ऑलिवर क्रॉमवेल

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ऑलिवर क्रॉमवेल

ऑलिवर क्रॉमवेल (25 अप्रैल 1599- 3 सितम्बर 1658) अंग्रेजी जनरल और राजनेता थे, जो पहले एक अधीनस्थ के रूप में और बाद में कमांडर-इन-चीफ के रूप में, इंग्लैंड के गृहयुद्ध के दौरान राजा चार्ल्स प्रथम के खिलाफ इंग्लैंड की संसद की सेनाओं का नेतृत्व किया। बाद में 1653 से 1658 में अपनी मृत्यु तक ब्रिटिश द्वीपों को 'लॉर्ड प्रोटेक्टर' के रूप में शासन किया। उन्होंने राज्य के प्रमुख और नए गणतंत्र की सरकार के प्रमुख के रूप में एक साथ कार्य किया।

जीवनी[संपादित करें]

क्रॉमवेल के जीवन के आरम्भिक 40 वर्षों के बारे में जानकारी बहुत कम है।[1] 1630 के दशक में धार्मिक परिवर्तन के बाद वह स्वतंत्र पुरीटन बन गए। क्रॉमवेल सबसे पहले 1628 में हंटिंगडन के लिए संसद सदस्य चुने गए। फिर कैम्ब्रिज से 1640 और 1640-1649 की संसदों में सदस्य रहे। उन्होंने सांसदों के पक्ष में अंग्रेजी गृहयुद्ध में प्रवेश किया। क्रॉमवेल ने एक कमांडर के रूप में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और जल्दी से घुड़सवार टुकड़ी का नेतृत्व करने से उन्हें पदोन्नत किया गया था। उन्हें न्यू मॉडल आर्मी के प्रमुख कमांडरों में से एक बनाया गया।

क्रॉमवेल 1649 में राजा चार्ल्स प्रथम की मौत के वारंट पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक थे। संसद के सदस्य के रूप में इंग्लैंड के अल्पकालिक संसद (1649-1653) पर वह हावी थे। उन्हें 1649-1650 में आयरलैंड में अंग्रेजी सैन्य अभियान की कमान संभालने के लिए चुना गया था। क्रॉमवेल की सेनाओं ने आयरलैंड में कॉन्फेडरेट और रॉयलिस्ट गठबंधन को हराया और देश पर कब्जा कर लिया। क्रॉमवेल ने 1650 और 1651 के बीच स्कॉटिश सेना के खिलाफ भी एक अभियान का नेतृत्व किया। 20 अप्रैल 1653 को, क्रॉमवेल ने संसद को बलपूर्वक बर्खास्त कर दिया एवं अल्पकालिक नामित विधानसभा की स्थापना की, जिसे बरबोन की संसद के रूप में जाना जाता था। बाद में अपने साथी नेताओं द्वारा 'लॉर्ड प्रोटेक्टर' के रूप में शासन करने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया। इंग्लैंड (जिसमें उस समय वेल्स शामिल था), स्कॉटलैंड और आयरलैंड पर उन्होंने 16 दिसंबर 1653 से शासन शुरू किया।[2]

विरासत[संपादित करें]

क्रॉमवेल की मृत्यु 1658 में प्राकृतिक कारणों से हुई और उन्हें वेस्टमिंस्टर ऐबी में दफनाया गया। उनके बेटे रिचर्ड द्वारा उनकी जगह ली गई, जिसकी कमजोर नीतियों के कारण राज की व्यवस्था चरमरा गई थी। ओलिवर के पूर्व जनरल जॉर्ज मोनक ने तब तख्तापलट किया। इसके कारण संसद ने राजा चार्ल्स द्वितीय के रूप में राजकुमार चार्ल्स की वापसी की व्यवस्था की और 1660 में रोयलिस्टों की सत्ता में वापसी हुई। क्रॉमवेल की लाश को बाद में निकाला गया। उसे जंजीरों में लटका दिया गया और उसका सिर काट दिया गया। क्रॉमवेल ब्रिटिश और आयरिश इतिहास के सबसे विवादास्पद व्यक्तियों में से एक है। 2002 के बीबीसी पोल में उन्हें अब तक के दस महानतम ब्रिटिश लोगों में से एक के रूप में चुना गया था।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Morrill, John (2004). "Cromwell, Oliver (1599–1658)". डीओआइ:10.1093/ref:odnb/6765. अभिगमन तिथि 23 April 2017.
  2. "Oliver Cromwell (1599–1658)".
  3. "Ten greatest Britons chosen". BBC. 20 October 2002. अभिगमन तिथि 27 November 2008.