ऋषभदेव नगर

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ऋषभदेव(धुलेव/रिखभदेव) उत्तर पश्चिम भारत की राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले दक्षिणी भाग में स्थित शहर हैं।

ऋषभदेव उदयपुर से 65 किलोमीटर (40 मील) दूर स्थित है, और उदयपुर-अहमदाबाद सड़क मार्ग (राष्ट्रिय राजमार्ग 48 (पूर्व नाम 8)) पर है। शहर का नाम धुलेव है, हालांकि यह बेहतर के रूप से ऋषभदेव/केशरियाजी के नाम से जाना जाता हैं, यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। मुख्य आकर्षण ऋषभदेव मंदिर है, प्रथम जैन तीर्थंकर एवं भगवान विष्णु के आंठ्वे अवतार। स्थानीय भील भी इनकी पूजा करते हैं। नगर का अन्य नाम केसरियाजी भी हैं क्युकी मंदिर में केसर से पूजा की जाती हैं।

इस मंदिर को मेवाड़ के चार मुख्य धार्मिक संस्थाओं में एक माना जाता हैं,  उदयपुर,[1] के चतुर सिंह जी के अनुसार:

"एकलिंग गिरिराजधर ऋषभदेव भुजचार
 सूमरो सदा स्नेह तो, चार धाम मेवाड़"

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

भारत की जनगणना,[2] २००१ के अनुसार नगर की जनसंख्या 8023 थी। पुरुष जनसंख्या 52%, और महिलाओं की 48%. नगर की औसत साक्षरता दर 76%, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% की तुलना में अधिक है। पुरुष साक्षरता 82% है, और महिला साक्षरता 70% है। नगर में, 14% जनसंख्या 6 वर्ष से कम उम्र की हैं। अभी उच्च शिक्षा (एमबीबीएस, बीटेक, बी कॉम, सी. ए. और कई पाठ्यक्रम) के लिए कई छात्र बाहर जा रहे हैं।

शहर के आधे निवासी जैन हैं, जिसमे 95% दिगंबर है, अन्य ब्राह्मण, सुथार, लोहार, दर्जी, मोची, कुम्हार, कलाल, पटेल, सोमपुरा आदि हैं। श्वेतांबर जैन भी यहां रहने वाले है। मंदिर के आसपास श्वेतांबर जैन और दिगंबर जैन, कई भील और मीणा आसपास के गांवों में रहते हैं, और प्रार्थना के लिए नित्य आते हैं।

हरे रंग के संगमरमर (ग्रीन मार्बल) के लिए भी प्रसिद्ध है। मसारो की ओबरी, ओडावास एवं कागदर में ३०० से अधिक खाने हैं, दुनिया भर के 90% प्रतिशत हरे रंग के संगमरमर उत्पादित किया जाता हैं। लगभग 70% प्रतिशत की हरे संगमरमर का निर्यात अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा और कई अन्य देशों में किया जाता है।

मुख्य मंदिर[संपादित करें]

Rishabhdeo Jain temple (9710280717).jpg


मुख्य मंदिर में भगवान ऋषभदेव की काले पत्थर से खुदी पद्मासन मुद्रा में 3.5 फीट (1.1 मी) ऊँची मूर्ति है।

श्रीराम मंदिर[संपादित करें]

भगवान राम का मंदिर भी इस नगर का मुख्य आकर्षण हैं।

गज मंदिर[संपादित करें]

गजमंदिर एक जैन श्वेतांबर मंदिर, जिसका का निर्माण 2011 किया गया, जो की किका भाई धर्मशाला के रूप में अच्छी तरह से जाना जाता है।

अन्य स्थानीय आकर्षण[संपादित करें]

आस-पास के स्थानों में प्रसिद्ध: पगल्याजी, रिषभ उद्यान, जैन मंदिर, राम मंदिर, इमलिया हनुमान जी, चंद्रगिरी, भीम पगल्या, भवन, दादाबाड़ी, पीपली मंदिर

References

  1. Mewar History: The State of Mewar and concept of Kingship, Trusteeship, webpage: MFhist.
  2. "Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional)".