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एटेन क्षुद्रग्रह

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एटेन क्षुद्रग्रह (अंग्रेज़ी: Aten asteroid), सौर मंडल में स्थित 'निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रहों' का एक विशिष्ट कक्षीय समूह है। इस समूह का नाम इसके पहले खोजे गए 'प्रोटोटाइप' क्षुद्रग्रह 2062 एटेन के नाम पर रखा गया है, जिसकी खोज 1976 में प्रसिद्ध अमेरिकी खगोलशास्त्री एलेनोर हेलिन ने 'पालोमर वेधशाला' में की थी। 'अपोलो क्षुद्रग्रहों' के विपरीत, एटेन क्षुद्रग्रह अपना अधिकांश समय पृथ्वी की कक्षा के भीतर (सूर्य के करीब) बिताते हैं, लेकिन उनकी कक्षा इतनी अंडाकार होती है कि वे अपने पथ के सबसे बाहरी बिंदु पर पृथ्वी की कक्षा को पार करते हैं।[1][2]

खगोल भौतिकी और 'कक्षीय यांत्रिकी' में, किसी क्षुद्रग्रह को 'एटेन समूह' में वर्गीकृत करने के लिए दो प्रमुख गणितीय मापदंडों का पूरा होना आवश्यक है:

  • इसका अर्ध-दीर्घ अक्ष 1.0 खगोलीय इकाई से कम होना चाहिए। चूँकि पृथ्वी का अर्ध-दीर्घ अक्ष 1.0 AU है, इसका अर्थ है कि एटेन क्षुद्रग्रह की औसत कक्षा पृथ्वी की औसत कक्षा से छोटी होती है।
  • इसका अपसौर 0.983 AU से अधिक होना चाहिए ($Q > 0.983$ AU)। 0.983 AU पृथ्वी का 'उपसौर' (सूर्य से निकटतम दूरी) है।

इस प्रकार, अपने अपसौर के दौरान ये क्षुद्रग्रह पृथ्वी की कक्षा को भीतर से बाहर की ओर पार करते हैं, जिससे ये 'पृथ्वी की कक्षा पार करने वाले' बन जाते हैं।[3]

ग्रहीय रक्षा के दृष्टिकोण से एटेन क्षुद्रग्रह खगोलविदों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती प्रस्तुत करते हैं।

चूँकि ये क्षुद्रग्रह अपना अधिकांश समय पृथ्वी की कक्षा के भीतर बिताते हैं, इसलिए पृथ्वी से देखने पर वे ज़्यादातर समय दिन के आकाश में, सूर्य की चकाचौंध के बहुत करीब स्थित होते हैं। अधिकांश ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप केवल रात के आकाश में प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं, इसलिए एटेन क्षुद्रग्रहों का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। वे अक्सर तब खोजे जाते हैं जब वे पृथ्वी के बिल्कुल करीब आ चुके होते हैं। इस "अंधेरे क्षेत्र" की समस्या को दूर करने के लिए, नासा 'NEO सर्वेयर' जैसे इन्फ्रारेड स्पेस टेलीस्कोप विकसित कर रहा है।[4]

प्रमुख एटेन क्षुद्रग्रह

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इस समूह में कई वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण और संभावित रूप से खतरनाक क्षुद्रग्रह शामिल हैं:

  1. 99942 अपोफिस: यह संभवतः इतिहास का सबसे प्रसिद्ध निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रह है। हालांकि यह समय-समय पर अपोलो और एटेन समूहों के बीच अपनी कक्षा बदलता रहता है, लेकिन वर्तमान में इसे एटेन माना जाता है। 2029 में यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी के अविश्वसनीय रूप से करीब (भूस्थिर उपग्रहों से भी करीब) से गुजरेगा।
  2. 2062 एटेन: यह इस वर्ग का नामकरण करने वाला पहला पिंड है, जिसका व्यास लगभग 1 किलोमीटर है और इसकी कक्षा इसे हर कुछ वर्षों में पृथ्वी के करीब लाती है।
  3. 2100 रा-शालोम: 1978 में खोजा गया यह एक बड़ा एटेन क्षुद्रग्रह (व्यास ~2.3 किमी) है।[5][6]

कक्षीय विकास

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अमोर या अपोलो क्षुद्रग्रहों की तरह, एटेन क्षुद्रग्रहों की कक्षाएँ भी स्थिर नहीं होती हैं। लाखों वर्षों के समयमान में, पृथ्वी, शुक्र, और अन्य ग्रहों के साथ गुरुत्वाकर्षण अंतःक्रियाओं तथा 'यार्कोव्स्की प्रभाव' के कारण इनकी कक्षाएँ लगातार बदलती रहती हैं। कई एटेन क्षुद्रग्रह अंततः या तो सूर्य में गिरकर नष्ट हो जाते हैं, या आंतरिक ग्रहों से टकरा जाते हैं।[7]

सन्दर्भ

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  1. "Small-Body Database Query"
  2. "Discovery Statistics – Cumulative Totals"
  3. Morbidelli, Alessandro; Bottke, William F.; Froeschlé, Christiane; Michel, Patrick (2002). "Origin and Evolution of Near-Earth Objects". Asteroids III: 409–422.
  4. Mainzer, A.; Grav, T.; Bauer, J. (2011). "NEOWISE Observations of Near-Earth Objects: Preliminary Results". The Astrophysical Journal. 743 (2): 156. डीओआई:10.1088/0004-637X/743/2/156.
  5. Michel, Patrick; DeMeo, Francesca E.; Bottke, William F. (2015). Asteroids IV. University of Arizona Press. pp. 295–300. ISBN 978-0816532131.
  6. "List Of Aten Minor Planets (by perihelion distance)"
  7. Bottke, William F.; Vokrouhlický, David; Rubincam, David P. (2006). "The Yarkovsky and YORP Effects: Implications for Asteroid Dynamics". Annual Review of Earth and Planetary Sciences. 34: 157–191. डीओआई:10.1146/annurev.earth.34.031405.125154.

बाहरी कड़ियाँ

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