एंगस डीटन

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एंगस स्टीवर्ट डीटन (जन्म 19 सितम्बर 1945) स्कॉटिश और अमेरिकी व्यष्टि अर्थशास्त्री हैं।

वर्ष 2015 में उन्हें  उपभोग, दरिद्रता और कल्याण पर उनके विश्लेषण के लिए अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1][2]

जीवनी[संपादित करें]

डीटन का जन्म एडिनबर्ग, स्कॉटलैण्ड में हुआ और फेट्टिस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर और डी॰फिल॰ की उपाधियाँ प्राप्त की तथा वर्ष 1975 में उन्होंने मॉडल्स ऑफ़ कंस्यूमर डिमांड एंड देयर एप्लीकेशन टू द यूनाइटेड किंगडम (यूनाइटेड किंगडम उपभोक्ता मांग मॉडल और इसके अनुप्रयोग) विषय पर थीसिस लिखी जहाँ वो फिट्ज़विलियम कॉलेज के छात्र थे और डीपार्टमेंट ऑफ़ अपलाइड इकोनोमिक्स (व्यावहारिक अर्थशास्त्र विभाग) में रिचर्ड स्टोन और टेरी बार्कर के साथ शोध कार्य किया। डिटन 1983 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय जाने से पहले ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में अर्थमिति के प्रोफेसर रहे, जहाँ उनकी नियुक्ति ड्ब्ल्यू॰ड्ब्ल्यू॰एस॰ के पूर्व डीन जॉन पी॰ लुई के सुझाव पर हुआ था। वो प्रिंसटन में अर्थशास्त्र विभाग में तथा वूड्रो विल्सन स्कूल में अन्तर्राष्ट्रीय मामले और अर्थशास्त्र एवं अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर हैं। उनके पास ब्रितानी एवं अमेरिकी दोनों नागरिकता हैं।[3]

छात्रवृत्ति[संपादित करें]

डीटन का व्यापक रूप से प्रचलित प्रथम कार्य ऑलमोस्ट आइडियल डिमांड सिस्टम (लगभग आदर्श मांग निकाय) पर था जो उन्होंने जॉन मुइलब्यौर के साथ उन्नत किया तथा वर्ष 1980 में प्रकाशित किया। यह उपभोक्ता मांग का सरल उपाय सुझाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]