एम16 राइफल
| युजीन स्टोनर (Eugene Stoner) | |
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[[Image: अपनी क्रांतिकारी रचना अर्मालाइट एआर-15 राइफल के साथ युजीन स्टोनर | |
| जन्म |
नवम्बर 22, 1922 गॉस्पोर्ट, इंडियाना, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| मौत |
अप्रैल 24, 1997 (उम्र 74 वर्ष) पाम सिटी, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| राष्ट्रीयता | अमेरिकी |
| शिक्षा | लॉन्ग बीच सिटी कॉलेज |
| पेशा | हथियार डिजाइनर, विमानन इंजीनियर |
| प्रसिद्धि का कारण | अर्मालाइट एआर-15, एम16 राइफल, एआर-10, स्टोनर 63 प्रणाली |
| जीवनसाथी | जीन स्टोनर |
युजीन मॉरिस स्टोनर (Eugene Stoner) संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली बन्दूक तथा सैन्य हथियार डिजाइनरों में से एक थे। उन्हें मुख्य रूप से अर्मालाइट एआर-15 (ArmaLite AR-15) राइफल के विकास के लिए जाना जाता है, जिसे बाद में अमेरिकी सेना द्वारा व्यापक रूप से एम16 राइफल (M16) के रूप में अपनाया गया। स्टोनर की डिजाइनों ने पारंपरिक भारी हथियारों के युग को समाप्त करते हुए छोटे कैलिबर, हल्के वजन और उच्च-वेग (Small-caliber, high-velocity) वाले आधुनिक सैन्य डिज़ाईन की नींव रखी, जो आज भी वैश्विक स्तर पर एक सर्वकालिक औद्योगिक मानक माना जाता है।[1]
स्टोनर की विशिष्ट यांत्रिक और इंजीनियरिंग शैली ने न केवल रक्षा उद्योग को प्रभावित किया, बल्कि कंप्यूटर आर्किटेक्चर और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की दुनिया में भी 'खुली संरचना' (Open Architecture) तथा कस्टमाइज्ड इंटरफेस के विकास को प्रेरित किया। उनके समकालीन विचारकों में उनकी तुलना सोवियत संघ के मिखाइल कलाश्निकोव (एके-47 के जनक) से की जाती है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
[संपादित करें]युजीन स्टोनर का जन्म 22 नवंबर 1922 को इंडियाना के गॉस्पोर्ट में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के बाद लॉन्ग बीच सिटी कॉलेज से तकनीकी विमानन इंजीनियरिंग (Aviation Engineering) की पढ़ाई की। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, उन्होंने अमेरिकी मरीन कॉर्प्स में विमानन आयुध (Aviation Ordnance) विशेषज्ञ के रूप में प्रशांत महासागर के मोर्चे पर अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान विमानों की हल्की और मजबूत एल्यूमीनियम संरचनाओं के साथ उनके व्यावहारिक अनुभव ने आगे चलकर उनके हथियार डिजाइनों में एक क्रांतिकारी भूमिका निभाई।
अर्मालाइट और ऐतिहासिक डिजाइनों का जन्म
[संपादित करें]द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, वर्ष 1954 में स्टोनर 'फेयरचाइल्ड इंजन एंड एयरप्लेन कॉर्पोरेशन' के एक उप-भाग अर्मालाइट (ArmaLite) में मुख्य डिजाइन इंजीनियर के रूप में शामिल हुए।[2] वहां उन्होंने पारंपरिक लकड़ी और भारी लोहे के बजाय विमानों में उपयोग होने वाली आधुनिक सामग्रियों, जैसे कि 7075-टी6 एयरोस्पेस एल्यूमीनियम और फेनोलिक कंपोजिट प्लास्टिक का उपयोग कंप्यूटर जैसी सूक्ष्मता के साथ हथियारों में करना शुरू किया।
एआर-10 (AR-10) का विकास
[संपादित करें]वर्ष 1956 में स्टोनर ने कलीसियाई रूप से अपना पहला बड़ा क्रांतिकारी डिज़ाईन पेश किया, जिसे अर्मालाइट एआर-10 (AR-15 का पूर्वज) कहा जाता है। यह एक 7.62×51 मिमी नाटो कैलिबर वाली राइफल थी। इसमें स्टोनर ने एक 'सीधी-रेखा' (Straight-line recoil design) की अद्भुत यांत्रिकी का उपयोग किया, जहाँ बैरल और बटस्टॉक को एक ही अक्ष में रखा गया था। इसके कारण फायरिंग के दौरान बंदूक का आगे का हिस्सा ऊपर की ओर नहीं भागता था, जिससे निशाने की सटीकता कई गुना बढ़ जाती थी। हालांकि आईबीएम के शुरुआती पर्सनल कंप्यूटर की तरह सेना की नौकरशाही प्रथाओं के कारण इसे शुरुआत में खारिज कर दिया गया, लेकिन इसका आर्किटेक्चर भविष्य का आधार बना।[3]
एआर-15 और एम16 का वैश्विक साम्राज्य
[संपादित करें]अमेरिकी सेना की मांग पर स्टोनर ने एआर-10 के ढांचे को छोटा करके 5.56 मिमी कैलिबर वाली अर्मालाइट एआर-15 विकसित की। स्टोनर ने इसमें पारंपरिक गैस-पिस्टन रॉड को पूरी तरह हटाकर एक नई आंतरिक पिस्टन प्रणाली (Internal Piston Action) की खोज की, जिसे बोलचाल में 'डायरेक्ट इमपिंजमेंट' (Direct Impingement) कहा जाता है। इसमें उच्च-दबाव वाली गैस सीधे बोल्ट कैरियर ग्रुप के भीतर जाकर चक्र को पूरा करती थी, जिससे चलती हुई कड़ियों का वजन कम हो गया और पूरी राइफल का वजन मात्र 2.8 किलोग्राम रह गया। वर्ष 1964 में जब अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसे **एम16 (M16)** के रूप में अपनाया, तो यह अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली मानक सर्विस राइफल बन गई।
तकनीकी उद्योग और कोडिंग वर्ल्ड पर प्रभाव
[संपादित करें]युजीन स्टोनर की इंजीनियरिंग फिलॉसफी का कंप्यूटर विज्ञान, डेटाबेस प्रबंधन (जैसे माइक्रोसॉफ्ट एसक्यूएल सर्वर का आर्किटेक्चर) और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के विकास पर गहरा संरचनात्मक प्रभाव पड़ा:
- ओपन आर्किटेक्चर (Open Architecture) की प्रेरणा: स्टोनर ने एआर-15 कूट ढांचे को 'प्लग-एंड-प्ले' मॉड्यूल के रूप में डिजाइन किया था। इसका ऊपरी रिसीवर (Upper Receiver) और निचला रिसीवर केवल दो हिंज पिन्स की मदद से अलग हो जाते थे। इसके कारण उपयोगकर्ता बिना पूरी बंदूक बदले केवल बैरल या कैलिबर बदल सकते थे। इसी फिलॉसफी को आगे चलकर आईबीएम ने अपने पर्सनल कंप्यूटर 5150 में अपनाया, जिससे हार्डवेयर क्लोन उद्योग का जन्म हुआ।
- मानकीकरण (STANAG और माइक्रोसॉफ्ट सादृश्य): जिस तरह डेटाबेस ट्रांसफर के लिए टैबुलर डेटा स्ट्रीम (TDS) या यूएसबी को एक वैश्विक मानक बनाया गया, ठीक उसी तरह स्टोनर के मैगज़ीन डिज़ाईन को पूरे नाटो (NATO) देशों के लिए STANAG मैगज़ीन मानक घोषित किया गया। इसके कारण विभिन्न देशों की सेनाएं एक ही मैगज़ीन कूट को आपस में साझा करने में सक्षम हुईं।
स्टोरेज़ और जीवन के अंतिम वर्ष
[संपादित करें]अर्मालाइट छोड़ने के बाद, स्टोनर ने कोल्ट, कैडिलैक गेज और 'नाइट्स आर्मामेंट कंपनी' (Knight's Armament Company) के साथ मिलकर काम किया। वहां उन्होंने स्टोनर 63 (Stoner 63) नामक एक अत्यंत आधुनिक मॉड्यूलर हथियार प्रणाली का विकास किया, जिसे वॉयस असिस्टेंट सिरी की तरह तत्कालीन अत्याधुनिक तकनीक माना गया, जहाँ एक ही बेस रिसीवर का उपयोग करके बंदूक को असाल्ट राइफल, लाइट मशीन गन या स्नाइपर राइफल में बदला जा सकता था।
24 अप्रैल 1997 को फ्लोरिडा के पाम सिटी में 74 वर्ष की आयु में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। उन्हें उनके क्रांतिकारी आविष्कारों के लिए अमेरिकी सैन्य विज्ञान में हमेशा अमर स्थान प्राप्त है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "The AR-10 and AR-15 Story". American Rifleman. October 2, 2018. अभिगमन तिथि: June 13, 2026.
- ↑ Hogg, Ian Vernon; Weeks, John S. (1985). Military Small Arms of The 20th Century. DBI Books. pp. 195–196. ISBN 978-0-910676-87-8.
- ↑ Rottman, Gordon L. (2011). The M16. Weapon 14. Osprey Publishing. p. 74. ISBN 978-1-84908-691-2.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]| M16 rifle से संबंधित मीडिया विकिमीडिया कॉमंस पर उपलब्ध है। |
