोनियन, प्री-कैल्सेडोनियन, मियाफिसिट या मोनोफिसिट जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। कैथोलिक चर्च ने इन चर्चों को पूर्व के प्राचीन चर्च कहा है।[4]

ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्चों को आम तौर पर सामाजिक मुद्दों के संबंध में अधिक रूढ़िवादी माना जाता है। सभी मुख्यधारा के ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्च विश्व गिरजाघर परिषद के सदस्य हैं।

धर्मशास्त्र

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ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्स चर्चों की पहचान इस बात से होती है कि वे रोमन साम्राज्य के राजकीय चर्च के दौर में हुई केवल शुरुआती तीन सार्वभौमिक परिषदों, वर्ष 325 में नाइसिया की पहली परिषद, वर्ष 381 में क़ुस्तुंतुनिया की पहली परिषद तथा वर्ष 431 में इफिसुस की परिषद को ही मान्यता देते हैं।

ओरिएंटल ऑर्थोडॉक्सी, पूर्वी रूढ़िवादी चर्च के साथ बहुत से धर्मशास्त्र और अनेक कलीसियाई परंपराएँ साझा करते है। इनमें उद्धार का एक समान सिद्धांत और बिशपों के बीच सामूहिकता की परंपरा इत्यादि शामिल हैं।[5]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. 1 2 "Orthodox Christian Churches" [रूढ़िवादी ईसाई चर्च]. द प्लुरलिज़्म प्रोजेक्ट (अंग्रेज़ी भाषा में). हावर्ड विश्वविद्यालय. अभिगमन तिथि: 2 सितम्बर 2026.
  2. ↑ जीना, ज़ुर्लो (2022). Global Christianity. ज़ोंडरवन एकेडमिक. p. 5. ISBN 9780310113638. अभिगमन तिथि: 2 सितम्बर 2026.
  3. ↑ "Orthodox churches (Oriental)" [ऑर्थोडॉक्स चर्च (ओरिएंटल)]. वर्ल्ड काउंसिल ऑफ़ चर्चेज़ (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2 सितम्बर 2026.
  4. ↑ जॉन पॉल, द्वितीय. "Ut Unum Sint: On commitment to Ecumenism" [उट उनुम सिंट : ईसाई एकता के प्रति प्रतिबद्धता पर]. वैटिकन (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2 सितम्बर 2026.
  5. ↑ "The Transfiguration: Our Past and Our Future" [रूपांतरण: हमारा अतीत और हमारा भविष्य]. लॉस एंजिल्स का कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स डायोसिस (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2 सितम्बर 2026.

बाहरी कड़ियाँ

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