उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र

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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र


भारतीय सांस्कृतिक संपदा अभूतपूर्व है। आर्थिक एवं प्रौद्योगिकीय परिवर्तन सांस्कृतिक परिदृश्य को निरन्तर बदलते रहते हैं। कला के कई स्वरूप और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ संक्रमण के ऐसे संदर्भों में लुप्त हो जाते हैं। अत: हमारे वंशागत मूल्यों और समृध्द सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक तंत्र की स्थापना अनिवार्य हो जाती है। इसी उद्देश्य के साथ क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना की गई। [1]

संरचना[संपादित करें]

23 मार्च 1985 को भारत के प्रधानमंत्री ने अपने उत्तरी क्षेत्र के हुसैनीवाला में क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना की घोषणा की।[कृपया उद्धरण जोड़ें] सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों की अवधारणा को विस्तार 7 वीं पंचवर्षीय योजना में प्राप्त हुआ। इन केन्द्रों की स्थापना क्षेत्रीयता एवं भाषायी सीमाओं को पाटने उसे बढ़ावा देने तथा सदस्य राज्यों की शैलियों व संस्कृतियों में अंर्तसम्बन्ध स्थापित कर भारत की संगठित संस्कृति के प्रोत्साहन के ध्येय से की गई। [2]

इन केन्द्रों के मुख्यालय सामान्यतया राज्य की राजधानियों से दूर स्थित हैं। (कोलकाता में पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र को छोड़ कर) स्थान के चयन का मानदंड स्थान का परंपरागत सांस्कृतिक होना जनता की वहाँ तक पहँच होना है। संस्थागत रूप से प्रत्येक केन्द्र के पास एक परिसर होता है जिसमें प्रदर्शिनियों के लिए वीथियाँ, मंच कलाओं के लिए सुविधाएँ, प्रेक्षागृह, अभिलेखागार, पुस्तकालय इत्यादि शामिल होते हैं।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार एवं दिल्ली राज्यों के लिए बने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र का कार्यालय 14 सी.एस.पी.सिंह मार्ग इलाहाबाद -211001 में है। इसके संपर्क नंबर हैं-0532-2624475 2622833 (0532) PBX: 2623698 011-23318016 फेक्स-0532- 2623720

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

http://www.nczccindia.in/