उरुभंग

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उरुभंग (संस्कृत: ऊरुभंगम्), (अक्षरशः अर्थ- "घुटनों का टूटना"), भास द्वारा लिखा गया संस्कृत नाटक है। यह २री से ३री शताब्दी ईसवी के बीच लिखा गया।[1] यह सुप्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत पर आधारित है। उरुभंग भीमदुर्योधन के युद्ध के दौरान व उसके बाद के दुर्योधन के चरित्र पर केन्द्रित है। यद्यपि उरुभंग की केन्द्रीय पटकथा वही है जो महाभारत में है, परन्तु भास द्वारा कुछ परिप्रेक्ष्यों को बदल दिये जाने से कथा का निरूपण बदल गया है।[2] इनमें सबसे चरम बदलाव है- भास द्वारा दुर्योधन का चित्रण, जो कि महाभारत में एक खलनायक की तरह दिखता है, परन्तु उरुभंग में अपेक्षाकृत ज्यादा मानवीयगुणोपेत दिखाया गया है।[3] जबकि संस्कृत नाट्य में दुःखान्त नाटक दुर्लभ होते हैं, भास द्वारा कथा का दुर्योधन वाला पक्ष प्रदर्शित करना इस कथा में दुःखान्तकीय तत्व डाल देता है।[4]

सारांश[संपादित करें]

भीम का एक चित्र

उरुभंग प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत से कुछ भिन्न है। जबकि मूल ग्रन्थ में दुर्योधन खलनायक है, उरुभंग में वह एक अलग प्रकाश में दिखाया गया है। हालाँकि उसके मूल बुरे कार्यों से उसे बख्शा नहीं गया है, परन्तु उसे नायकीय गुणों से युक्त चरित्र की तरह दिखाया गया है।[5] यह नाटक उसकी मृत्यु के पहले होने वाली घटनाओं पर केंद्रित है; जब दुर्योधन अपने भूतकाल पर पछताता है, अपने परिवार के साथ सहानुभूति का रुख कर लेता है, तथा युद्ध की व्यर्थता का अनुभव करता है।

नाटक की शुरुआत में तीन सैनिक होते हैं, जो कि कौरव व पांडवों के बीच युद्ध पर आश्चर्य से देख रहे होते हैं। वे अपने समक्ष दृश्य को गहन विशदता के साथ वर्णन करते हैं, वे बारी बारी से वर्णन तथा उसपर विस्मयाभिव्यक्ति करते जाते हैं। जैसे जैसे वे युद्धक्षेत्र में चलते हैं, वे मँझले पांडव भीम तथा कौरव दुर्योधन के बीच युद्ध तक पहुँच जाते हैं।

दुर्योधन का एक चित्र

फिर वे सैनिक भीम-दुर्योधन युद्ध का वर्णन करने लगते हैं। दर्शकगण यह युद्ध पूर्णतया इन तीन सैनिकों के वर्णन के माध्यम से देख रहे हैं। अन्ततः भीम दुर्योधन के अविरत प्रहारों से गिर पड़ता है। दुर्योधन भीम को मारने से इसलिए रुक जाता है कि वह भूमि पर पड़ा है, जबकि वह भीम द्वारा नियम लाँघने से अपने घुटने तुड़वा बैठता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. खान, ए.आर. "Productions - Urubhangam." सेन्टर फ़ॉर एशियन् थिएटर्. 2004. CAT. 13 जुलाई 2008 <http://www.catbd.org/urubhangam.html>
  2. जी.के. भट के "Two Plays of Tragic Design and Tragic Intent." मुम्बई, भारत, से. पॉपुलर प्रकाश प्राइवेट लि. 1974. पृ.70
  3. जी.के. भट के "Two Plays of Tragic Design and Tragic Intent." मुम्बई, भारत, से. पॉपुलर प्रकाश प्राइवेट लि. 1974. पृ.72
  4. जी.के.भट के "Two Plays of Tragic Design and Tragic Intent." मुम्बई, भारत, से। पॉपुलर प्रकाश प्राइवेट लि. 1974. पृ.89
  5. जी.के.भट की "Two Plays of Tragic Design and Tragic Intent."मुंबई, भारत से। पॉपुलर प्रकाश प्राइवेट लि. 1974. पृ.69