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एक्सोमून

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एक्सोमून (अंग्रेज़ी: Exomoon) या बाह्यचंद्रमा किसी सौर मंडल से बाहर स्थित ग्रह की परिक्रमा करने वाले एक प्राकृतिक उपग्रह को कहते हैं। जिस प्रकार हमारी पृथ्वी की परिक्रमा चंद्रमा करता है और बृहस्पति की परिक्रमा कई उपग्रह करते हैं, उसी प्रकार ब्रह्मांड में अन्य तारों के चक्कर काट रहे ग्रहों के भी अपने चंद्रमा होते हैं।[1]

यद्यपि वर्तमान में खगोलविदों ने हज़ारों बाह्यग्रहों की खोज कर ली है, लेकिन अत्यधिक दूरी और छोटे आकार के कारण एक्सोमून का पता लगाना आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है।[2][3]

खोज की चुनौतियाँ और तकनीकें

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एक्सोमून अपने मूल तारों से अरबों किलोमीटर दूर होते हैं और वे स्वयं कोई प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते। इसके अलावा, वे अपने मूल ग्रह की तुलना में बहुत छोटे होते हैं, जिससे उन्हें दूरबीनों से सीधे देखना असंभव होता है। खगोलविदों ने इन्हें खोजने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित अप्रत्यक्ष तरीकों का विकास किया है:

  1. पारगमन प्रकाशमिति: जब कोई बाह्यग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो वह तारे के प्रकाश को थोड़ा कम कर देता है, जिसे 'प्रकाश वक्र' में गिरावट के रूप में रिकॉर्ड किया जाता है। यदि उस ग्रह का अपना एक एक्सोमून भी है, तो वह भी तारे के प्रकाश में एक अतिरिक्त, बहुत छोटी और विशिष्ट गिरावट पैदा करता है।
  2. पारगमन समय भिन्नता: एक एक्सोमून का गुरुत्वाकर्षण अपने मूल ग्रह को थोड़ा पीछे या आगे खींचता है। इस कारण ग्रह का अपने तारे के सामने से गुजरने का सटीक समय थोड़ा बदल जाता है। इस सूक्ष्म कक्षीय विक्षोभ का अध्ययन करके खगोलविद चंद्रमा की उपस्थिति का अनुमान लगाते हैं।[4]

यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा अभी तक किसी भी एक्सोमून की "शत-प्रतिशत पुष्ट" खोज की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हबल और केपलर स्पेस टेलीस्कोप के डेटा से कुछ बहुत ही मजबूत उम्मीदवार सामने आए हैं:

  • केपलर-1625बी आई: 2017 में कोलंबिया विश्वविद्यालय के खगोलविदों अलेक्स टीची और डेविड किपिंग ने पृथ्वी से लगभग 8,000 प्रकाश-वर्ष दूर एक विशाल एक्सोमून के संकेत खोजे। यह संभावित चंद्रमा आकार में हमारे वरुण ग्रह (Neptune) जितना बड़ा है, जो एक विशाल गैस दानव ग्रह की परिक्रमा कर रहा है।[5][6]
  • केपलर-1708बी आई: 2022 में खोजा गया यह दूसरा मजबूत उम्मीदवार है, जो पृथ्वी से लगभग 5,500 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और इसका आकार पृथ्वी से लगभग 2.6 गुना बड़ा है।

खगोल जीव विज्ञान के दृष्टिकोण से एक्सोमून का अध्ययन अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हमारे सौर मंडल में, बृहस्पति का यूरोपा और शनि का टाइटन जैसे चंद्रमा जीवन के लिए अनुकूल वातावरण का संकेत देते हैं।

यदि कोई विशाल गैस दानव ग्रह (जैसे बृहस्पति) अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र (गोल्डीलॉक्स ज़ोन) में परिक्रमा कर रहा है, तो उस ग्रह पर तीव्र गुरुत्वाकर्षण और विकिरण के कारण जीवन संभव नहीं होगा। लेकिन, यदि उस ग्रह का पृथ्वी के आकार का कोई बड़ा एक्सोमून है, तो वहाँ की स्थिति बिल्कुल अलग हो सकती है। उस चंद्रमा पर तरल पानी, एक स्थिर वायुमंडल, और चुंबकीय क्षेत्र मौजूद हो सकता है, जो उसे ब्रह्मांड में जीवन की खोज के लिए सबसे आदर्श स्थान बना सकता है।[7][8]

सन्दर्भ

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  1. ↑ "Evidence for a large exomoon orbiting Kepler-1625b"[मृत कड़ियाँ]
  2. ↑ Perryman, Michael (2018). The Exoplanet Handbook. Cambridge University Press. pp. 285–290. ISBN 978-1108419772.
  3. ↑ "Shredded exomoon may explain weird behavior of Tabby's Star - Tabby's star may have kidnapped an icy "exomoon" from its parent planet and brought it close in, where the world evaporated, creating dust and debris"
  4. ↑ Sartoretti, Paola; Schneider, Jean (1999). "On the detection of satellites of extrasolar planets with the transit method". Astronomy and Astrophysics. 349: 549–556.
  5. ↑ Teachey, Alex; Kipping, David M. (2018). "Evidence for an exomoon orbiting Kepler-1625b". Science Advances. 4 (10): eaav1784. डीओआई:10.1126/sciadv.aav1784.
  6. ↑ "Determination of the size, mass, and density of "exomoons" from photometric transit timing variations"
  7. ↑ Heller, René; Armstrong, John (2014). "Superhabitable Worlds". Astrobiology. 14 (1): 50–66. डीओआई:10.1089/ast.2013.1088.
  8. ↑ "Detecting Extrasolar Moons Akin to Solar System Satellites with an Orbital Sampling Effect"

बाहरी कड़ियाँ

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