इस्माईल पैगम्बर

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हज़रत इस्माईल हजरत इब्राहीम के सखे संतान थे। जब हज़रत इब्राहीम अल्लाह के आदेश से अपनी पत्नी और अपने बेटे को सफ़ा-मर्वा नामक पहाड़ियों में छोड़ आए थे जो सऊदी अरब स्थित है तब इस्माईल दूध पीते शिशु थे तो वो अत्यधिक तृष्णा से ग्रस्त हो कर धरती पर अपनी एड़ियाँ मारते थे। उनकी माँ बेचैन होकर एक तरफ अपने बेटे के लिये पानी ढूण्ढती और कभी सफ़ा तो कभी मर्वा की पहाड़ियों पर भागतीं ताकि वो इस्माईल की प्यास बुझा सकें। उन्हों ने अपना श्लेष्मल भी हज़रत इस्माईल को पिलाया था ताकि उनकी प्यास बुझ सके। जब वो सफ़ा-मर्वा की पहाड़ियों पर अपना सातवां चक्कर लगाने गईं तो उन्हों ने दृश्य देखा कि इस्माईल की एड़ियों से चश्मे फूट पड़े हैं। उन्हों ने उस पानी से कहा: "ज़म ज़म" जिसका अर्थ होता है "रुक जा"। वो पानी वहीं पर रुक गया और आज ज़मज़म कुंआ पानी शुद्ध एवं पवित्र माना जाता है क्योंकि वो हज़रत इस्माईल की एड़ियों से निकला था।

सन्दर्भ[संपादित करें]