आहारीय कैल्शियम

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कैल्शियम एक भौतिक तत्त्व है। यह जीवित प्राणियों के लिए अत्यावश्यक होता है। भोजन में इसकी समुचित मात्र होनी चाहिए। खाने योग्य कैल्शियम दूध सहित कई खाद्य पदार्थो में मिलती है। खान-पान के साथ-साथ कैल्शियम के कई औद्योगिक इस्तेमाल भी हैं जहां इसका शुद्ध रूप और इसके कई यौगिकों का इस्तेमाल किया जाता है। आवर्त सारिणी में कैल्शियम का अणु क्रमांक 20 है और इसे अंग्रेजी शब्दों ‘सीए’ से इंगित किया गया है। 1808 में सर हम्फ्री डैवी ने इसे खोजा था। उन्होंने इसे कैल्शियम क्लोराइड से अलग किया था। कैल्शियम का नाम लातिन भाषा के शब्द ‘काल्क्स’ पर रखा गया है जिसका मतलब है चूना पत्थर जिसमें बड़ी मात्र में कैल्शियम पाया जाता है। पौधों में भी कैल्शियम पाया जाता है।

हडिडयों और दांतों के बनाने और रख-रखाव के लिए, मांसपेशियों के सामान्य संकुचन के लिए हृदय की गति को नियमित करने के लिए और रक्त की क्लॉटिंग करने के लिए यह आवश्यक होता है। कैल्शियम जीवन-शक्ति और सहनशीलता बढाता है, कोलेस्ट्रांल स्तरों का नियमन करता है, स्नायुओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है अरुअ रजोधर्म विषयक दर्दों के लिए ठीक है। एन्जाइम की गतिविधि के लिए कैल्शियम की आवश्यकता है। हृदय-संवहनी के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम मैग्नेशियम के साथ काम करता है। रक्त के जमाव के द्वारा यह घावों को शीघ्र भरता है। कुछ कैसर के विरुद्ध भी यह सहायक होती है। गर्भवती महिलाओं, 60 से अधिक उम्र के पुरुषों, 45 से अधिक उम्र की स्त्रियों, धूम्रपान करने वालों और अधिक मदिरापान वालों को कैल्शियम का खतरा रहता है। बच्चों में सूखा रोग कैल्शियम की कमी का लक्षण है।

विविटामिन 'डी' ‘डी’ की विशेष रूप से आवश्यकता कैल्शियम के समावेशन के लिए होती है। विटामिन ‘सी’ भी कैल्शियम के समावेशन में सुधार लाता है। सम्पूरक के रूप में कैल्शियम कार्बोनेट भोजन के साथ अधिक अच्छे ढंग से समावेशित होता है।

स्रोत[संपादित करें]

दूध और इसके उत्पाद, दाले, सोयाबीन, हरी पत्तीदार सब्जियां, नीबू जाति के फ़ल, सार्डीन, मटर, फ़लियां, मूंगफ़ली, वाटनट (सिंघाडा) सूर्यमुखी के बीज इस खनिज के महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि आहार में पर्याप्त कैल्शियम न हो तो विविध शरीरिक प्रक्रियाओं के लिये आवश्यक उस व्यक्ति की हडिडयों से लिया जाता है।