ओफियोलाइट

ओफ़ियोलाइट पृथ्वी की महासागरीय भूपर्पटी और उसके नीचे मौजूद ऊपरी मैंटल का एक हिस्सा है जो ऊपर उठकर सतह पर आ गया है और अक्सर महाद्वीपीय भूपर्पटी की चट्टानों पर स्थित हो गया। कई पहाड़ी इलाकों में मौजूद इन चट्टानों की उत्पत्ति प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के आने तक अनिश्चित बनी रही।[1]
महत्व
[संपादित करें]इनका बहुत महत्व इसलिए है क्योंकि ये आल्प्स और हिमालय जैसी पर्वत श्रृंखलाओं में पाए जाते हैं जहाँ ये उन पुराने महासागरीय द्रोणी के अस्तित्व का प्रमाण देते हैं जो अब निम्नस्खलन (एक टेक्टोनिक प्लेट का दूसरी के नीचे धंसने) की प्रक्रिया में खत्म हो चुके हैं। यह जानकारी प्लेट विवर्तनिकी के मुख्य आधारों में से एक थी और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत तथा प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं को समझने में ओफ़ियोलाइट्स ने हमेशा अहम भूमिका निभाई है।[2]
निर्माण
[संपादित करें]दुनिया के अधिकांश ओरोजेनिक बेल्ट में ओफियोलाइट्स की पहचान की गई है। हालाँकि ओफ़ियोलाइट बनने की प्रक्रिया के दो पहलुओं पर बहस चल रही है: इस क्रम की उत्पत्ति और ओफ़ियोलाइट के अपनी जगह पर पहुँचने का तरीका। एम्प्लेसमेंट वह प्रक्रिया है जिसमें कम घनत्व वाली महाद्वीपीय क्रस्ट के ऊपर अनुक्रम ऊपर उठता है।
समूह और संयोजन
[संपादित करें]ओफ़ियोलाइट्स मध्यजीवी महाकल्प की ओरोजेनिक बेल्ट में आम हैं जो टेथिस सागर के बंद होने से बनी थीं। आर्कियन और पुराप्राग्जीवी महाकल्प क्षेत्रों में ओफियोलाइट्स दुर्लभ हैं।[3] ज़्यादातर ओफ़ियोलाइट्स को दो समूहों टेथियन और कॉर्डिलेरन में से किसी एक में बांटा जा सकता है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "ओफ़ियोलाइट". ब्रिटानिका (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 16 जून 2026.
- ↑ दिलेक, वाई. "ऑफिओलाइट कॉन्सेप्ट एंड इट्स इवोल्यूशन" (PDF). 2003. अभिगमन तिथि: 17 जून 2026.
- ↑ लेटिनेन, मार्टी; नूरमी, पेक्का ए.; रामो, ओ. टी. प्रीकैंब्रियन जियोलॉजी ऑफ फिनलैंड (अंग्रेज़ी भाषा में). एल्सवियर. ISBN 978-0-08-045759-8. अभिगमन तिथि: 16 जून 2026.