ऋषि (धर्म)

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" ऋषिर्दर्शनात् " अर्थात् ऋषि उसे कहते हैं जो स्वयं त्रिकाल सत्य परमपिता परमात्मा को जाननेे बाला होता है और जिज्ञासु को भी सत्य का दर्शन करबानेे बाला होता है । सत्यधर्म के ध्वजवाहक का ही दूसरा नाम ऋषि है । भारतवर्ष ऋषियों - मुनियों की भूमि रही हैै । हमारी सनातन - पुरातन संस्कृति समय - समय पर अवतरित ऐसे महापुरुषों की देन है जिन्होंने अपने जीवन काल में सृष्टि रचयिता के विधि - विधान का स्वयं पालन कर मानव मात्र को मानवता के धर्म को धारण करने की जीवनोपयोगी शिक्षा दी । मां चंडी ज्योतिष केंद्र अयोध्या विजोत्तम शास्त्री