एसओएस (संकट संकेत)
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मोर्स कोड में एसओएस (एक निरंतर अनुक्रम) | |
| प्रकार | रेडियो-टेलीग्राफ़ संकट संकेत |
|---|---|
| उपयोग प्रणाली | मोर्स कोड (Morse Code) |
| स्वीकृति वर्ष | 1906 (बर्लिन सम्मेलन) |
| मोर्स अनुक्रम | · · · — — — · · · |
एसओएस (SOS) एक अंतर्राष्ट्रीय संकट संकेत ( ▄ ▄ ▄ ▄▄▄ ▄▄▄ ▄▄▄ ▄ ▄ ▄ ) है, जिसे मूल रूप से समुद्री उपयोग के लिए बनाया गया था। इसे बिना किसी अंतराल के तीन बिंदु, तीन योजक चिह्न और तीन बिंदु के एक अटूट क्रम के रूप में प्रसारित किया जाता है।[1] 1906 में अपनाए जाने पर यह कोई संक्षिप्त रूप (abbreviation) नहीं था, लेकिन बाद में लोकप्रिय वाक्यों जैसे "सेव आवर सोल्स" (save our souls) या "सेव आवर शिप" से जोड़ दिया गया।[2]
इसकी शुरुआत 1905 के जर्मन रेडियो नियमों से हुई थी। आधुनिक शब्दावली में, SOS एक मोर्स "प्रक्रियात्मक संकेत" है,[3] जिसका उपयोग जीवन या संपत्ति के विनाश के आसन्न खतरे के समय सहायता माँगने के लिए होता है।[4] 1999 में ग्लोबल मैरीटाइम डिस्ट्रेस एंड सेफ्टी सिस्टम द्वारा प्रतिस्थापित होने तक यह प्रमुख समुद्री संकट संकेत बना रहा।

आज तक SOS को एक मानक संकट संकेत माना जाता है, जिसे किसी भी संचार प्रणाली के साथ प्रयोग किया जाता है। इसे प्रकाश की चमक (तीन छोटी/तीन लंबी/तीन छोटी) द्वारा भी भेजा भी जा सकता है।[5] इसे ज़मीन या बर्फ पर लिखना आसान है और इसका उल्टा या सीधा एक समान दिखना दृश्य पहचान के लिए अत्यंत सुविधाजनक है।
इतिहास
[संपादित करें]1890 के दशक में रेडियो के विकास के बाद, समुद्री संकट संकेतों को मानकीकृत करने की आवश्यकता महसूस हुई। 1903 में एक इतालवी प्रतिनिधि ने 'SSS DDD' का सुझाव दिया, लेकिन कोई मानक तय नहीं हुआ।[6]1904 में मार्कोनी कंपनी ने 'CQD' अपनाया, और अमेरिकी नौसेना ने 'NC' का प्रस्ताव रखा।[7] 1905 में जर्मनी 'SOS' (Notzeichen) को अपनाने वाला पहला देश बना। 1906 के बर्लिन सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत किया गया।[8] मोर्स कोड में तीन बिंदु 'S' और तीन योजक चिह्न 'O' होते हैं, इसलिए इसे अनौपचारिक रूप से "SOS" कहा जाने लगा।[9][10] इसका पहला दर्ज उपयोग 1909 में 'RMS स्लावोनिया' और 'SS अरापाहो' ने किया था।[11][12] 1912 में 'टाइटैनिक' के डूबते समय CQD और SOS दोनों का उपयोग हुआ, जिसके बाद CQD का चलन पूरी तरह समाप्त हो गया।[13]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ U.S. Navy, Bureau of Naval Personnel, Radioman 3 & 2, NAVPERS 10228-B, Washington, D.C.: U.S.G.P.O., 1957, pp. 135, 177, 402.
- ↑ "S O S", The Sailors' Magazine and Seaman's Friend, 01 अक्टूबर 1915, पेज 58.
- ↑ Weik, Martin (2012-12-06). Communications Standard Dictionary (अंग्रेज़ी भाषा में). Springer Science & Business Media. ISBN 978-1-4613-0429-6.
- ↑ आपातकालीन प्रसारणों के लिए, SOS नियमित संदेशों की शुरुआत के सूचक CT = KA = ▄▄▄ ▄ ▄▄▄ ▄ ▄▄▄ का स्थान लेता है।
- ↑ Stephen (2022-10-23). "How to Signal SOS With a Flashlight [Complete Guide]" (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-02-23.
- ↑ Howeth, Linwood S. (1963). History of communications-electronics in the United States Navy. Washington: For sale by the Superintendent of Documents, U. S. Govt. Print. Off.
- ↑ Robison, S. S.; Kaiser, Louis Anthony; Manney, H. N.; United States (1906). Manual of wireless telegraphy for the use of naval electricians. Washington: Govt. print. off.
- ↑ Elektrotechnischer Verein (Berlin, Germany); Verband Deutscher Elektrotechniker (1880). "ETZ: Elektrotechnische Zeitschrift. Ausg. A." Elektrotechnische Zeitschriftv. 1-: v.
- ↑ "Electrical world". Some issues have title:Electrical T & D world: 83-84 v. 1907-01-12. आईएसएसएन 0013-4457.
- ↑ Windsor, H. H. (1910-02-01). "Popular mechanics: an illustrated weekly review of the mechanical press of the world". Popular mechanics magazine: 156 p. आईएसएसएन 0736-9913.
- ↑ "Modern Electrics" (PDF). 1910-09-01. p. 156 p.
- ↑ "Distress Signal SOS First Heard at Hatteras, 1909 | NC DNCR". www.dncr.nc.gov (अंग्रेज़ी भाषा में). 2016-08-11. अभिगमन तिथि: 2026-02-23.
- ↑ "Notices". The Pacific commercial advertiser (अंग्रेज़ी भाषा में). 1909-08-27. p. 4. आईएसएसएन 2375-3137. ओसीएलसी 12025660. अभिगमन तिथि: 2026-02-23.