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उलुध्वनि

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उलुध्वनि (जिसे जोकार, उरुलि, कुलवई, हुळ हुळि/मुहँघंट या हुळु हुळि के नाम से भी जाना जाता है) असम, बंगाल, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु में एक परंपरा है। इसमें विवाह और अन्य शुभ त्योहारों के दौरान महिलाएं मुँह से एक विशेष मंगल-कारक ऊँची ध्वनि निकालती हैं। यह उत्सव और समृद्धि का प्रतीक है। बंगाल में दुर्गा पूजा और काली पूजा के उत्सवों के दौरान इसका प्रचलन विशेष रूप से अधिक है।[1][2]

  1. Arunoday Natvarlal Jani (1996). Śrīharṣa. pp. 19-20.
  2. A.K. Warder (2004). Indian Kavya literature: The Wheel of Time, Volume 7, Part 2. p. 301.