एक्सियन
एक्सियन (अंग्रेज़ी: Axion) 'कण भौतिकी' और 'खगोल भौतिकी' में एक अत्यंत हल्का, विद्युत रूप से उदासीन और पूरी तरह से काल्पनिक प्राथमिक कण है। इन कणों के अस्तित्व की परिकल्पना सबसे पहले 1977 में भौतिक विज्ञानी रॉबर्टो पेसेई और हेलेन क्विन ने 'क्वांटम क्रोमोडायनामिक्स' में मौजूद एक बड़ी खामी—जिसे मजबूत सीपी समस्या कहा जाता है-को सुलझाने के लिए की थी।
यदि एक्सियन वास्तव में ब्रह्मांड में मौजूद हैं और उनका द्रव्यमान एक विशिष्ट सीमा के भीतर है, तो वे ब्रह्मांड के रहस्यमय डार्क मैटर का सबसे मजबूत और प्रमुख घटक हो सकते हैं।[1][2]
कण भौतिकी के 'मानक मॉडल' के अनुसार, प्रकृति के कुछ बल (जैसे 'कमजोर नाभिकीय बल') 'चार्ज-पैरिटी' (CP) समरूपता का उल्लंघन करते हैं। इसका मतलब है कि यदि आप किसी कण को उसके प्रतिकण से बदल दें और उसकी दिशा उलट दें, तो भौतिकी के नियम थोड़े बदल जाते हैं।
हालाँकि, 'मजबूत नाभिकीय बल'-जो क्वार्क को बांधकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाता है-में सैद्धांतिक रूप से यह CP उल्लंघन होना चाहिए, लेकिन प्रयोगों में ऐसा कोई उल्लंघन आज तक नहीं देखा गया है। इसे ही 'मजबूत सीपी समस्या' कहा जाता है। इस समस्या को हल करने के लिए, पेसेई और क्विन ने एक नए प्रकार के 'समरूपता क्षेत्र' का प्रस्ताव रखा। भौतिक विज्ञानी फ्रैंक विल्चेक और स्टीवन वेनबर्ग ने स्वतंत्र रूप से महसूस किया कि इस नए क्षेत्र के परिणामस्वरूप एक नया कण पैदा होना चाहिए। विल्चेक ने इस कण का नाम कपड़े धोने वाले एक सुपरमार्केट डिटर्जेंट ब्रांड के नाम पर "एक्सियन" रखा, क्योंकि यह कण भौतिकी की इस गणितीय "गंदगी" को "साफ" कर रहा था।[3]
1980 के दशक तक, ब्रह्मांड विज्ञानियों ने महसूस किया कि यदि एक्सियन का द्रव्यमान अत्यंत कम (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का एक खरबवाँ हिस्सा) है, तो ब्रह्मांड के निर्माण के समय इनका भारी मात्रा में उत्पादन हुआ होगा।
ये 'शीत डार्क मैटर' के लिए सबसे आदर्श उम्मीदवार हैं क्योंकि:
खोज के तरीके और 'प्राइमाकॉफ प्रभाव'
[संपादित करें]चूँकि एक्सियन सामान्य पदार्थ के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते, इसलिए उन्हें खोजना अत्यधिक कठिन है। वैज्ञानिक इन्हें खोजने के लिए प्राइमाकॉफ प्रभाव का उपयोग करते हैं।
इस क्वांटम सिद्धांत के अनुसार, जब कोई एक्सियन एक अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र से गुजरता है, तो वह एक माइक्रोवेव फोटॉन (प्रकाश के कण) में बदल सकता है। इस प्रभाव का उपयोग करने वाले सबसे प्रमुख प्रयोगों में ADMX शामिल है, जो वाशिंगटन विश्वविद्यालय में स्थित है। इसमें एक विशाल, सुपरकंडक्टिंग चुंबक और एक अति-संवेदनशील माइक्रोवेव कैविटी का उपयोग किया जाता है, ताकि अदृश्य डार्क मैटर एक्सियन को फोटॉन में बदला जा सके और उनके सूक्ष्म संकेतों को पकड़ा जा सके। इसके अलावा, सूर्य के कोर में उत्पन्न होने वाले संभावित एक्सियनों को पकड़ने के लिए 'हेलिओस्कोप' का भी उपयोग किया जा रहा है।[6][7]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Peccei, R. D.; Quinn, H. R. (1977). "CP Conservation in the Presence of Pseudoparticles". Physical Review Letters. 38 (25): 1440–1443. डीओआई:10.1103/PhysRevLett.38.1440.
- ↑ "Hooft and η'ail Instantons and their applications"
- ↑ Wilczek, Frank (1978). "Problem of Strong $P$ and $T$ Invariance in the Presence of Instantons". Physical Review Letters. 40 (5): 279–282. डीओआई:10.1103/PhysRevLett.40.279.
- ↑ Preskill, John; Wise, Mark B.; Wilczek, Frank (1983). "Cosmology of the invisible axion". Physics Letters B. 120 (1–3): 127–132. डीओआई:10.1016/0370-2693(83)90637-8.
- ↑ "Light shining through a wall' experiment ALPS starts searching for dark matter"
- ↑ Sikivie, P. (1983). "Experimental Tests of the "Invisible" Axion". Physical Review Letters. 51 (16): 1415–1417. डीओआई:10.1103/PhysRevLett.51.1415.
- ↑ "Astrophysics and Dark Matter". NASA. अभिगमन तिथि: 26 जून 2026.