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ऊर्णाजिन व्यापार

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1890 के दशक में नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज़ के फोर्ट चिपेवयान में एक फर व्यापारी

ऊर्णाजिन व्यापार (fur trade) अथवा फर व्यापार विश्वव्यापी उद्योग है जो जानवरों के फर उपार्जन और बिक्री से सम्बंधित है। आधुनिक काल की शुराआत में ही विश्व स्तर पर फर का बाज़ार तैयार हो गया। प्रारम्भिक काल में बोरियल, ध्रुवीय और ठंडे समशीतोषण स्तनधारी जानवरों के फर अधिक मूल्यवान रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से इस व्यापार ने साइबेरिया, उत्तर अमेरिका, दक्षिण शेटलैण्ड और दक्षिण सैंडविच द्वीपों को खोजने और उपनिवेश बनाने के लिए प्रेरित किया।

आज के समय में फर का महत्व कम हो गया है; इसे फर फार्म में उत्पादित खाल और विनियमित फर-धारक जाल से बनाया जाता है लेकिन यह विवादास्पद हो गया है। पशु अधिकारों से जुड़े संगठन फर के व्यापार का विरोध करते हैं जिनके अनुसार फर के लिए पशुओं को बेरहमी से मारा जाता है और कभी-कभी क्रूरता के साथ जीवित अवस्था में ही उनकी खाल उतार दी जाती है।[1] कुछ कपड़ों में फर के स्थान पर कृत्रिम नकल लगा दी जाती है।

महाद्वीपीय ऊर्णाजिन व्यापार

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रूसी ऊर्णाजिन

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यूरोपीय औपनिवेशिकरण से पहले पश्चिम यूरोप और एशिया के कुछ भागों में फर के मुख्य आपूर्तिकर्ता अमेरिका और रूस थे। इसका व्यापार प्रारंभिक मध्य युग (500–1000 ई॰) में विकसित हुआ। इसके शुरूआती व्यापार मार्ग बाल्टिक और काला सागर से होता था। फर का मुख्य व्यापारिक बाज़ार जर्मन नगर लाइपत्सिग था।[2] रूसी फर व्यापार का प्रथम आपूर्तिकर्ता कीवयाई रूस था।[3]

सन्दर्भ

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  1. "Feature: A Shocking Look Inside Chinese Fur Farms". पेटा.
  2. Fisher 1943, p. 197.
  3. Fisher 1943, p. 1.