आहुति

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आहुति अथवा हव्य अथवा होम-द्रव्य अथवा हवन सामग्री वह जल सकने वाला पदार्थ है जिसे यज्ञ (हवन/होम) की अग्नि में मन्त्रों के साथ डाला जाता है।

हव्य (आहुति देने योग्य द्रव्यों) के प्रकार[1][संपादित करें]

वस्तुतः होम द्रव्य ४ प्रकार के कहे गये हैं-

(१) सुगन्धित : केशर, अगर, तगर, चन्दन, इलायची, जायफल, जावित्री आदि

(२) पुष्टिकारक : घृत, फल, कन्द, अन्न, जौ, तिल, चावल आदि

(३) मिष्ट - शक्कर, छूहारा, दाख आदि

(४) रोग नाशक -गिलोय, जायफल, सोमवल्ली आदि

विशेष हवनों में स्थली पाक से भी होम होता है। उसमें खीर, हलुआ, लड्डू आदि मिष्ठान्नों का उपयोग होता है।

उपरोक्त चारों प्रकार की वस्तुएँ हवन में प्रयोग होनी चाहिए। अन्नों के हवन से मेघ-मालाएँ अधिक अन्न उपजाने वाली वर्षा करती हैं। सुगन्धित द्रव्यों से विचारों शुद्ध होते हैं, मिष्ट पदार्थ स्वास्थ्य को पुष्ट एवं शरीर को आरोग्य प्रदान करते हैं, इसलिए चारों प्रकार के पदार्थों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। यदि अन्य वस्तुएँ उपलब्ध न हों, तो जो मिले उसी से अथवा केवल तिल, जौ, चावल से भी काम चल सकता है।

किसी भी ऋतु में सामान्य हवन सामग्री[संपादित करें]

सफेद चन्दन का चूरा ४ भाग, अगर २.५ भाग, तगर २.५ भाग, गुग्गुल ५ भाग, जायफल १.२५ भाग, दालचीनी २.५ भाग, तालीसपत्र २.५ भाग, पानड़ी २.५ भाग, लौंग २.५ भाग, बड़ी इलायची २.५ भाग, गोला ५ भाग, छुहारे ५ भाग नागर मौथा २.५ भाग, गुलसुर्ख ५ भाग, इन्द्र जौ २.५ भाग, कपूर कचरी २.५ भाग, आँवला २.५ भाग, किशमिश ५ भाग, बालछड़ ५ भाग, नीम के पत्ते या राल ५ भाग, बूरा या खण्ड १० भाग, घी १० भाग।

विभिन्न ऋतुओं में होने वाले रोग भगाने के लिये हवन[संपादित करें]

वर्षा में हैजा, दस्त, फुन्सी, खुजली, आदि रोग फैलते हैं, शरद ऋतु में मलेरिया, जूड़ी, हड़फूटन, शिरदर्द आदि का जोर चलता है। शीत ऋतु में वातरोग, दर्द, खाँसी, जुकाम, निमोनियाँ आदि बढ़ते हैं, गर्मियों में लू लगना, दाह, दिल की धड़कन, कब्ज आदि की अधिकता रहती है। क्योंकि इस समय वायुमण्डल में वैसे ही तत्वों की अधिकता रहती है। हवन के धूम से आकाश की आवश्यक सफाई हो जाती है। हानिकारक पदार्थ नष्ट होते और लाभदायक तत्व बढ़ते हैं। फलस्वरूप वायुमण्डल सब किसी के लिए आरोग्य वर्धक हो जाती है।

ऋतु अनुसार हवन सामग्री[संपादित करें]

किस ऋतु में किन वस्तुओं का हवन करना लाभदायक है और उनकी मात्रा किस परिणाम से होनी चाहिए, इसका विवरण नीचे दिया जाता है। पूरी सामग्री की तोल १०० मान कर प्रत्येक ओषधि का अंश उसके सामने रखा जा रहा है। जैसे किसी को १०० छटांक सामग्री तैयार करनी है, तो छरीलावा के सामने लिखा हुआ २ भाग (छटांक) मानना चाहिए, इसी प्रकार अपनी देख-भाल कर लेनी चाहिए।

बहुधा खोटे दुकानदार सड़ी-गली, घुनी हुई, बहुत दिन की पुरानी, हीन वीर्य अथवा किसी की जगह उसी शकल की दूसरी सस्ती चीज दे देते हैं। इस गड़बड़ी से बचने का पूरा प्रयत्न करना चाहिए।

सामग्री को भली प्रकार धूप में सुखाकर उसे जौकुट कर लेना चाहिए।

हवन सामग्री : बसन्त-ऋतु[संपादित करें]

छरीलावा २ भाग, पत्रज २ भाग, मुनक्का ५ भाग, लज्जावती एक भाग, शीतल चीनी २ भाग, कचूर २.५ भाग, देवदारू ५ भाग, गिलोय ५ भाग, अगर २ भाग, तगर २ भाग, केसर १ का ६ वां भाग, इन्द्रजौ २ भाग, गुग्गुल ५ भाग, चन्दन (श्वेत, लाल, पीला) ६ भाग, जावित्री १ का ३ वां भाग, जायफल २ भाग, धूप ५ भाग, पुष्कर मूल ५ भाग, कमल-गट्टा २ भाग, मजीठ ३ भाग, बनकचूर २ भाग, दालचीनी २ भाग, गूलर की छाल सूखी ५ भाग, तेज बल (छाल और जड़) २ भाग, शंख पुष्पी १ भाग, चिरायता २ भाग, खस २ भाग, गोखरू २ भाग, खांड या बूरा १५ भाग, गो घृत १० भाग।

हवन सामग्री : ग्रीष्म-ऋतु[संपादित करें]

तालपर्णी १ भाग, वायबिडंग २ भाग, कचूर २.५ भाग, चिरोंजी ५ भाग, नागरमोथा २ भाग, पीला चन्दन २ भाग, छरीला २ भाग, निर्मली फल २ भाग, शतावर २ भाग, खस २ भाग, गिलोय २ भाग, धूप २ भाग, दालचीनी २ भाग, लवङ्ग २ भाग, गुलाब के फूल ५॥ भाग, चन्दन ४ भाग, तगर २ भाग, तम्बकू ५ भाग, सुपारी ५ भाग, तालीसपत्र २ भाग, लाल चन्दन २ भाग, मजीठ २ भाग, शिलारस २.५० भाग, केसर १ का ६ वां भाग, जटामांसी २ भाग, नेत्रवाला २ भाग, इलायची बड़ी २ भाग, उन्नाव २ भाग, आँवले २ भाग, बूरा या खांड १५ भाग, घी १० भाग।

हवन सामग्री : वर्षा-ऋतु[संपादित करें]

काला अगर २ भाग, इन्द्र-जौ २ भाग, धूप २ भाग, तगर २ भाग देवदारु ५ भाग, गुग्गुल ५ भाग, राल ५ भाग, जायफल २ भाग, गोला ५ भाग, तेजपत्र २ भाग, कचूर २ भाग, बेल २ भाग, जटामांसी ५ भाग, छोटी इलायची १ भाग, बच ५ भाग, गिलोय २ भाग, श्वेत चन्दन के चीज ३ भाग, बायबिडंग २ भाग, चिरायता २ भाग, छुहारे ५भाग, नाग केसर २ भाग, चिरायता २ भाग, छुहारे ५ भाग, संखाहुली १ भाग, मोचरस २ भाग, नीम के पत्ते ५ भाग, गो-घृत १० भाग, खांड या बूरा १५ भाग,

हवन सामग्री : शरद्-ऋतु[संपादित करें]

सफेद चन्दन ५ भाग, चन्दन सुर्ख २ भाग, चन्दन पीला २ भाग, गुग्गुल ५ भाग, नाग केशर २ भाग, इलायची बड़ी २ भाग, गिलोय २ भाग, चिरोंजी ५ भाग, गूलर की छाल ५ भाग, दाल चीनी २ भाग, मोचरस २ भाग, कपूर कचरी ५ भाग पित्त पापड़ा २ भाग, अगर २ भाग, भारङ्गी २ भाग, इन्द्र जौ २ भाग, असगन्ध २ भाग, शीतल चीनी २ भाग, केसर १ का ६ वां भाग, किशमिस ६ भाग, वालछड़ ५ भाग, तालमखाना २ भाग, सहदेवी १ भाग, धान की खील २ भाग, कचूर २.७५ भाग, घृत १० भाग, खांड या बूरा १५ भाग।

हवन सामग्री : हेमन्त ऋतु[संपादित करें]

कूट २ भाग, मूसली काली २ भाग, घोड़ावच २ भाग, पित्त पापड़ा २ भाग, कपूर २ भाग, कपूर कचरी ४ भाग, गिलोय २ भाग, पटोल पत्र २ भाग, दालचीनी २ भाग, भारङ्गी २ भाग, सोंफ २ भाग, मुनक्क ा ३.७५ भाग, गुग्गुल ५ भाग, अखरोट की गिरी ४ भाग, पुष्कर मूल २ भाग, छुहारे ५ भाग, गोखरू २ भाग, कोंच के बीच १ भाग, बादाम २ भाग, मुलहाटी २ भाग, काले तिल ५ भाग, जावित्री २ भाग, लाल चन्दन २ भाग, मुश्कवाला १ भाग, तालीस पत्र २ भाग, गोला ५ भाग, तुम्वुरु ५ भाग, खाण्ड या बूरा १५ भाग, गोघृत १०, भाग, रासना १ भाग।

हवन सामग्री : शिशिर-ऋतु[संपादित करें]

अखरोट ४ भागं, कचूर २ भाग, वायबिडंग २ भाग, इलायची बड़ी २ भाग, मुलहटी २ भाग, मोचरस २ भगा, गिलोय २ भाग, मुनक्क्क ५ भाग, रेणुका (संभाल) १ भाग, काले तिल ४ भाग, चन्दन ४ भाग, चिरायता २ भाग, छुहारे ४ भाग, तुलसी के बीज ४ भाग, गुग्गुल ३ भाग, चिरौंजी २ भाग, काकड़ासिङ्गी २ भाग, शतावर २ भाग, दारु हल्दी २ भाग, शंख पुष्पी १ भाग, पाद्मख २ भाग, कोंच के बीच १ भाग, जटामांसी १ भाग, भोजपत्र १ भाग, तुम्बर ५ भाग, राल ५ भाग, सुपारी २ भाग, घी ११.५ भाग, खाण्ड या बूर १५ भाग।

कैंसर से मुक्ति के लिये हवन सामग्री[संपादित करें]

निम्न सामग्रियों (सूची १) में से प्रत्येक की बराबर मात्रा लेकर उन्हें जौकुट कर लें. इनमें हवन सामग्री (सूची २) की बराबर मात्रा मिलाएं.

[2]

All these are used in equal proportion except Taxus baccata, which is used in half the proportion of the others.

सूची १[संपादित करें]

सदाबहार (Catharanthes roseus),

kutha (Arctium lappa or Saussurea lappa),

turmeric (Curcuma longa),

दारू हल्दी (Berberis vulgaris),

मुलहठी (Glycyrrhiza glabra),

sharpunkha (Tephrosia purpurea),

भारंगी (Clerodendrum serratum),

talis पत्र (Taxus baccata),

सीताफल की पत्तियां (Annona squamosa),

प्रियंगु (Prunus mahaleb),

छोटी kantakari (Solanum xanthocarpum),

अमलतास की पत्तियाँ (Cassra fistula),

कचनार छाल (Bauhinia variegate),

गुग्गुल (Gum resin of Balsamodendron mukul),

खैर or खदिर (Acacia catechu),

तेजफल or तुम्बरू (Zanthoxylum acanthopodium),

लहसुन (Allium sativum),

chida (Larix oxidantelis),

सलाई gum (Gum resin of Boswellia),

देवदार (Cedrus deodara),

दालचीनी (Cinnamomum Zeylanicum),

गोरखमुंडी (Sphaeranthus Indicus),

अशोक (Saraca indica),

dhamasa (Fagonta Arabica),

चक्रमर्दा or chakunda (Cassia ora),

small गोक्षरु (Xanthium Strumarium),

चित्रक (Plumbago Zeylanica),

अदरक (Zingiber officinale),

अपराजिता (Clitoria Ternatea),

श्वेत निशोथ (Lpomea trupethum),

लाल चन्दन (Pterocarpus Santalinus),

alua or ग्वारपाठा (Aloe barbadensis),

revandi chini or arachu (Rheum emodi),

पद्माख (Prunus puddum),

odhra (Symplocos racemosa),

नीम छाल एवं पत्ते, (Melia azedarach),

वरुण (Crataeva nurvala),

हरीतकी or हरड (Terminalia Chebula),

मकोय (Solanum nigrum),

patha (Cyclea Peltata),

स्वर्णक्षरी (Argemone mexicana),

सहजन (Moringa Pterygosperma),

श्यामा तुलसी (Ocimum Sanctum),

बनफ्सा (Viola odorata),

pilo jogido (Cancer root Cistanche tubulosal),

papari or निर्विषी (Podophyllum Paltetum),

बनगोभी or मयूर शिखा (Elephantopus scaber),

भल्लाटक (Semecarpus anacardium),

pataranga (Haematoxyloncampechianum),

chuka (Rumexsp), harchura (Viscum album),

aranya suran (Stilingia sylvatica),

purtuka or nakhuna (Astragalus Tribuloids),

katira (Saussurea sacra),

patanga (Caesalpinia Sappan),

शाला (Shorea robusta),

सप्तपर्ण (Alstonia Scholaris),

बरगद छाल (Ficus bengalensis),

पीपल छाल (Ficus infectoria),

गिलोय (Tinospora cordifolia),

jala पिप्पली (Lippia nodiflora),

पुष्कर मूल (Iris germanica),

अश्वगंधा (Withania Somnifera),

पुनर्नवा (Boerhana diffusa)

रुद्रवंती (Cressa cretica).

सूची २[संपादित करें]

अगर

तगर

देवदार

गिलोय

श्वेत चन्दन

रक्त चन्दन

अश्वगंधा

गुग्गल

लौंग

जायफल

This havan samagri is sacrificed with loud chanting of the Surya Gayatri Mantra (Om Bhur Buva¡ Swa¡, Bhaskaraya Vidmahe, Diwakaraya Dhimahi| Tanna¡ Surya¡ Prachodayat|| Swaha||). After putting each ahuti with the chant of Swaha, one should utter "Idam Suryaya, Idam Na Mam" to remember the altruistic teaching of yagya that it is for the benefit of entire creation and not for my selfish needs.

The best timings of this yagya are around the sunrise and sunset times. However, as per one's compulsions the timings could be shifted by one or two hours such that yagya gets over before it is dark. Minimum of 24 ahutis must be offered every day. More ahutis should be put as per the Ayurvedic yagyartherapist's recommendation.

references

  1. अखिल विश्व गायत्री परिवार, सांस्कृतिक धरोहर, यज्ञ का ज्ञान विज्ञान, गायत्री यज्ञ विधान, हवन सामग्री : http://hindi.awgp.org/?gayatri/sanskritik_dharohar/yagya_gyan_vigyan/gayatri_yagya_vidhan/havan_samagri
  2. अखंड ज्योति (शांतिकुंज, हरिद्वार)http://www.akhandjyoti.org/?Akhand-Jyoti/2007/may_jun_2007/YagyaTherapyCancer/