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एंटनी हविश

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एंटनी हविश

एंटनी हविश
जन्म 11 मई 1924
फाउई, कॉर्नवाल, इंग्लैंड
मौत 13 सितम्बर 2021
कैंब्रिज, इंग्लैंड
नागरिकता ब्रिटिश
शिक्षा की जगह कैंब्रिज विश्वविद्यालय (विद्यावाचस्पति)
प्रसिद्धि का कारण पल्सर की खोज, छिद्र संश्लेषण (अपर्चर सिंथेसिस)
पुरस्कार भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1974), एडिंगटन पदक (1969), ह्यूजेस पदक (1977)

एंटनी हविश (11 मई 1924 – 13 सितम्बर 2021) आधुनिक विज्ञान जगत के एक मूर्धन्य ब्रिटिश रेडियो खगोलशास्त्री और अप्रतिम अन्वेषक थे।[1] उन्होंने खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के परिदृश्य को अपनी तीक्ष्ण मेधा से सर्वदा के लिए परिवर्तित कर दिया। उनकी विश्वव्यापी ख्याति मुख्य रूप से 'पल्सर' (स्पंदमान न्यूट्रॉन तारा) की ऐतिहासिक खोज में उनकी निर्णायक और मार्गदर्शक भूमिका के कारण है।[2]

इस युगांतरकारी शोध के लिए उन्हें वर्ष 1974 में अपने सहयोगी मार्टिन राइल के साथ संयुक्त रूप से 'भौतिकी में नोबेल पुरस्कार' से अलंकृत किया गया था।[3] विज्ञान के इतिहास में यह अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी, क्योंकि यह पहली बार था जब खगोल विज्ञान (ऑब्जर्वेशनल एस्ट्रोनॉमी) के क्षेत्र में किए गए किसी कार्य के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।[4]

प्रारंभिक जीवन एवं विद्यार्जन

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एंटनी हविश का जन्म 11 मई 1924 को इंग्लैंड के कॉर्नवाल काउंटी में स्थित फाउई नामक एक तटीय नगर में हुआ था।[5] उनका बाल्यकाल किंग्ज़ कॉलेज, टॉनटन में शिक्षा ग्रहण करते हुए व्यतीत हुआ, जहाँ उनके भीतर प्रकृति और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने की उत्कट पिपासा उत्पन्न हुई।

वर्ष 1942 में उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विश्व-प्रसिद्ध 'कैंब्रिज विश्वविद्यालय' में प्रवेश लिया।[6] परंतु उसी समय द्वितीय विश्व युद्ध के चरम पर होने के कारण उन्हें अपनी शिक्षा बीच में ही स्थगित करनी पड़ी। युद्ध के दौरान उन्होंने रॉयल एयरक्राफ्ट एस्टेब्लिशमेंट और दूरसंचार अनुसंधान प्रतिष्ठान में रडार प्रौद्योगिकी के विकास पर महत्वपूर्ण कार्य किया।[7] इस दौरान रडार के साथ उनके गहन अनुभव ने ही उनके भविष्य के रेडियो खगोलशास्त्रीय अनुसंधानों की सुदृढ़ आधारशिला रखी।

युद्ध की समाप्ति के पश्चात, वर्ष 1946 में वे कैंब्रिज वापस लौटे और अपनी स्नातक की उपाधि पूर्ण की। इसके उपरांत, कैवेंडिश प्रयोगशाला में शोध करते हुए उन्होंने वर्ष 1952 में अपनी 'विद्यावाचस्पति' (पीएच.डी.) की सर्वोच्च उपाधि प्राप्त की।[8]

पल्सर की युगांतरकारी खोज

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कर्कट निहारिका (क्रैब नेबुला) का विहंगम दृश्य, जिसके केंद्र में एक अत्यंत प्रसिद्ध पल्सर स्थित है। पल्सर तारों की खोज ने खगोल विज्ञान में क्रांति ला दी।

अपनी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात हविश कैवेंडिश प्रयोगशाला में मार्टिन राइल के अनुसंधान समूह के एक अभिन्न अंग बन गए।[9] उन्होंने अंतरिक्षीय रेडियो स्रोतों से आने वाली तरंगों के झिलमिलाहट (सिंटिलेशन) का अत्यंत सूक्ष्म गणितीय और प्रायोगिक अध्ययन आरंभ किया। इस कार्य हेतु उन्होंने एक अत्यंत विशाल और विशेष प्रकार के रेडियो दूरदर्शी का निर्माण करवाया।[10]

वर्ष 1967 में इस वैज्ञानिक यात्रा का सबसे स्वर्णिम अध्याय उद्घाटित हुआ। हविश के मार्गदर्शन में शोध कर रही उनकी विलक्षण शोधार्थी जोसेलिन बेल (अब जोसेलिन बेल बर्नेल) ने दूरदर्शी से प्राप्त आंकड़ों में एक अत्यंत नियमित और रहस्यमयी रेडियो संकेत देखा।[11] यह संकेत हर 1.33 सेकंड में एक स्पंदन (पल्स) के रूप में आ रहा था। प्रारंभ में इस अचूक नियमितता को देखकर हविश और उनके समूह को लगा कि यह किसी बाह्य-ग्रहीय सभ्यता (एलियंस) द्वारा भेजा गया कृत्रिम संकेत हो सकता है, जिसे उन्होंने परिहास में 'एल.जी.एम.-1' (लिटल ग्रीन मैन) नाम दिया था।[12]

परंतु हविश के कठोर वैज्ञानिक विश्लेषण और निरंतर प्रेक्षणों ने शीघ्र ही यह अकाट्य रूप से सिद्ध कर दिया कि यह कोई कृत्रिम संकेत नहीं, अपितु एक अत्यंत सघन, तीव्र गति से घूर्णन करता हुआ 'न्यूट्रॉन तारा' है।[13] इसी खगोलीय पिंड को विज्ञान की भाषा में 'पल्सर' का नाम दिया गया। इस खोज ने ब्रह्मांड के निर्माण और तारों के अंतिम जीवन-चक्र की एक नितांत नवीन और परिष्कृत व्याख्या प्रस्तुत की।

प्रमुख सम्मान और निधन

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पल्सर की इस ऐतिहासिक खोज ने संपूर्ण वैज्ञानिक समुदाय को अचंभित कर दिया। हविश को खगोल विज्ञान और भौतिकी में उनके अद्वितीय योगदान के लिए विश्व भर में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए:

  • वर्ष 1969 में उन्हें रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी द्वारा प्रतिष्ठित 'एडिंगटन पदक' से सम्मानित किया गया।[14]
  • वर्ष 1974 में उन्हें खगोल विज्ञान के इतिहास का प्रथम भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।[15]
  • वर्ष 1977 में रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन ने उन्हें अपनी विशिष्ट फैलोशिप और 'ह्यूजेस पदक' से विभूषित किया।[16]

अपने अकादमिक जीवन में वे सदैव एक उत्कृष्ट शिक्षक और दूरदर्शी विचारक रहे। 13 सितम्बर 2021 को, 97 वर्ष की परिपक्व आयु में कैंब्रिज, इंग्लैंड में इस महान खगोलशास्त्री का शांतिपूर्ण देहावसान हो गया।[17] उनका अमूल्य कृतित्व और पल्सर की खोज अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में सदा के लिए अंकित रहेगी।

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. "Antony Hewish - British astronomer". Encyclopedia Britannica. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  2. "Antony Hewish, Astronomer Who Co-Discovered Pulsars, Dies at 97". The New York Times. 16 सितम्बर 2021. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  3. "The Nobel Prize in Physics 1974: Antony Hewish". Nobel Prize Outreach AB. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  4. Lyne, A. G.; Graham-Smith, Francis (2012). Pulsar Astronomy. Cambridge University Press.
  5. "Antony Hewish - Biographical". Nobel Prize Outreach AB. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  6. "Professor Antony Hewish (1924–2021)". University of Cambridge. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  7. Longair, Malcolm (2021). "Antony Hewish (1924–2021)". Nature. 597: 628.
  8. "History of the Cavendish Laboratory". Cavendish Laboratory, Cambridge. मूल से से 15 मई 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  9. Irvine, William M. (2006). Radio Astronomy: The History. Springer.
  10. Hewish, A. (1965). "Interplanetary Scintillation of Small Diameter Radio Sources". Nature. 207: 59–61.
  11. "Antony Hewish obituary". The Guardian. 16 सितम्बर 2021. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  12. Hewish, A.; Bell, S. J.; Pilkington, J. D. H.; Scott, P. F.; Collins, R. A. (1968). "Observation of a Rapidly Pulsating Radio Source". Nature. 217: 709–713.
  13. "Antony Hewish - Biography". The Royal Society. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  14. "Eddington Medal". Royal Astronomical Society. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.[मृत कड़ियाँ]
  15. Maddox, John (1974). "Nobel prize for physics: The First Astronomy Award". Nature. 251: 663.
  16. "Hughes Medal". The Royal Society. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
  17. "Antony Hewish, co-discoverer of pulsars, dies at 97". Physics Today. 17 सितम्बर 2021. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.

बाहरी कड़ियाँ

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