उद्दालकपुत्र नचिकेता

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इनके विषय में एक कथा है कि एक बार उद्दालक ने नचिकेता को नदी के किनारे जाकर कुश, पुष्प, फलादि ले आने को कहा, जिन्हें वे वहाँ भूल आए थे। नचिकेता गए, किंतु वस्तुएँ प्राप्त न होने से खाली लौट आए। उद्दालक ने उन्हें खाली हाथ देख क्रोधित होकर कहा, जा तुझे यम के दर्शन हो। तत्काल नचिकेता का शरीर प्राणहीन होकर गिर पड़ा। उद्दालक विलाप करने लगे। प्रातःकाल होने पर नचिकेता पुनर्जीवित हो उठे और यमलोक के समस्त अनुभव पिता को सुनाने लगे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]